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कोरोना संकट की आड़ में ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर एफआईआर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 11, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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कोरोना संकट की आड़ में 'द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर एफआईआर

द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में कल 10 अप्रैल के दिन में दो बजे उत्तर प्रदेश पुलिस दिल्ली में उनके घर पहुंंच गयी. नंदिनी सुंदर ने ट्विटर पर बताया है कि सादे कपड़ों में आये सात-आठ लोगों ने कहा कि वे अयोध्या प्रशासन की तरफ से आयें हैं और सिद्दार्थ वरदराजन को एक नोटिस देना है. जब उन्हें कहा गया कि वे अपना नाम और परिचय बताएं तो उन लोगों ने इससे इनकार कर दिया. जब उन्हें कहा कि वे यह नोटिस डाक के डिब्बे में डाल दें तो भी उन्होंने मना कर दिया.

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दिन साढ़े तीन बजे पहले वाला व्यक्ति और कुछ वर्दी में एक वगैर नम्बर वाली एसयुवी में फिर से उनके घर आये. इनमें से कई ने कोरोना से निरापद रहने के लिए मास्क भी नहीं लगाया था. नाम पूछने पर सादी वर्दी वाले ने अपना नाम चंद्रभान यादव बताया. उन्होंने कहा कि इस अत्यावश्यक काम के लिए वे सीधे अयोध्या से चले आ रहे हैं.

The notice asks @svaradarajan to appear in Ayodhya April 14, 10 am (when lockdown will still be in force) in connection with FIR registered by the police for factual @thewire_in story which said Adityanath & others had attended a religious event in Ayodhya after the lockdown. 5/5

— N S (@nandinisundar) April 10, 2020

जब नंदिनी ने कहा कि यह नोटिस उन्हें दे दो तो उनका कहना था कि किसी महिला या अवयस्क को यह नोटिस देने का कानून नहीं हैं. उनसे पूछा गया कि यह किस नियम में लिखा है तो वे किसी को फोन करने लगे. फोन पर निर्देश मिलने के बाद नोटिस उन्हें दिया गया.

इस नोटिस में ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को 14 अप्रैल को सुबह दस बजे अयोध्या थाने में जांच के लिए हाज़िर होने को कहा गया है. उल्लेखनीय है कि उस दिन तक सारे देश में लॉकडाउन चल रहा होगा.

‘द वायर’ पर आरोप है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का 25 मार्च को देश भर में जारी लॉकडाउन के बावजूद अयोध्या में रामनवमी के अवसर पर एक कार्यक्रम में शामिल होने की ख़बर को छापकर उसने डर या पैनिक फैलाया है.

‘द वायर’ ने जवाब में कहा है कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का जाना सार्वजनिक रिकॉर्ड और जानकारी का विषय है इसलिए FIR में लिखे गए IPC के प्रावधान ‘सरकारी मुलाज़िम द्वारा पारित आदेश की अवज्ञा’ और ‘विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य, नफ़रत और बुरी भावनाएंं पैदा करने या भड़काने वाले बयान’ जारी करना इस मामले में लागू नहीं होते.

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने पहले वरदराजन का एक ट्वीट के ज़रिये मज़ाक उड़ाते हुए कहा, ‘अब वेबसाइट चलाने के साथ-साथ, [तुम्हें] ये केस लड़ने के लिए भी चंदा मांंगना पड़ेगा.’

आपको बता दें कि वरदराजन के खिलाफ दो अलग-अलग जगहों पर मामला दर्ज किया गया है. पहला मामला फैजाबाद में भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 505 (2) के तहत दर्ज किया गया है, वहीं दूसरा मामला अयोध्या में धारा 188 और 505 (2) व आईटी एक्ट के 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है.

अभी तक तो दिल्ली पुलिस ही कोरोना संकट की आड़ में लोगों को उठा रही थी. कल रात में भी पुलिस ने दिल्ली के जामिया नगर से सफूरा नामक जामिया की छात्रा को दंगे के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. दिल्ली में कोई प्रतिरोध हुआ नहीं तो अब बड़े पत्रकारों को भी लापता जा रहा है. ध्यान से देखें दिल्ली के किसी अखबार या न्यूज चैनल पर यह खबर शायद ही दिखे.

– पंकज चतुर्वेदी, स्वतंत्र पत्रकार

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