Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

गोदी मीडिया, शशिकांत दास और अरुंधति भट्टाचार्य

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 9, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शशिकांत दास जी से प्रभावित, प्रफ्फुलित और संतुष्ट होते हुये मोदीजी ने उनका कार्यकाल अगले 3 वर्षों के लिये और बढ़ा दिया है. वैसे तो शशिकांत दास जी देश के 25वें गवर्नर हैं लेकिन मेरी ख्याल से इतिहास की डिग्री लेकर रिज़र्व बैंक के गवर्नर बनने वाले शायद पहले व्यक्ति हो सकते हैं.

नोटबन्दी में भी इनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है, जिसका परिणाम आपके समक्ष है. अर्थव्यवस्था/जीडीपी/महंगाई की बात ही क्या करूं क्योंकि आप उसे तथ्यात्मक नजरिये से देखने या समझने की बजाय आलोचनात्मक दृष्टि से देखेंगे. लेकिन इतना समझ लीजिए कि आखिर बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों को दरकिनार कर इनको तबज्जो क्यों मिली ?

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

एक छोटा-सा आंकड़ा बता रहा हूं बाक़ी जवाब खुद ढूंढें. सन 1947 से 2014 तक भारत पर 52 लाख करोड़ का कर्ज़ था. 7 सालों में यानि 2014 से 2021 तक अब यह कर्ज़ 116 लाख करोड़ हो गया है. 7 सालों में 64 लाख करोड़ का कर्ज़, क्या आपको अचंभित नहीं करता ? क्या कोई बड़ा प्रोजेक्ट, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोजगार हब स्थापित हुआ ?

आपको हैरानी होगी कि 2014 में कोई 24 करोड़ गरीब थे, जो राशन लेते थे, आज 80 करोड़ को राशन दिया जा रहा है. इस हिसाब से 2029 तक ‘150 करोड़’ को राशन देना पड़ेगा. भुखमरी के मामले में भारत 2015 में 55वें स्थान पर था पिछले 6 सालों में 101 पर पहुंच गया. यानी पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल से भी हार गये लेकिन हमें बुरा सिर्फ क्रिकेट में हारने से लगता है ?

वैसे बुरा नहीं लगेगा किसी को क्योंकि हमारे देश का अर्थशात्र ही ऐसा है. फिर इतिहास, भूगोल, विज्ञान, राजनीति इन सब पर क्या ही कहना ! काबिल और जानकारों को पदों पर टिकने ही नहीं दिया जाता है, डिपार्टमेंट चाहे कोई भी हो. समझौते वाले या फिर अपने वाले दो किस्म के लोग ही पदासीन, सत्तासीन रह सकते हैं. जिस देश में मुद्दे, आंकड़े, तर्क और तथ्य महत्वपूर्ण नहीं होंगे उसके भविष्य का केवल अनुमान ही लगाया जा सकता हैं.

2

पूरी हिंदी मीडिया से यह खबर गायब है एसबीआई की पूर्व चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य अब मुकेश अंबानी के रिलायंस इंडस्ट्रीज में 5 साल के लिए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हो गयी है.

आपको याद नही होगा इसलिए आपको याद दिलाने का यह उचित समय है कि स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य के कार्यकाल मे ही रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के साथ जियो पेमेंट्स बैंक एसबीआई के साथ ज्‍वाइंट वेंचर में एक्टिव पार्टनर बन गया था.

जियो पेमेंट बैंक में एसबीआई की सिर्फ 30 फीसदी हिस्सेदारी दी गयी जबकि 70 फीसदी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज को दे दी गयी थी. गजब की बात तो यह है कि जियो पेमेंट बैंक लिमिटेड को नोटबंदी के ठीक दो दिन बाद ही 10 नवंबर, 2016 को आधिकारिक तौर पर निगमित किया गया था.

इस समय मार्केट में मिल रहे तगड़े कॉम्पिटिशन के बावजूद एसबीआई का पेमेंट स्पेस में 30% मार्केट शेयर है. एक तरह से थाली में सजाकर एसबीआई के कस्टमर को जिओ को परोस दिया गया था, यह कमाल अरुंधति भट्टाचार्य जी ने ही किया था.

अरुंधति द्वारा जियो पेमेंट बैंक को एसबीआई के बड़े नेटवर्क का फायदा जो दिलवाया गया उस अहसान को आज मुकेश अम्बानी ने चुका दिया है. यह बिल्कुल इस हाथ ले और उस हाथ दे वाला मामला है.

कुछ समय पहले सिर्फ कागजों में बन रहे जिओ इंस्टिट्यूट को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिया था. उसके पीछे की असली वजह यह थी कि जिन्होंने ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ की नीति बनाई थी, वह विनय शील ओबरॉय जी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में मार्च, 2016 में एचआरडी सेक्रटरी थे और वही रिटायरमेंट के तुरंत बाद रिलायंस में एजुकेशन के क्षेत्र में एडवाइजर के पद पर जॉइन हो गए थे ओर उन्होंने ही पूरा प्रजेंटेशन तैयार करवाया था.

इतना खुले आम भ्रष्टाचार हो रहा है लेकिन मजाल है कि गोदी में बैठा हुआ मीडिया इसके खिलाफ तो छोड़िए, इस बात को ढंग से रिपोर्ट कर देना तक जरूरी नही समझ रहा है.

  • आर. पी. विशाल, अजय कुमार सिंह

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें] 

Previous Post

नरेन्दर मोदी प्रधानमंत्री न होते तो भारत बहुत से अनुभवों से वंचित रह जाता

Next Post

इलाहाबाद शहर के वास्तविक संस्थापक थे बादशाह अकबर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

इलाहाबाद शहर के वास्तविक संस्थापक थे बादशाह अकबर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पुलिसिया उत्पीड़न से त्रस्त आम जन

April 21, 2018

कोरोना की दूसरी लहर – दावे और हक़ीक़त

June 9, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.