Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जनआंदोलन स्पष्ट राजनीतिक चेतना और नेतृत्व के बिना पानी का बुलबुला है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 5, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जनआंदोलन स्पष्ट राजनीतिक चेतना और नेतृत्व के बिना पानी का बुलबुला है

Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी, राजनीतिक विश्लेषक

जब शाहीन बाग आंदोलन चल रहा था तब बहुत सारे तथाकथित लिबरल बुद्धिजीवी, जिनको राजनीति शब्द से चिढ़ है, इस बात पर इतरा रहे थे कि चूंंकि इस आंदोलन का कोई राजनीतिक लीडरशिप नहीं है, इसलिए यह जनता का स्वत:स्फूर्त विरोध है और वैसा ही रहना चाहिए.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

आज, जब लॉकडाउन की आड़ में उस आंदोलन के मुखर चेहरों को यूएपीए के तहत एक क्रिमिनल तड़ीपार गिरफ़्तार कर रहा है, आंदोलन के पास राजनैतिक नेतृत्व का अभाव होना सबको खल रहा है. ये सच है कि योगेन्द्र यादव जैसे कतिपय एक्टिविस्ट उनके समर्थन में आज भी खड़े हैं और पहले भी थे, लेकिन ये काफ़ी नहीं है.

आंदोलनकारी ये भूल गए थे कि उनका सामना एक ऐसे निजाम से है जो कि मूलतः फ़ासिस्ट हैं और चुनावी चोरी के माध्यम से सत्ता हथिया कर देश को लूटने के लिए और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिये ही बैठा है. दुनिया के इतिहास में हर जगह फ़ासिस्ट चुनाव जीतकर ही सत्ता हथिया लेते हैं.

ऐसा होने पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या किसी भी सांविधानिक पद या संस्था की गरिमा काग़ज़ पर लिखी गई एक बेकार की बात बन कर रह जाती है. अवचेतन में जनता उनसे उम्मीद लगाए बैठती है कि भला कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री या गृहमंत्री के पद पर बैठे इतना ‘नीच’ कैसे हो सकता है ? जनता भूल जाती हैं कि ये ‘नीच’ हैं इसलिए इस पद को पाने के लिए हर संभव नीचता कर यहांं तक पहुंंचे हैं.

मूल प्रश्न पर लौट आना चाहिए. शाहीन बाग आंदोलन के राजनीतिक नेतृत्व नहीं होने के फलस्वरूप आज यह बिखर गया. मोदी सरकार को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप दो महीने धरना पर बैठे हैं या दो सौ साल. वे तो यही चाहते हैं कि आप कायराना गांधीवादी तरीक़ा अपनाएंं और उनकी गोलियांं भी बची रहे और आप राजनीतिक रूप से अपने क्रियाशील होने के दंभ में खुश.

वे इस बात पर खुश कि आप वाक़ई में उनका कुछ भी बिगाड़ने की स्थिति में न कभी थे और न कभी होंगे. इसके उलट, वे यह कहेंगे कि ये आंदोलन तो मुस्लिम समुदाय का है और इसकी आड़ में दिल्ली में जनसंहार करवा देंगे. उन्होंने ऐसा ही किया और देश के बहुसंख्यक बुद्धिजीवी इसे दंगा कहते रहे, जबकि हमला एकतरफ़ा था. कोरोना ने फ़ासिस्ट सरकार को कर्फ़्यू लगाने का मौक़ा दिया और उसके बाद की कहानी सबको मालूम है.

आज जब छ: महीने की गर्भवती स्त्री को जेल में झूठे आरोप में ठूंंस दिया जाता है और उसके लिए लड़ने के लिए कोई राजनेता नहीं है, तब शायद लोगों को समझ आ गया होगा कि ग़ैर राजनीतिक चेतना संपन्न कोई भी आंदोलन सिर्फ़ आत्मघाती होता है.

मत भूलिए कि यह एक देश है जहां लॉकडाउन खुलने के दो घंटे के अंदर बंगलौर जैसे शहर में पैंतालीस करोड़ का दारू बिक जाता है और दिल्ली सरकार एक दिन में दारू पर सत्तर प्रतिशत टैक्स बढ़ा देती है.

ये दो उदाहरण काफ़ी हैं आपको समझाने के लिए कि इस देश के मध्यम वर्ग लोगों की राजनीतिक चेतना कितनी उन्नत है ! अब ये पियक्कड़ जोंबी फ़ासिस्ट एजेंडा ही पूरा करने के लिए कंडिशन्ड हैं, आपके साथ जुड़ने के लिए नहीं मेरे शाहीन बाग के साथियों. जन आंदोलन स्पष्ट राजनीतिक चेतना और नेतृत्व के बिना महज़ एक पानी का बुलबुला है.

Read Also –

कोराना वायरस : अर्थव्यवस्था और प्रतिरोधक क्षमता
हर संघी ब्राह्मणवाद और सामंतवाद का लठैत मात्र है
कोरोना ने राजनीति और उससे उपजी सत्ता के चरित्र का पर्दाफाश किया
‘आप बोलेंगे, और अपनी बारी आने से पहले बोलेंगे’

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

बेहद गंभीर जरूरी और मार्मिक सवाल

Next Post

करण थापर का इंटरव्यू और नरेंद्र मोदी का ‘शीघ्रपतन’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

करण थापर का इंटरव्यू और नरेंद्र मोदी का 'शीघ्रपतन'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जितने घातक कृषि बिल हैं, उतने ही घातक शिक्षा नीति के प्रावधान हैं

March 3, 2021

राजनीतिक स्वार्थ के लिए बच्चों तक के खिलाफ काम करती भाजपा

February 14, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.