Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

ये शब्द क्या कर रहे हैं ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 27, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ये शब्द क्या कर रहे हैं ?

Kanak Tiwariकनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़

21वीं सदी के दूसरे दशक से कुछ शब्द दसों दिशाओं के द्वारपाल बने मूंछें ऐंठने लगे हैं. ये शब्द बारी-बारी से ‘राम नाम सत्य है’ की तर्ज पर ‘विकास नाम सत्य है’ का नारा लगाते रहते हैं. विकास के दादा का विरोध करने की कोई हिमाकत नहीं कर सकता. विकास झोपडि़यां तोड़कर एंटीलिया की गुलाम झोपडि़यां बनाने, पगडंडियां नेस्तनाबूद कर प्रधानमंत्री की रहायशी ऐशगाह बनाने, नागर संस्कृति की कस्बाई को रफू कर सीमेंट कांक्रीट के ‘स्मार्ट सिटी’ उगाने, जनसुलभ मोटर और रेलगाडि़यां उखाड़कर ‘बुलेट ट्रेन’ का ठप्पा चिपकाने और जनसुलभ अखबारों को ‘गोदी मीडिया’ नया नाम देकर नेताओं की ड्योढ़ी पर नाक रगड़ने का मौसम उगा चुका है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ कहते प्रधानमंत्री की ‘श्मशान, कब्रिस्तान’ जुगलबंदी के कारण ‘बीफ’ नामक शब्द हिंसक रोमांचकारी हो गया है. गोदान करता हिन्दुत्वमुग्ध हिंदू गोमाता की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार कर स्वर्ग पहुंचने का दिवास्वप्न देखता है. गोमांस के बड़े निर्यातक लेकिन मुसलमान नहीं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के हिन्दू भाजपाई हैं. मुसलमान या ईसाई गोमांस छुएं तो मरना पड़ेगा. मीडिया ने ‘गोगुंडे’ शब्द का आविष्कार भी कर लिया. श्वेत क्रांति का जनक लेकिन कोई हिन्दुत्व का लाल नहीं है.

प्रधानमंत्री ने गोमांस व्यापार को गुलाबी क्रांति अर्थात ‘पिंक रेव्यूलेशन’ कहकर कटाक्ष भले किया. बेचारा भगवा रंग रोमांटिकता को भूलकर ‘बीफ’ बेच रहा है. ‘लिव इन रिलेशनशिप’ और ‘मी टू’ के बीच राष्ट्रवादी संस्कृति झूला झूल रही है. जो खुद ब्याह करने के लायक नहीं रहे उनके द्वारा स्थापित मजनू ब्रिगेड भी है. ‘देशद्रोही’ शब्द तूफान मचा रहा है. हर सच्चा भारतीय देशद्रोही हो रहा है, भले ही यह शब्द गैरकानूनी और गैरसंवैधानिक है. ‘फतवा’ देने वाले ‘भक्त’ बन जाते हैं, गोडसे ‘भगवान’ हो गए हैं. ‘माफी वीर’ ‘भारत रत्न’ हो सकते हैं.

सेनाध्यक्ष रहे वी. के. सिंह ने वेश्यावृत्ति अर्थात ‘प्रोस्टीट्यूट् से तरन्नुम बिठाते ‘प्रेस्टीट्यूट’ अर्थात बौद्धिक वेश्यावृत्ति कहकर अपनी पीठ ठोंकते जन्मतिथि का झूठा हलफनामा दिया ? ज्यादा मारक हिन्दी अनुवाद मीडिया ने ‘खबरंडी’ कर दिया. नफासत और अभिजात्य की बलात्कारी पुरुष वहशी आदतें ‘वेश्या’ और ‘रंडी’ शब्दों में भेद करती रहती हैं.

क्या वेश्या शब्द में सामन्ती नफासत और सांस्कृतिक अभिजात्य लगता होगा ! ‘रंडी’ गरीबनुमा फूहड़ अभिव्यक्ति है. अत्याचारी पुरुष समाज स्त्री के प्रति इससे ज्यादा घिनौना संबोधन कर भी नहीं सकता. गांधी ने सोच समझकर कहा ही था कि अंगरेजी नस्ल की पार्लियामेन्ट तो वेश्या है. प्रधानमंत्री के इशारे पर नाचती है. आज क्या हो रहा है ? रिंग मास्टर के इशारे पर शेर भी नाचते ही तो रहते हैं.

बेचारे प्रधानमंत्री के लिए इतने विशेषण रच लिए गए हैं कि व्याकरण रोने लगा है. प्रधानमंत्री ने विकलांगों के लिए शब्द ‘दिव्यांग‘ ढूंढ़ा. वह सरकारी हुक्म के कारण लोकचलन में आता भी गया. अब दिव्यांग कोटा खत्म कर देने से क्या उन्हें लूला, लंगड़, अंधा, बहरा, पागल लोग फिर कहेंगे ? नौजवान लड़के लड़कियां प्रेम विवाह करें तो उन्हें ‘खाप‘ प्रमाणपत्र जिंदा रहने के लिए छाती से लगाना होता है. खाप जल्लाद दहेज लुटेरे बहू की हत्या को भी ‘आनर किलिंग‘ या इज्जतदार हत्या कहते हैं.

अमित शाह ने तो प्रधानमंत्री के वायदे के लिए ‘जुमला’ नामक जान बचाऊ शब्द गढ़ा है. दोनों नेता पहले 2002 में गुजरात में मुसलमानों को जन्नत भेजने वाली तदबीरें गढ़ ही रहे थे. अब अंगरेजी शब्दों ‘सी.ए.ए., सी.बी.आई., एन.आई.ए., ई.डी., आई.टी. से इश्क करने लगे हैं.

अहमदाबाद मुंबई के बीच सबसे तेज अमीर ‘बुलेट ट्रेन’ की मृगतृष्णा चल रही है. अहमदाबाद याने कर्णावती से गौतम अडानी और मुंबई से मुकेश अंबानी हरी झंडी दिखाकर ट्रेन कब रवाना करेंगे ? वे दोनों देश को डुबाने लाल झंडी दिखा ही रहे हैं. अमीरी में जय और वीरू की इतिहास की सबसे ‘झकास’ जोड़ी है. बढि़या शब्द झकास के एक के पास ‘एंटीलिया’, दूसरे के पास ‘मुंदरा’ है. देने वाले के पास ‘सेन्ट्रल विस्टा’ है.

अंगरेजी का ‘विस्टा’ हिन्दी के ‘विष्ठा’ से मिलता जुलता है. ‘भाभी’ नामक शब्द रामायण की सीता ने पवित्र किया. बाॅलीवुड में निरुपा राय ने इसे अमर बना दिया. भाभी की रक्षा करने में लक्ष्मण तो असफल रहे. भाभी शब्द को नीता अंबानी ने अमरता प्रदान की. उन्हें जेड प्लस सुरक्षा प्रदान करके देवर ने रामायण के इतिहास को धराशायी कर दिया. ‘पचास करोड़ की गर्ल फ्रैंड’ और ‘बार बाला’ शब्द भी ईजाद किए. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में उनके प्रोफेसर बनने से ‘प्रोफेसर’ शब्द धन्य हो गया. वरना ‘प्रोफेसर’ तो भीमाकोरेगांव प्रकरण के अभियुक्त ही समझे जाते हैं.

‘पीएमओ’ शब्द भारत के दिल की नई धड़कन है. गृहमंत्री तक सचिव और चपरासी भी ‘पीएमओ’ से पूछे बिना नियुक्त नहीं कर सकते. प्रशासन धृतराष्ट्र होता है, सत्ता ‘दुर्योधन’ के हाथ ही रहती है. ‘पीएमओ’ को अपनी संजय की भूमिका पर लगातार फख्र है. रिमोट बटन दबने से सभी विभाग कठपुतलियों की तरह पीएमओ नट की उंगलियों की तरफ देखते नाचना शुरू करते हैं.

‘भाइयों, भैनों, मित्रों’ कहते ‘मन की बात’ वाले प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में गुजराती लटके झटके में बंग नायिका को ‘दीदी ओ दीदी’ क्या कह दिया, दूकान ही उलट गई. जवाब में ‘खेला’ नामक शब्द ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का रक्तचाप ठिकाने लगा दिया. अब उनका भरोसा ‘हाई कोर्ट’ नामक शब्द पर भले हो क्योंकि ‘सुप्रीम कोर्ट’ नाम का शब्द साथ नहीं दे रहा है. ‘गवर्नर’ जगदीप धंकड़ भी फुस्स फटाका की तरह हो गए लगते हैं.

इधर ‘कोविड’ और ‘वैक्सीन’ घर-घर तक पहुंचाने में सरकार की छीछालेदर हो ही रही थी. ससुरा ‘पेगासस’ इजराइल से आ गया ! इस बीमारी का तो मलहम ही नहीं मिल रहा, ऊपर से ‘तालिबान‘ शब्द सांप छछूंदर बनाकर उगलत निगलत के बीच सरकार को फंसा गया है. फिर भी तुर्रा यह कि ‘माॅब लिंचिंग’ नामक अंगरेजी शब्द ‘जयश्रीराम’ से अपनी बिरादरी में शामिल करने की मिन्नतें करते उन्हें ‘मानववध’ को करने को पवित्र बता रहा है.

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

स्वरा भास्कर : ज़रूरी आवाज़ को एक पल में नकारना सही नहीं

Next Post

लखनऊ विधान भवन और लोक भवन के सामने क्यों आत्मदाह करने आते हैं लोग ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

लखनऊ विधान भवन और लोक भवन के सामने क्यों आत्मदाह करने आते हैं लोग ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जो यहूदी कौम ख़ुद दशकों तक सताई गई, वह इतनी कठोर और हिंसक कैसे हो गई ?

March 17, 2026

कांग्रेस को हटा कर भाजपा को सत्ता क्यों सौंपी थी ?

December 22, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.