Wednesday, June 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

लखनऊ विधान भवन और लोक भवन के सामने क्यों आत्मदाह करने आते हैं लोग ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 26, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
रविश कुमार, अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकार

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट है कि लखनऊ के 25 अगस्त को एक युवक ने मिट्टी का तेल डालकर खुद को जलाने का प्रयास किया, पुलिस ने बचा लिया. युवक का कहना है कि उसे सवा करोड़ के गबन के झूठे आरोप लगा कर जेल भिजवा दिया गया. यह युवक अपने सरकारी नौकरी करने वाले रिश्तेदार के साथ ठेके का काम करता है. इस कहानी से आपको तंत्र के भीतर की सड़न और वास्तविकता दिख जाती है. इस युवक ने व्हाट्स एप किया है कि सुसाइड ही रास्ता बचा है.

अमर उजाला की ख़बर है कि 29 जुलाई को 65 साल के एक बुज़ुर्ग ने विधानभवन के सामने आत्मदाह का प्रयास किया है. धर्मराज नाम के ये बुज़ुर्ग किसी विवाद में शासन से मदद न मिलने पर हताश हो चुके थे. पुलिस ने इन्हें बचा लिया और चाय भी पिलाई. विधान भवन के सामने अक्तूबर 2021 में और फरवरी 2021 में अलग-अलग मामलों से संबंधित दो महिलाओं ने खुद को जलाने के प्रयास किए.

You might also like

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

अमर उजाला में एक ख़बर छपी है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने एक पीड़िता और उसके गवाह साथी ने ख़ुद को जला लिया. दोनों अब मर चुके हैं. इनका आरोप है कि बसपा सांसद अतुल राय ने कथित तौर पर पीड़िता के साथ बलात्कार किया था. सांसद जेल में है लेकिन दोनों ने आग लगाने से पहले पुलिस अधिकारिकों पर जांच न करने के आरोप लगाए. फेसबुक लाइव किया. मैंने ऐसे मामलों को सर्च करना शुरू किया.

पत्रिका भास्कर में संयुक्त पुलिस आयुक्त नवीन अरोड़ा का बयान छपा मिला. 6 फरवरी 2021 का है. नवीन अरोड़ा ने बताया है कि ‘7 जुलाई 2019 से लेकर फरवरी 2021 के बीच लखनऊ के विधान भवन के सामने 363 लोगों ने आत्म दाह के प्रयास किए हैं’ इनमें से 251 ऐसे थे जो एलान कर आए थे कि आत्मदाह करने जा रहे हैं. कई लोगों को बचा लिया जाता है.

आत्मदाह की आशंका के कारण विधानभवन का मार्ग रात 11 बजे से सुबह के 6 बजे तक के लिए बंद कर दिया जाता है. इस खबर की रिपोर्टिंग में भी कई झोल है. एक ही पुलिस अधिकारी के बयान को अलग-अलग अख़बारों ने अलग-अलग तरीक़े से छापा है. क्या वाक़ई हर दिन आत्मदाह होता है ?

इनमें से कुछ लोग बेशक राजनीतिक कारण से आते होंगे लेकिन इतनी बड़ी संख्या बता रही है कि पुलिस और अन्य विभागों की पेशेवर व्यवस्था ख़त्म हो चुकी है. लोगों को फर्ज़ी मामलों में फंसाया भी जाता है और असली मामलों में जांच नहीं होती है. जला लेना सामान्य घटना नहीं है. यह तो केवल लखनऊ का आंकड़ा है. पूरे उत्तर प्रदेश का या पूरे भारत का निकालेंगे तो ऐसी घटनाओं की संख्या और इनमें समानता से सन्न रह जाएंगे.

हिन्दू मुस्लिम के कारण आपने सही ग़लत देखना बंद कर दिया है. न जाने कितने मुसलमान युवकों को फर्ज़ी किस्से बनाकर बीस-बीस साल आतंक के आरोप में जेल में बंद कर दिया गया. होना तो यह चाहिए कि जो आतंक में शामिल है तो वही जेल में हो लेकिन जिसे कुछ अता पता नहीं है, उसे आतंकवादी बताकर जेल में डाल दिया जाता है.

कई बार आप अपने राजनीतिक कारणों से ऐसी घटनाओं का समर्थन करते हैं या चुप रहते हैं. किसी को एससी / एसटी उत्पीड़न में फंसाया जाता है तो उसका भी सवाल यहीं से है कि सिस्टम काम ही यही करता है – झूठे मामलों में फंसाने का और वसूली करने का. कोई चैन से नहीं है. लखनऊ से संबंधित जिन दो चार घटनाओं का ज़िक्र किया है, उसमें से एक भी मुसलमान नहीं हैं. हिन्दू हैं. कोई दलित है, कोई सवर्ण है, कोई पिछड़ा है.

इसका क्या मतलब हुआ ? मतलब यह हुआ कि हमारा सिस्टम जिसे चाहे, जब चाहे, जैसे चाहे लोगों के साथ कुछ भी कर सकता है, परिवारों को बर्बाद कर देता है. उनकी पूंजी हड़प लेता है इसलिए सिस्टम के भीतर पारदर्शिता और पेशेवर तरीके से काम करने की जवाबदेही होनी चाहिए. किसी की सरकार हो, किसी जाति या धर्म की सरकार हो, जब तक हम सबके लिए ईमानदार सिस्टम की मांग नहीं करेंगे, यह नहीं थमने वाला है. समाज में सुख-चैन नहीं रहेगा.

इस लेख के उदाहरण यूपी के हैं लेकिन ऐसे उदाहरण राजस्थान से लेकर पंजाब और कहीं के भी दिए जा सकते हैं. आख़िर पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों को यह छूट कब तक दी जाएगी कि वे संविधान की शपथ लेकर नागरिकों से ही वसूलेंगे ? उनका ही जीवन बर्बाद कर देंगे.

हमेशा आपका सवाल यह होना चाहिए कि सिस्टम ने झूठे मामले में क्यों फंसाया ? क्यों नहीं असली मामले में सही व्यक्ति को पकड़ा ? वरना लोग विधान सभा और सुप्रीम कोर्ट के सामने जाकर खुद को आग लगाते रहेंगे.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

ये शब्द क्या कर रहे हैं ?

Next Post

उर्दू को बदरंग करता हिन्दी मीडिया और शायरी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
Next Post

उर्दू को बदरंग करता हिन्दी मीडिया और शायरी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

माई नेम इज़ सेल्मा : यह सिर्फ़ उस यहूदी महिला की कहानी भर नहीं है…

September 26, 2023

राजनीति की दुःखद कॉमेडी

February 27, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

June 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

June 16, 2026

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.