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लक्ष्मी विलास बैंक का सिंगापुर की सबसे बड़े ऋणदाता डीबीएस बैंक के लोकल यूनिट डीबीएस बैंक के साथ विलय

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 19, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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लक्ष्मी विलास बैंक का सिंगापुर की सबसे बड़े ऋणदाता डीबीएस बैंक के लोकल यूनिट डीबीएस बैंक के साथ विलय

गिरीश मालवीय

ऐसा पहली बार हो रहा है कि 25 शाखाओं वाले बैंक में 566 ब्रांच वाले बैंक का मर्जर किया जा रहा है. विश्व के बैंकिंग इतिहास में यह अनोखी घटना है. हम बात कर रहे हैं डीबीएस बैंक में लक्ष्मी विलास बैंक के मर्जर की. कर्मचारियों की संख्या से लिहाज से भी देखे तो लक्ष्मी विलास के कर्मचारियों की संख्या 4,349 है जबकि डीबीएस बैंक की कर्मचारियों की संख्या 4 के आंकड़े में भी नही पहुंची होगी.

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लक्ष्मी विलास बैंक देश के सबसे पुराने बैंकों में शुमार है. इसकी अलग-अलग राज्यों में 566 ब्रांच, 973 एटीएम मशीनें हैं. वहीं, डीबीएस बैंक की मात्र 25 शाखाएं अभी तक खुली है, जबकि यह 1994 से भारत मे काम कर रहा है. केंद्रीय बैंक ने किसी भारतीय बैंक को विदेशी मूल वाले किसी दूसरे बैंक के साथ विलय का आदेश दिया है. डीबीएस बैंक सिंगापुर का सबसे बड़ा बैंक है.

बैंक के बढ़ते एनपीए और इसे चलाने में आ रही कठिनाइयों के बीच केन्द्र सरकार ने सिंगापुर की सबसे बड़े ऋणदाता डीबीएस बैंक के लोकल यूनिट डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) के साथ विलय करने को कहा है. ऐसा पहली बार है जब किसी भारतीय बैंक को सुरक्षित रखने के लिए उसके विदेश प्रतिद्वंद्वी बैंक को चुना है.

आरबीआई ने कहा, ‘विलय योजना को मंजूरी मिलने पर इसकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) में सिंगापुर का डीबीएस बैंक 2500 करोड़ रुपये (46.3 करोड़ सिंगापुर डॉलर) लगाएगा. इसकी फंडिंग पूरी तरह से डीबीएस के मौजूदा संसाधनों से की जाएगी.’

दरअसल 2017 में सरकार ने डीबीएस बैंक की शाखाओं को भारत मे विस्तार करने से इसलिए रोक दिया था. सिंगापुर ने भारतीय स्‍टेट बैंक और आईसीआईसीआई जैसे बैंकों को कम्‍प्रेहेन्सिव इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एग्रीमेंट (सीईएसए) के तहत कुछ पॉलिसी का हवाला देते हुए अपने बाजार में विस्‍तार करने से रोक दिया. इसके परिणामस्‍वरूप भारत सरकार ने भी भारत में डीबीएस बैंक के रिटेल विस्‍तार को भी रोक दिया था.

एक और बात है एफडीआई को लेकर सिंगापुर तेजी से से मॉरीशस को पीछे छोड़ रहा है. भारत मे काले धन की राउण्ड ट्रिपिंग को लेकर सिंगापुर पहले से ही बदनाम है. इस तथ्य की पुष्टि इस बात से भी होती है कि कुछ महीने पहले अमेरिका ने फिनसेक पेपर्स बाहर आए हैं. इन कागजो की जांच करने से पता चलता है कि डीबीएस बैंक के भारत मे संदिग्ध लेनदेन काफी बढ़े हुए हैं.

डीबीएस बैंक से 26 बार में इलाहाबाद बैंक में करीब 14.42 करोड़ डॉलर भेजे गए. सिंगापुर मुख्यालय वाला डीबीएस से इंडियन ओवरसीज बैंक को 21 लेनदेन के जरिये 16.23 करोड़ डॉलर भेजे गए. ये लेन-देन 3 नंवबर, 2015 से 14 अप्रैल, 2016 के बीच किए गए थे. ऐसे और भी रिकार्ड है.

सबसे बड़ी बात तो यह है कि आरबीआई ने यह डिसिजन किस बिना पर लिया कि लक्ष्मी विलास बैंक का मर्जर डीबीएस में ही किया जाए ? इस बात की कोई जानकारी नही है बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन ने भी इस बात पर सवाल खड़े किए हैं.

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