Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आज भी दलित उद्धार की सबसे बड़ी आवाज़ उच्च वर्ण के लोगों की है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 23, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
आज भी दलित उद्धार की सबसे बड़ी आवाज़ उच्च वर्ण के लोगों की है
मेधा पाटकर – हिमांशु कुमार
Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

मनुवादी सरकार ने दलित शोधकर्ताओं को विदेश में जा कर भारतीय समाज, इतिहास और राजनीति पर शोध करने के लिए वज़ीफ़ा नहीं देने का फ़ैसला किया है. राजद सांसद मनोज झा ने इस फ़ैसले का पुरज़ोर विरोध किया है. हैरत की बात ये है कि संसद में बैठे सैकड़ों दलित नेतागण इस मामले पर ख़ामोश हैं.

भारत के तथाकथित दलित चिंतक, साहित्यकार, ब्लॉगर, जो दिन रात ब्राह्मण को गाली दे कर विकृत आनंद पाते हैं, उनकी तरफ़ से भी कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है. इस फ़ैसले को आए हुए दो दिन हो चुके हैं.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

सच तो ये है कि भारत में दलित उद्धार के लिए सबसे बड़ी आवाज़ उच्च वर्ण के लोगों ने ही आज तक उठाई है. एकाध सावित्री बाई फूले और बाबा साहेब भी रहे हैं, लेकिन दलितों के अधिकारों को ज़मीन पर उतारने की लड़ाई में सैकड़ों अ-दलित रहे हैं.

इस क्रम में मुझे सी. राजगोपालाचारी विशेष रूप से याद आते हैं. तत्कालीन मद्रास नगरपालिका अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने दलित बच्चों को जेनरल स्कूल में दाख़िला दिया. जब सवर्णों ने उन्हें उन स्कूलों से अपने बच्चों को निकालने की धमकी दी तो चक्रवर्ती जी का जवाब था कि ‘ब्राह्मण अगर अपने बच्चों को अशिक्षित रखना चाहते हैं तो वे बेशक रखें, दलित बच्चों को पढ़ा कर आगे बढ़ाने की ज़रूरत है.’

दूसरी घटना मद्रास स्टेशन से संबंधित है. मद्रास के गवर्नर रहते हुए उन्होंने देखा कि मद्रास स्टेशन पर यात्रियों को पानी पिलाने वाले सारे ब्राह्मण थे क्योंकि दूसरी जाति के लोगों के हाथों लोग पानी नहीं पीना चाहते थे. चक्रवर्ती ने नियम बदल दिया. दलितों को भी पानी पिलाने का ज़िम्मा दिया गया. इस फ़ैसले का भारी विरोध हुआ. चक्रवर्ती पीछे नहीं हटे. उनका कहना था कि ‘जो जाति देख कर पानी पीते हैं, वे प्यासे मरने को स्वतंत्र हैं.’ मजबूरन सबको मानना पड़ा.

आज जो तथाकथित दलित चिंतक स्टालिन के दलितों को मंदिर के पुजारी बनाने पर लहालोट हो रहे हैं, उन बेवक़ूफ़ों को नहीं मालूम कि ऐसा कर के स्टालिन सिर्फ़ ब्राह्मणवाद को ही बढ़ावा दे रहे हैं. पुजारी बन कर जाति में उठना कोई सामाजिक क्रांति नहीं है, वरन एक प्रतिक्रांति है. ये ठीक वैसा ही है जैसे कि आप खुद शोषक बन कर अपने साथ हुए शोषण का बदला ले रहे हैं. यह मूर्खता की चरम सीमा है.

अक्सर ये तथाकथित दलित चिंतक वामपंथी दलों की आलोचना इस बात पर करते हैं कि इनका नेतृत्व भी ऊंची जातियों के हाथों में है, इसलिए वे मूलतः दलित विरोधी हैं. दीपांकर भट्टाचार्य ब्राह्मण होने के वावजूद जीवन भर दलितों की लड़ाई लड़ रहे हैं और मायावती छाप दलित अपने लोगों को धोखा देते हुए राजनीतिक हाशिये पर जा चुकी है.

दरअसल, आख़िरी सच दलितों और सवर्णों की लड़ाई नहीं है, यद्यपि भारत में जाति प्रथा एक कोढ़ है. असल लड़ाई शोषक और शोषित लोगों के बीच है. असल मुद्दों से भटकाने के लिए राज्य वित्त संपोषित तथाकथित दलित चिंतक कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं, जो किसी दलित की बेटी की हत्या और रेप पर न यूपी जाते हैं और न ही बस्तर. वे सोशल मीडिया पर और सेमिनारों में ब्राह्मणों को गाली दे कर दलितों के हितैषी बन जाते हैं.

बस्तर जाने के लिए हिमांशु कुमार और मेघा पाटकर हैं ही और यूपी के लिए प्रियंका गांधी हैं ही, जो ब्राह्मण समाज से आते हैं.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

वो डरते हैं कामरेड !

Next Post

हत्या और बलात्कार बीजेपी सरकार की निगाह में जघन्य अपराध नहीं हैं ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

हत्या और बलात्कार बीजेपी सरकार की निगाह में जघन्य अपराध नहीं हैं ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कामरेडस जोसेफ (दर्शन पाल) एवं संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) भाकपा (माओवादी) से बर्खास्त

September 19, 2024

दुसरे इंसानों को खराब नीचा और गलत बता कर आप अच्छे ऊंचे और सही नहीं माने जायेंगे

December 29, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.