Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

म्यूऑन g-2 : फिजिक्स के नियमों को नए सिरे से लिखने की जरूरत ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 15, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

म्यूऑन g-2 : फिजिक्स के नियमों को नए सिरे से लिखने की जरूरत ?

इन दिनों फिजिक्स की दुनिया में तहलका मचा हुआ है. हाल ही में वैज्ञानिकों ने अमेरिका की फर्मी नेशनल ऐक्सिलरेटर लैबोरेटरी (फर्मीलैब) में हुए प्रयोगों के नतीजों की घोषणा करते हुए बताया कि हमें इस बात के ठोस सबूत मिले हैं कि एक बेहद छोटा सबएटोमिक पार्टिकल (Subatomic particle) फिजिक्स के मौजूदा ज्ञात नियमों का उल्लंघन कर रहा है. बहुत से वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पार्टिकल फिजिक्स की हमारी समझ में किसी बड़े बदलाव की आहट है. लब्बोलुबाब यह है कि म्यूऑन (Muon) के नाम से जाने जाने वाले इस पार्टिकल्स पर हुए एक्सपेरीमेंट्स से यह पता चला है कि ब्रह्मांड की प्रकृति और विकास के लिए जरूरी पदार्थ और ऊर्जा के ऐसे रूप भी हैं जिनके बारे में हमें अभी भी पता ही नहीं है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

ज़्यादातर वैज्ञानिकों के मुताबिक हमारे ब्रह्मांड की उत्पत्ति आज से तकरीबन 13.7 अरब साल पहले ‘बिग बैंग’ यानी महाविस्फोट से हुई थी. ब्रह्मांड फिजिक्स के नियमों से संचालित हो रहा है. न सिर्फ ब्रह्मांड के वास्तविक स्वरूप और उसकी संरचना बल्कि उसका अतीत, भविष्य और वर्तमान को समझने के लिए हम फिजिक्स के नियमों का ही सहारा लेते हैं, जो ब्रह्मांड की छोटी-से-छोटी और बड़ी से बड़ी चीजों और घटकों की व्याख्या करता है, नन्हे एलीमेंट्री पार्टिकल्स से लेकर विराट आकाशगंगाओं तक ! म्यूऑन पार्टिकल्स पर हुए प्रयोगों के निष्कर्ष फिजिक्स के नियमों को लेकर हमारी समझ को बदलने में सक्षम हैं और ‘थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’ और डार्क मैटर, डार्क एनर्जी की व्याख्या में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी. अध्ययन के नतीजों को जर्नल फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित करवाया गया है.

फर्मीलैब में म्यूऑन पार्टिकल्स पर हुए प्रयोग स्टैंडर्ड मॉडल की भविष्यवाणियों (Predictions) से मेल नहीं खाते हैं. स्टैंडर्ड मॉडल पर ही पूरी पार्टिकल फिजिक्स आधारित है. अभी तक वैज्ञानिक यही मानते रहे थे कि स्टैंडर्ड मॉडल एक ऐसा खाका है, जिसके जरिए सूक्ष्म स्तर पर सभी चीजों की व्याख्या की जा सकती है. फर्मीलैब में म्यूऑन पर हुए प्रयोगों से मचे हलचल को 2012 में हिग्स बोसॉन (तथाकथित गॉड पार्टिकल) की खोज से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन दोनों बुनियादी तौर पर अलग-अलग हैं. जहां म्यूऑन पर हुए हालिया प्रयोग स्टैंडर्ड मॉडल पर ही सवाल उठाते हैं, वहीं हिग्स बोसॉन की खोज ने स्टैंडर्ड मॉडल को अंतिम रूप देने का काम किया या यूं कहें सम्पूर्ण बनाया था ! आइए, इन सब बातों को समझने के लिए पार्टिकल फिजिक्स की अद्भुत दुनिया का एक जायज़ा लेते हैं.

20वीं सदी की शुरुआत में किसी चीज की सबसे छोटी इकाई परमाणु यानी एटम ही था. ग्रीक भाषा में एटम शब्द का अर्थ ही यह है कि वह सबसे छोटा पार्टिकल जिसका और विखंडन (Fragmentation) संभव नहीं है. आज हम जानते हैं कि दो एटम मिलकर एक मॉलिक्यूल का निर्माण करते हैं. एटम प्रोटोन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन से बना होता है. इसके बाद वैज्ञानिकों ने फोटॉन, पॉजिट्रॉन, न्यूट्रिनो, एंटि-न्यूट्रिनो आदि पार्टिकल्स का भी पता लगाया. इस तरह एक के बाद एक एलीमेंट्री पार्टिकल्स की खोज होती गई.

इतने सारे पार्टिकल्स ने उनका क्लासीफिकेशन जरूरी बना दिया इसलिए वैज्ञानिकों ने पार्टिकल्स के द्रव्यमान के अनुसार उन्हें दो मुख्य श्रेणियों में बांट दिया. एक वर्ग के पार्टिकल्स को लेप्टोन और दूसरे वर्ग के पार्टिकल्स को हेड्रोन नाम दिया गया. जहां भारी पार्टिकल्स जैसे- प्रोटोन, न्यूट्रॉन, मेसॉन आदि को हेड्रोन वर्ग में जगह दी गई, वहीं इनकी तुलना में हल्के पार्टिकल्स जैसे- इलेक्ट्रॉन, म्यूऑन, न्यूट्रिनो आदि को लेप्टोन वर्ग में रखा गया है.

बहरहाल, वर्तमान में क्वार्कों के माध्यम से ही पार्टिकल्स को दर्शाया जाता है. क्वार्क के 6 प्रकार हैं- अप, डाउन, स्ट्रेंज, चार्म, टॉप और बॉटम. क्वार्क की तरह लेप्टोन के भी 6 प्रकार होते हैं- इलेक्ट्रॉन, इलेक्ट्रॉन न्यूट्रिनो, म्यूऑन, म्यूऑन न्यूट्रिनो, टाव लेप्टोन और टाव न्यूट्रिनो.

जो अभी तक पता है उसके मुताबिक स्टैंडर्ड मॉडल में कुल 17 पार्टिकल्स हैं. इनमें से 6 फर्मिआन हैं जैसे कि क्वार्क जिनसे न्यूक्लियस में न्यूट्रॉन एवं प्रोटोन संरचित होते हैं और 6 लेप्टोन हैं जैसे कि इलेक्ट्रॉन जो न्यूक्लियस के चारों तरफ घूमते हैं. क्वार्क और इलेक्ट्रॉन वे पार्टिकल्स हैं जिनसे द्रव्य की उत्पत्ति होती है. चार पार्टिकल्स को ‘गेज बोसॉन’ कहा जाता है. ये वे पार्टिकल्स हैं जो बलों को संचरित करते हैं और इस तरह से फर्मिआनों में इंटर रिएक्शन कराते हैं. हिग्स बोसॉन गेज बोसॉन नहीं है. हिग्स बोसॉन के संसर्ग में आने वाले पार्टिकल्स को द्रव्यमान मिलता है. मतलब हिग्स बोसॉन यानी गॉड पार्टिकल अन्य पार्टिकल्स को द्रव्यमान देने का काम करते हैं, बिना इसके ब्रह्मांड में कोई द्रव्यमान ही नहीं होगा.

स्टैंडर्ड मॉडल में कई कमियां हैं, मसलन इसमें इल्क्ट्रो-मैग्नेटिक फोर्स, स्ट्रांग व वीक न्यूक्लियर फोर्स के लिए तो जगह है मगर विशाल खगोलीय संरचनाओं का कर्ता-धर्ता गुरुत्वाकर्षण-बल शामिल नहीं है. लेकिन सूक्ष्म स्तर के जितने भी प्रयोग और अवलोकन हैं, उन सबको स्टैंडर्ड मॉडल के जरिए समझाया जा सकता है. इस मॉडल में गुरुत्वाकर्षण-बल का शामिल न होना पिछले दो-तीन दशकों से वैज्ञानिकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है क्योंकि यह थ्योरी ऑफ एवरीथिंग की खोज में सबसे बड़ी अड़चन है.  थ्योरी ऑफ एवरीथिंग मतलब एक ऐसा सिद्धान्त जिससे सम्पूर्ण ब्रह्मांड की व्याख्या की जा सकती है, सूक्ष्म और स्थूल (विराट) दोनों ही स्तर पर.

फर्मीलैब के प्रमुख भौतिक विज्ञानी डॉ. क्रिस पॉली के नेतृत्व में सात देशों के दो सौ वैज्ञानिकों ने प्रयोगों में पाया है कि स्टैंडर्ड मॉडल म्यूऑन के मामले में खरा नहीं उतरता और उसमें सुधार की गुंजाइश है. प्रयोगकर्ता वैज्ञानिकों के मुताबिक इस एक्सपरिमेंट से इस बात का प्रमाण मिला है कि म्यूऑन किसी ऐसी चीज के प्रति संवेदनशील है, जिसकी व्याख्या स्टैंडर्ड मॉडल से करना नामुमकिन है. जैसा कि ऊपर हम बता चुके हैं कि म्यूऑन लेप्टोन समूह से है. ये होते तो हूबहू इलेक्ट्रॉन की तरह ही हैं लेकिन इनका भार इलेक्ट्रॉन से 207 गुना ज्यादा होता है. इसलिए म्यूऑन को कभी-कभार फैट-इलेक्ट्रॉन भी कहा जाता है. इसकी खोज सन् 1936 में कार्ल डी. एंडरसन और सेठ एंडरमेयर ने की थी.

म्यूऑन्स सहित सभी सबएटोमिक पार्टिकल्स की ‘स्पिन’ नामक एक विशेषता होती है. स्पिन की वजह से ये छोटे चुंबक की तरह व्यवहार करते हैं, जिसे ‘मैग्नेटिक मोमेंट’ कहा जाता है. हरेक पार्टिकल के मैग्नेटिक मोमेंट को एक इक्वेशन के जरिए निकाला जा सकता है. इस इक्वेशन में एक फैक्टर होता है : g. सन् 1928 में पॉल डिराक ने म्यूऑन के g फैक्टर का मान 2 निकाला था. तब से लेकर अभी तक वैज्ञानिक g का मान 2 ही मानते आ रहे हैं और यह सैद्धान्तिक तौर पर सही भी है मगर फर्मीलैब में हुए हालिया प्रयोगों के नतीजे g का मान 2 से ज्यादा होने का संकेत दे रहे हैं. बेहद सेंसिटिव उपकरणों से मापने पर g का मान 2.00233184122 निकला है. इसलिए इस प्रयोग को g-2 के नाम से जाना जा रहा है.

ब्रुकहेवन नैशनल लैबोरेटरी में 2001 में किए गए शुरुवाती प्रयोगों में भी ऐसे ही नतीजे मिले थे, लेकिन उस समय फंडिंग, स्टाफ, उपकरणों वगैरह की कमी से पर्याप्त अनुसंधान नहीं किया जा सका था. फर्मीलैब में हुए हालिया एक्सपेरिमेंट्स का डेटा इतना सटीक है कि इन परिणामों के गलत होने की संभावना 40,000 में से सिर्फ एक है. डॉ. क्रिस पॉली के मुताबिक ‘वर्तमान में ज्ञात डेटा मात्र 6 प्रतिशत है और पूरा डेटा आने में अभी कई साल लगेंगे, और ज्यादा डेटा आने से परिणामों को और भी सटीकता से पुष्टि की जा सकेगी.’

बहरहाल, इस नए प्रयोग की बदौलत पार्टिकल फिजिक्स की दुनिया में किसी बहुत बड़े बदलाव की सनसनी फैली हुई है और इसे नई फिजिक्स की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है, जो ब्रह्मांड से जुड़ी हमारी मौजूदा समझ में बड़ी तब्दीली ला सकता है.

  • सागर राणा

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

मोदी का ‘गुजरात मॉडल’ : दहशत और मौत का खौफनाक मंजर

Next Post

महान गणितज्ञ लियोनार्ड ऑयलर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

महान गणितज्ञ लियोनार्ड ऑयलर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मेरे बच्चे मुग़ालते में जी रहे हैं

December 6, 2022

रेड कॉरिडोर में लाल क्रांति का सपना (पार्ट 2)

October 19, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.