Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

किसान यानी आत्महत्या और कफन

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 19, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

किसान यानी आत्महत्या और कफन

कुछ हलचल हुई है कोरोना के बाद जिसमे की सर्वाधिक नुकसान किसान और मजदूर वर्ग को हुआ है, जिस पर भारत की 55% आबादी आश्रित रहती है लेकिन जीडीपी में हिस्सेदारी मात्र अब 14% रह गयी है, क्यों ?

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

अगर स्वतंत्रता के बाद देखा जाये तो कृषि का जीडीपी में सर्वाधिक हिस्सेदारी था, लेकिन अब वही तीसरे पायदान पर आ गया है. अगर पिछले दो-दशक का आंंकलन करे तो किसानों के लिए भायवह परिस्थिति रही है.

पिछले 5 साल और ही भयावह है. लगभग 3 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है, इसमें सबसे दुःख भरी बात है कि इन 3 लाख में 20% से अधिक महिला किसान शामिल है.

महिला किसान कि आत्महत्या से एक घातक संदेश जाता है कि कृषि में महिलाओ का आना बहुत ही आत्मघातक कदम साबित हो सकता है, जो की आने वाली किसान महिलाओ को अंधकार भविष्य दिखाता है. इससे उनकी भागीदारी कृषि में कम होगी.

महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और पंजाब राज्यों में यह तेजी देखी गई है. रिपोर्ट के अनुसार इन आत्महत्याओं के पीछे मुख्य कारण ऋण की अदायगी न कर पाना, कर्ज में वृद्धि, खाद्यान्न उत्पादन में कमी, अनाज की घटती कीमत तथा लगातार फसलों की बर्बादी है.

इन सभी राज्यों में किसान कपास और गन्ना जैसी नगदी फसलें उगाते हैं, जिनकी लागत बहुत अधिक होती है. रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों में किसान 24 से 50 प्रतिशत ब्याज पर निजी साहूकारों से ऋण लेता है, जिसे अदा करने की उसकी क्षमता नहीं होती. यहां से सरकार के उस KCC ऋण पर सवाल उठते है.

यूपीए की पहले दौर की सरकार द्वारा गठित अर्जुन सेनगुप्ता कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार 2005 में किसान की औसत आमदनी 14 रुपए प्रतिदिन थी. उड़ीसा में किसान की प्रति व्यक्ति आय सबसे कम अर्थात 6 रुपए प्रतिदिन तथा मध्य प्रदेश में 9 रुपए प्रतिदिन थी.

आगे सफर करते हैं तो देखा जाता है कि ‘राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन’ (एनएसएसओ) के 59वें दौर की रिपोर्ट के आधार पर ‘राष्ट्रीय किसान आयोग’ ने अपनी सिफारिश (2007) में उल्लेख किया था कि भारत के 40 प्रतिशत किसान खेती छोड़ने को तैयार बैठे. अभी हालत और बदतर है. सरकार इसकी जानकारी भी मुहैया नहीं करा रही है.

एनएसएसओ के 70वें दौर के सर्वे की रिपोर्ट किसानों की आय की बदहाली बयांं करती है. उसके अनुसार वर्ष 2013 में भारत में एक खेतीहर परिवार की औसत मासिक आय 6,426 रुपए थी. वर्तमान में भी यह आय लगभग उतनी ही है.

इस आय के तहत पांंच सदस्यों वाले किसान परिवार के हरेक सदस्य रोज लगभग 42 रुपए कमाते हैं. अंदाजा लगा सकते हैं क्या हालत है. उस पर अपने परवरिश को अच्छा स्कूल, कपड़ा इत्यादि देने का दवाब रहता है.

वर्ष 2014-15 के अन्तरिम बजट में किसान को कर्ज देने के लिए 8 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो राष्ट्रीय बजट के 45 प्रतिशत के बराबर है.

पूंंजी केन्द्रित कारपोरेट खेती को बढ़ावा दे रही भारत सरकार ने किसान को बैंक का कर्ज पटाने वाला बंधुआ मजदूर बनाकर रख दिया है.

घाटे का सौदा बना दी गई खेती से अब तक 1.5 करोड़ किसान पलायन कर चुके हैं और प्रतिदिन खेती छोड़ने वाले किसानों की संख्या 2 हजार से अधिक हो गई है.
लगता है अब ‘क’ से कलम नहीं –कफ़न और किसान हो गया है.

  • मृत्युंजय कुमार

Read Also –

मोदी कैबिनेट द्वारा पारित कृषि संबंधी अध्यादेश लागू हुए तो कंपनियों के गुलाम हो जाएंगे किसान
भारतीय कृषि का अर्द्ध सामन्तवाद से संबंध : एक अध्ययन
भारत में कृषि और भुखमरी
भारतीय कृषि को रसातल में ले जाती मोदी सरकार
20 लाख करोड़ का लॉलीपॉप किसके लिए ?
निजी होती अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार किसके लिए ?
मोदी द्वारा 5 साल में सरकारी खजाने की लूट का एक ब्यौरा
लूटेरी काॅरपोरेट घरानों के हित में मोदी की दलाली, चापलूसी की विदेश-नीति

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

वरवर राव समेत सभी राजनैतिक बंदियों की अविलंब रिहाई सुनिश्चित करो

Next Post

लुटेरे हैं … तो युद्ध है !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

लुटेरे हैं ... तो युद्ध है !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

संघी एजेंट मोदी : बलात्कारी हिन्दुत्व का ‘फकीर’

February 6, 2020

पुंसवादी मोदी का पापुलिज्म और मीडिया के खेल

October 15, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.