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Home गेस्ट ब्लॉग

तानाशाह इतना डरपोक होता है !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 21, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
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तानाशाह इतना डरपोक होता है !

परसाई जी ने बहुत पहले कहा था कि तानाशाह इतना डरपोक होता है कि पांंच गधे भी साथ-साथ खा रहे होंं तो उसे डर पैदा हो जाता है, हालांकि गधे अपनी बिरादरीवाले के विरुद्ध षड़यंत्र नहीं करते. (आगे की कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं. इनका चरित्र-चित्रण किसी जीवित या मृत तानाशाह से मिलता-जुलता हो तो यह मात्र संयोग है).

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परसाई जी इक्कीसवीं सदी में होते तो शायद लिखते कि वह तो अपने महल में चींटियोंं को आता-जाता देखकर भी डर जाता है. सोचता है कि इन्हें ‘दुश्मनों’ (विरोधियों) ने मेरी हत्या का षड़यंत्र रचने के लिए जासूसी करने भेजा है, वरना इतनी सारी चींटियों के एकसाथ लगातार आते-जाते रहने का सबब क्या हो सकता है ?

उसकी दृष्टि इतनी ‘सूक्ष्म’ है कि ये चींटियांं क्या ला और क्या लेने जा रही हैं, यह नहीं देखता. ऐसा करना उसके षड़यंत्र-सिद्धांत के खिलाफ है. वह उन चींटियों के बिल पर ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई के छापे पड़वा देता है. उन पर तानाशाह के विरुद्ध हत्या के आपराधिक पड़यंत्र और राजद्रोह का केस करवा देता है. उनके घोंसले की छानबीन संभव नहीं तो उसे तुड़वा देता है. भागती चींटियों के पीछे पुलिस लगवा देता है. उधर घोंंसले से मिले सामान के साथ और सामान मिलाकर उसकी जब्ती को ‘महत्वपूर्ण सुराग’ मिलना बताता है.

यह सिद्ध होना ही है कि इन्हें राजनीतिक तथा आर्थिक अस्थिरता फैलाकर तानाशाह की हत्या के इरादे से भेजा गया था. मगर चींटियों को पकड़ने आई पुलिस सोचती है कि इन्हें पकड़ें कैसे ? जिन्हें हमने आज सुबह तक शक्कर खिलाई है, उन्हें पकड़ना तो वैसे भी बहुत बड़ा अधर्म है. तब इन सिपाहियों की गिरफ्तारी का आदेश पुलिस प्रमुख को देकर तानाशाह तय करता है कि यह काम अब स्पेशल ग्रुप करे. उसे भी इन्हीं कारणों से नाकामी मिलती है तो इसके सब सदस्यों गिरफ्तार कर लिए जाते हैंं.

इनमें से हरेक को उन पेड़ों से बंधवा दिया जाता है, जिनमें लाल चींटियांं हैं. इसके बाद पुलिस प्रमुख खुद पुलिसमंत्री के साथ तानाशाह को बुलाने जाता है. अपनी इस उपलब्धि का बखान करते हुए उसे एक-एक पेड़ के पास 30 इंच का सीना फुलाते हुए ले जाता है, मगर तानाशाह का सीना फूल कर 50 इंच का भी नहीं होता.

तानाशाह इन सबकी यह दशा देखकर थोड़ा खुश तो होता है, फिर अपने साथ चल रही फोर्स को अचानक आदेश देता है कि ऐ, इस पुलिस प्रमुख को भी पेड़ से बांंधो. ये षड़यंत्र को खोल नहीं पाया. केवल पुलिस फोर्स को सजा देने से क्या होता है ? फिर पुलिसमंत्री से कहता है, ऐ ये तेरी नाकामयाबी भी तो है. फिर उसका जवाब सुनने से पहले आदेश देता है इसकी भी सजा यही है. हांं इसके कराहने की जब इंतिहा हो जाए तो इसे मेरे पास ले आना. मल्हम मैं लगाऊंंगा.

इस बीच उन देशद्रोही षड़यंत्रकारियों की खोज चलती है, जिन्होंने तानाशाह के महल में चींटियांं भिजवाई थीं. जो भी तानाशाह से शतप्रतिशत सहमत नहीं थे, उसकी जयजयकार में शामिल नहीं थे, सब षड़यंत्रकारी निकले. ऐसे लोग खेती करनेवाले भी थे, खेत मजदूर भी, मजदूर और मजदूरों के हकों के लिए लड़नेवाली लड़की भी. पर्यावरणवादी लड़की भी, स्टैंडअप कामेडियन भी. पत्रकार, वकील, लेखक, अध्यापक सभी. दूसरे धर्मों के लोग भी. वे अस्सी साल के बूढ़े होंं या 21 साल की लड़की या पांंच साल के बच्चे-बच्ची. माँ के पेट में पलते बच्चे भी.

सही है जिस देश में चीटियांं तक षड़यंत्र की मजबूत कड़ी हों, वहांं पेट में पलता बच्चा क्या नहीं कहर नहीं ढा सकता ? अभिमन्यु भी तो आधी-अधूरी शस्त्रविद्या मांं के पेट से सीख कर आया था, बाद में उसने सीखा नहीं तो मारा गया. मगर आजकल के बच्चे पेट से सीखने के बाद बाहर आकर भी कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल आदि से इतना सीख जाते हैं कि चार साल की उम्र में तानाशाह के विरुद्ध षड़यंत्र करने लगते हैं.

तानाशाह पहले अट्ठारह घंटे जागता था, अब वह चौबीस घंटे जागने लगा इसीलिए वह अपने विरुद्ध यानी देश के विरुद्ध सूक्ष्मतम षड़यंत्र को भी पकड़ लेता था. उसने गूगल से पता किया कि एक देश के बर्फीले समुद्र के तल में सबसे सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, वे भी उसके विरुद्ध षड्यंत्र में शामिल हैं. उसने वहांं के मुखिया से अपने देश के गोताखोरों को उन सूक्ष्मजीवों की पकड़ कर उनको मौत की सजा देने की अनुमति मांंगी. वहांं के मुखिया ने मना कर दिया कि हमारे यहांं षड़यंत्र नहीं होते, सरकार के फैसलों का विरोध होता है. समुद्र की तलहटी में पलनेवाले जीव षड़यंत्री हो सकते हैं, यह विकृत दिमाग का तानाशाह ही सोच सकता है !

तानाशाह ने अपने देश मेंं वहांं के मुखिया के खिलाफ वैश्विक संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया. उसे समन भिजवाया कि वह पहले हमारी जांंच एजेंसी के सामने पेश होंं, तब आगे की कारवाई पर विचार होगा. ऐसा न करने पर हम उनकी गिरफ्तारी के लिए बाध्य होंगे. हमारा आदेश न मानने की स्थिति में हमारी जांंच एजेंसी गुप्त रूप से आपके देश में घुसकर आपको पकड़ लाएगी.

दुनियाभर मेंं इस बात पर तानाशाह का मजाक बना, मगर वह हंसनेवालों की परवाह करना छोड़ चुका था. उधर उसने अपने यहांं की अदालत में भी वहांं के मुखिया के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया है. इसकी सुनवाई पूरी हो चुकी है. अदालत से अभी अपना निर्णय सुरक्षित रखने को कहा गया है.

  • विष्णु नागर

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