Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

विदेशी निवेश के घातक प्रभाव: विदेशी कम्पनियों के “डैमेज कन्ट्रोल” की मांग

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 10, 2017
in ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत जैसे विशाल बाजार को अन्तर्राष्ट्रीय बजार के सामने खुला छोड़ने और विदेशी निवेशकों को लाल कालीन बिछा कर देश में पूंजी लगाने का काला अध्याय अब दिखने लगा है. तत्कालीन सरकार के इस आत्मघाती कदम का देश की जनता तथा बुद्धिजीवियों ने जमकर विरोध भी किया था, पर अमेरिका के चरणों पर बिछने को आतुर देश की बिकी हुई दलाल सरकार ने सारे विरोधों को दरकिनार कर देश में विदेशी निवेशकों को न केवल आमंत्रित ही किया वरन् उसके सुख-सुविधा के लिए देशी कम्पनियों के हितों को ताक पर रखकर विदेशी कम्पनियों के लिए नीतिगत बदलाव भी किये. इसके बावजूद विदेशी कम्पनियों आज देश के गले में अटकी हड्डी ही साबित हो रही है.

विदेशी कम्पनियां इस देश में इसी शर्त पर निवेश के लिए राजी हुई थी कि ‘‘अगर भारत में निवेश के बाद उसे नुकसान होता है तो उसकी भरपाई भारत सरकार को करनी होगी.’’ अब इस शर्त के अनुसार विदेशी कम्पनियों ने भारत सरकार पर 45 हजार करोड़ रूपये का डैमेज कन्ट्रोल के नाम पर क्षतिपूर्ति की मांग कर और मुकदमा दायर किया है. यूके के कम्पनी बेदांता ने सबसे ज्यादा 20 हजार करोड़ रूपये का क्षतिपूर्ति की मांग के साथ मुकदमा किया है तो वहीं देवास मल्टीमिडिया ने 6,500 करोड़ रूपया के मांग के साथ मुकदमा दायर किया है. इस तरह बैठे बिठाये विदेशी कम्पनियों को 45 हजार करोड़ रूपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने की मांग के आगे हम देश में आत्महत्या कर रहे किसानों की छवि को देख सकते हैं, जो महज चंद हजार करोड़ रूपये की अपनी सम्पूर्ण कर्ज के बकाये के डर से आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

विदेशी कम्पनियों की देश की अर्थव्यवस्था पर इतना ज्यादा प्रभुत्व हो चुका है कि भारत सरकार निश्चित रूप से उसकी मांग के आगे घुटने टेक देगी और देश की अर्थव्यवस्था और ज्यादा रसातल में जाने को बाध्य होगी. बता दें देश के हर बुनियादी हिस्सों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्यान्न सहित विदेशी निवेश हो चुकी है.

इसी मुद्दे पर 18 से 28 जुलाई को आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में आर.ई.सी.पी. (इंटर-सेसनल रिजनल कम्प्रहैन्सिव इकोनाॅमिक पार्टनरशिप) की बैठक होनी वाली है, जिसमेमं विश्व के 16 देश भाग ले रही है. इसमें भारत सहित म्यांमार, लाओस, वियतनाम, थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, ब्रुनेई, सिंगापुर, इंडोनेशिया के अलावे चीन, जापान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया भाग ले रही है. देश में विदेशी निवेश के मामले सिंगापुर दूसरे स्थान पर तो जापान तीसरे, दक्षिण कोरिया चैथे और चीन 17वें स्थान पर है. जाहिरा तौर पर इस बैठक में सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया और चीन अपने-अपने देश के निवेशिकों की डैमेज कन्ट्रोल हेतु मुआवजे की भुगतान हेतु ज्यादा आक्रामक है, जिससे निपटने के लिए भारत की मोदी सरकार जैसी दलाल सरकार कतई सक्षम नहीं है. वह तो इन्टरनेशनल ट्रिब्यूनल में मामले न चला जाये इसलिए भी भयाक्रांत हैं.

इन्टरनेशनल ट्रिब्यूनल के डर से निश्चिय ही भारत सरकार को इन विदेशी निवेशकों के 45 हजार करोड़ के भारी-भरकम मुआवजे की मांग को मानना ही होगा, जिसका परिणाम देश की मेहनतकश जनता को भुगतना होगा. देश में एक बार फिर नोटबंदी और जीएसटी के भारी टैक्स वसूली अलावे अन्य आघात के लिए तैयार रहना चाहिए जिसका बीज यह सरकार विदेशी निवेश के अलावे अन्य रूपों में बो चुकी है और बोने जा रही है. हम मोदी सरकार के द्वारा लगातार देश की जनता के साथ किये जा रहे नोटबंदी और जीएसटी जैसे घातक 28 प्रतिशत जैसे भारी-भरकम टैक्स को देशी और विदेशी कम्पनियों के इसी क्षतिपूर्ति की अदायगी के रूप में देखने को बाध्य हैं.

Previous Post

अफीम के नशे से भी ज्यादा मदहोश करने वाली नशा है धर्म

Next Post

अमेरिका और इजराइल का हमसफ़र : विश्व नेता बनने की सनक में देश को शर्मसार न कर दें मोदी !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

अमेरिका और इजराइल का हमसफ़र : विश्व नेता बनने की सनक में देश को शर्मसार न कर दें मोदी !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

‘किसी की ट्रेजडी किसी की कॉमेडी बन जाती है’ – चार्ली चैपलिन

April 27, 2024

अरविन्द केजरीवाल का पत्र जनता के नाम

July 2, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.