Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 18, 2020
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए ?

भारतीय संविधान के चार तथाकथित स्तम्भों में न्यायपालिका भी एक स्तम्भ है, जिसके प्रमुख नियंत्रण संस्थान सुप्रीम कोर्ट है. जैसा कि हम सब जानते हैं, यह सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर इतना ज्यादा मंहगा होता है कि देश के आम जन इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता. दो जून की रोटी को मोहताज देशवासी के लिए यह सुप्रीम कोर्ट एक विलासिता की चीज के अलावा और कुछ नहीं है. जब देश की आधी जनसंख्या भूख जैसी चुनोतियों से हर दिन जूझ रही हो तब ऐसी विलासिता (सुप्रीम कोर्ट) देशवासियों के साथ एक भद्दा मजाक है. फिर क्यों नहीं इस सुप्रीम विलासिता को बंद कर दिया जाये ?

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

इस सुप्रीम विलासिता की जरूरत किसे है ?

सुप्रीम कोर्ट अब ‘न्याय’ और ‘संविधान’ की व्याख्या के नाम पर अपराधियों, व्यभिचारियों, बलात्कारियों, हत्यारों का संरक्षक बन गया है. यह अब देश के करोड़ों दुखी और देश की जेलों में सालों से बंद लोगों की आखिरी उम्मीद नहीं है, बल्कि उसे जेल में ही खत्म कर देने का खूंख्वार औजार बन गया है, ऐसे में टैक्स पेयर के सैकड़ों करोड़ रुपयों को फूंकने का कोई मतलब नहीं रह गया है. इसके साथ ही देश की जनता और औरतों पर जुल्म ढ़ाने वालों की हिफाजत करना भी देश की दु:खी जनता के साथ भद्दा मजाक है.

केन्द्र की मोदी सरकार के सत्ता में आने के साथ ही तकरीबन हर संस्थान अपना संवैधानिक मूल्य खोकर मोदी सरकार की असंवैधानिक कामों का समर्थक बन गया है. ऐसे में पहले से ही बदनाम कार्यपालिका (पुलिस-प्रशासन) लोगों के निशाने पर है, जिसे देश की आम जनता सैकड़ों-हजारों की तादाद में मौत के घाट उतारती आ रही है, थाने फूंके जा रहे हैं. व्यवस्थापिका (विधायिका) के लोग भी मौत के घाट उतारे जा रहे हैं, ऐसे में कहीं ऐसा न हो कि न्यायपालिका खासकर सुप्रीम कोर्ट के जज भी अपने भ्रष्ट आचरण से देश की जनता को इतना दु:खी कर दे कि वह भी इन जजों को मौत की घाट उतारने लगे. यह दुर्दिन आये इससे पहले ही न्याय का मजाक बनाते और लोगों के दु:खों का कारण बनते भारत के सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए.

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट

जैसा कि हम सब जानते हैं, भारत जैसा विशाल देश पाकिस्तान के सामने थरथर कांपता है. पाकिस्तान कभी टिड्डी दल छोड़कर देश को तबाह कर डालता है तो कभी कबूतर छोड़कर देश की जासूसी करने लगता है. हालत यहां तक हो गई है कि अगर देश में कोई सांप काटने से भी मर जाता है तो हम उस सांप को पाकिस्तानी ऐजेंट करार देने में देर नहीं करते. गजब का देश है पाकिस्तान, जिसके एक इशारे पर भारत जैसे देश में तबाही मच जाता है और मीडिया-सरकार महीनों चीखते रहता है, रोता और कलपता रहता है.

ऐसे में हमें पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट का नजारा जरुर देखना चाहिए, जिसे सामने हमारा सुप्रीम कोर्ट और उसके जज एक टिड्डा या पिस्सू से ज्यादा का अहमियत नहीं रखता. पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस ने जहां सरकार की चूलें हिला दी थी, वहीं हमारे देश की सुप्रीम कोर्ट सरकार का पालतू कुत्ता बनना ज्यादा पसंद किया. यहां तक कि सरकार ने अपने पालतू कुत्ते सुप्रीम कोर्ट के जजों के गले में पट्टा पहनाकर अपने आंगन (राज्य सभा) में घुमाने भी लगा. पट्टे पहनने की इस खुशी में कुत्ता बना यह जज नाचने भी लगा.

परन्तु पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा नहीं किया. उसने न केवल कुत्ता बनने और पट्टा पहनने से इंकार कर दिया, उल्टे सरकार की चूलें हिला दी और उसके नाक में नकेल कस दी. आइये, देखते हैं महाबली पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आखिर क्या किया.

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में आखिर क्या हुआ ?

बात वर्ष 2007 की है. पाक सुप्रीम कोर्ट के 20वें मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने पाकिस्तान में भ्रष्टाचार और कमजोर प्रशासन को लेकर कई बार सरकार को फटकार लगा चुके थे. उसी दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनने के बाद 9 मार्च, 2007 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने पाक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश इफ्तिखार चौधरी से इस्तीफे की मांग की थी. चौधरी ने न सिर्फ राष्ट्रपति की मांग पर इस्तीफा देने से इनकार कर दिया बल्कि इसके खिलाफ आवाज भी उठा दी.

पाकिस्तान की आवाम इफ्तिखार चौधरी के ईमानदारी की मुरीद थी. लोगों में इस बात का गुस्सा था कि सरकार चौधरी पर गलत व्यवहार और पद के दुरुपयोग का आरोप लगा कर इस्तीफा मांग रही है. सरकार के खिलाफ लोगों ने आंदोलन छेड़ दिया. उस वक्त पाकिस्तानी मीडिया ने इसे लोकतंत्र बचाने की मुहिम नाम दिया था.

चौधरी ने जब इस्तीफा देने से मना किया तो परवेज मुशर्रफ ने उन्हें सस्पेंड कर दिया. देश के मुख्य न्यायधीश के निलंबन के खिलाफ लाहौर बार एसोसिएशन और वकील भी उनके समर्थन में आ गए. पाकिस्तान के कई हिस्सों में पुलिस और वकीलों के बीच झड़प हुई. वकीलों ने इस निलंबन को कानून का उल्लंघन बताया. पूरे पाकिस्तान में अदालतों का बहिष्कार हो गया, जिसके बाद सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ गया.

लंबी लड़ाई लड़ने के बाद शानदार जीत के साथ सुप्रीम कोर्ट लौटे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस इफ्तिखार एम. चौधरी का वकीलों और अन्य कर्मचारियों ने बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया. जैसे ही उनकी कार उन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट परिसर के प्रवेश द्वार पर पहुंची भीड़ ने उनके समर्थन में नारे लगाए और उनकी सरकारी कार पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं. इतना ही नहीं अदालत कक्ष में भी लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाते हुए उनका स्वागत किया. तो ये थी एक ऐतिहासिक घटना, जिसमेें पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को मूूंंह की खिला दी.

भारत की सुप्रीम कोर्ट बनी सरकारी सुपारी किलर

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट से इतर भारत की सुप्रीम कोर्ट सरकार के इशारे पर पालतू कुत्ता बन गई. जब इससे भी मन नहीं भरा तो बकायदा अपने गले में कुत्ते का पट्टा पहनकर सरकार के आंगन (राज्य सभा) में पूछ हिलाते हुए पहुंच गया. और आज भारत के सुप्रीम कोर्ट की यह हालत हो गई है कि अब वह बकायदा सरकारी इशारे पर किसी भी विरोधियों को काटने दौड़ जाती है. दूसरे शब्दों में कहा जाये तो आज वह सुपारी किलर बन गई है, जो सरकार के विरोधियों को एक-एक कर ठिकाने लगा रही है. ताज्जुब तो यह है कि यह सब वह ‘लोकतंत्र’ के नाम पर कर रही है, जहां कोई भी लोकतांत्रिक मूल्य तो छोड़िये मानवीय मूल्य तक नहीं बचा है.

 

 

 

Previous Post

आरएसएस-भाजपा एक दिन विवेकानंद की विचारधारा को खत्म करके ही दम लेगा

Next Post

डीएचएफएल : नीलामी में कानूनी लड़ाई, पर कंपनी का नुकसान तय

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

डीएचएफएल : नीलामी में कानूनी लड़ाई, पर कंपनी का नुकसान तय

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गढ़ेंगे हम एक दुनिया

April 23, 2023

शैलेन्द्र : गीतों के जादूगर का मैं छंदों से तर्पण करता हूं

December 16, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.