Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

न दरवाजा, न दुकानदार, ग्राहक खुद रख देते हैं सामान के पैसे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 4, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

न दरवाजा, न दुकानदार, ग्राहक खुद रख देते हैं सामान के पैसे

 

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

आज के जमाने में जब लोग अपनों पर भी खुलकर भरोसा नहीं कर पाते, ऐसे में क्या कोई दुकानदार अनजान ग्राहकों पर विश्वास कर सकता है ? लेकिन आज हम आपको गुजरात की एक ऐसी दुकान की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जो साल के 12 महीने और दिन के 24 घंटे खुली रहती है. इस दुकान में दरवाजा भी नहीं है. दुकान के मालिक हाजिर हो या न हो दुकान ग्राहकों के लिए कभी बंद नहीं होता है. इतना ही नहीं, दुकान में सामान लेने आए ग्राहक से, दुकानदार पैसे भी नहीं मांगता, ग्राहक खुद ही अपनी जरूरत का सामान लेकर, पैसे रखकर चले जाते हैं.

सुनने में अजीब लगा रहा है न ! लेकिन यकीन मानिए ऐसी एक दुकान गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के केवड़ी गांव में मौजूद है. पिछले 30 सालों से चल रही यह दुकान कभी भी बंद नहीं हुई है. गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के केवड़ी गांव की आबादी मूलतः आदिवासी हैं.

इस दुकान के मालिक सईदभाई ने बड़े ही दिलचस्प तरीके से बताया कि जब वह 18 साल के थे, तब उन्होंने इस दुकान को शुरू किया था.शुरू से ही यह दुकान विश्वास के बल पर चल रही है और आगे भी ऐसे ही चलती रहेगी. सबसे खास बात यह है कि सईदभाई की दुकान दिन-रात खुली रहती है, यहां से लोग जो चाहें ले सकते हैं. साथ ही, पैसे भी वे अपनी इच्छा से देते हैं.

पहले तो गांव के लोगों को यह बड़ा अजीब लगा. सभी सोच में पड़ गए कि यह किस तरह की दुकान है और कई लोगों के मन में अलग-अलग प्रकार का संदेह भी था लेकिन फिर सईदभाई ने घर-घर जाकर, लोगों को अपनी बात समझाना शुरू कर दिया. वह लोगों को कहते कि आपको किसी चीज की जरूरत है, तो मेरी दुकान हमेशा खुली रहती है और आप जो चाहे ले जा सकते हैं. समय के साथ धीरे-धीरे लोग दुकान पर विश्वास करने लगे.

सईदभाई कहते हैं, ‘किसी भी बिजनेस का एक ही नियम है -विश्वास. और अगर मैंने आज तक कुछ भी गलत नहीं किया है, तो मेरे साथ भी कभी गलत नहीं होगा. मैं इस जीवन में, मात्र ईश्वर से डरता हूं. इंसानों से कैसा डर ! इसी सोच के साथ, मैंने इस दुकान को इस तरीके से चलाना शुरू किया.’ उनके विचार भी काफी अनोखे हैं. उनका मानना है कि जिन लोगों के लिए वह काम कर रहे हैं, उनसे डरना नहीं चाहिए.

बिना दरवाजे की दुकान हो और कभी चोरी न हुई हो, यह बात थोड़ी अटपटी लगती है. इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं,  ‘चार साल पहले, पहली बार मेरे दुकान में चोरी हुई थी लेकिन चोर पैसे के बजाय, बैटरी चुराकर ले गया. तब दुकान पर पुलिस भी आई थी, लेकिन मैंने कोई शिकायत नहीं की. मुझे ख़ुशी थी कि चोर ने पैसे नहीं चुराए. शायद उसे बैटरी की जरूरत होगी, इसलिए वह सिर्फ बैटरी ले गया.’

सईदभाई के पिता एक व्यवसायी थे. गांववाले उन्हें उभा सेठ के नाम से जानते थे. आज इसी उपनाम का इस्तेमाल सईदभाई के लिए किया जाता है. उनकी दुकान को ‘उभा सेठ की दुकान’ ही कहा जाता है.

उनकी दुकान में कोल्डड्रिंक, दूध से लेकर किराना का सारा सामान रहता है. इसके अलावा, वह पानी की टंकी, दरवाजे, टाइल, कटलरी, हार्डवेयर आदि चीजें भी रखते हैं. ये सभी चीज़ें, लोगों के लिए दिन के 24 घंटे उपलब्ध हैं. गांववाले अपनी ज़रुरत के मुताबिक, आकर सामान लेकर पैसे रख देते हैं.

आगे अपने परिवार के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, ’27 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई थी लेकिन मैं केवड़ी में अपने परिवार के साथ कभी नहीं रहा. मैंने करीब 13 साल तक गोधरा से अपडाउन करके दुकान चलाई. वहीं पिछले 17 साल से, मैं वडोदरा में रह रहा हूं. कुछ समय मैं केवड़ी गांव में अकेला ही रहता था.’ उनके दो बेटे हैं, जिनमें से एक पायलट है और दूसरा अभी पढ़ाई कर रहा है.

छोटा उदयपुर के आदिवासी क्षेत्र में बसे सईदभाई की आस्था भले ही दूसरों के लिए अविश्वसनीय है, लेकिन उनके लिए यही उनके जीवन का सिद्धांत है, जिसके भरोसे वह अपना बिज़नेस 30 सालों से चला रहे हैं. ऐसे व्यक्ति खुद के साथ समाज को भी जीवन जीने का एक नया दृष्टिकोण देते हैं.

  • किशन दवे

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें] 

Previous Post

ईंश निंदा कानून : ‘हम क्या बन गए हैं ?’

Next Post

कानून तो सुधा के पक्ष में है भाई

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

कानून तो सुधा के पक्ष में है भाई

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

द फ्लॉड कॉन्सेप्ट ऑफ लव जिहाद…

March 30, 2024

देश में भाजपा विरोधी एक ही पार्टी है

February 12, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.