Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कामरेडस जोसेफ (दर्शन पाल) एवं संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) भाकपा (माओवादी) से बर्खास्त

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 19, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कामरेडस जोसेफ (दर्शन पाल) एवं संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) भाकपा (माओवादी) से बर्खास्त
कामरेडस जोसेफ (दर्शन पाल) एवं संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) भाकपा (माओवादी) से बर्खास्त

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने पंजाब और बिहार के अपने कामरेडसद्वय जोसेफ (दर्शन पाल) एवं संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) को उनकी पार्टी विरोधी, गुटबाजीपूर्ण गतिविधियों के चलते पार्टी सदस्यता रद्द करते हुए, सभी जिम्मेवारियों से हटाते हुए पार्टी से बर्खास्त करने की भाकपा (माओवादी) की घोषणा की है. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की केन्द्रीय कमिटी के प्रवक्ता अभय की ओर से इसकी घोषणा 3 जनवरी, 2024 को किया है.

इस घोषणा के बाबत जब बिहार के कामरेड संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) से इसकी जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि ‘यह एक कांस्पिरेसी है. दर्शन पाल और मैं 2012 से ही जनदिशा की सोच के साथ अलग काम कर रहे हैं.’ ज्ञात हो ही भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से बर्खास्त दोनों कामरेड लंबे समय से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के तहत कार्यरत थे और पंजाब के जोसफ (दर्शन पाल) संयुक्त किसान मोर्चा के अहम भूमिका में थे.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अपने विज्ञप्ति में बताते हैं कि कामरेड जोसेफ पूर्ववर्ति भाकपा (माले) (पार्टी यूनिटी) में 80 के दशक में शामिल हुए थे और पंजाब की राज्य कमेटी सदस्य रहे. जबकि कामरेड संजीत भी 80 के दशक में ही भाकपा (माले) (पार्टी यूनिटी) में शामिल हुए और बिहार राज्य कमेटी सदस्य भी बने. बाद की प्रक्रिया में भाकपा (माओवादी) बनी और ये दोनों कामरेड उसमें शामिल हुए और केन्द्रीय कमेटी के मार्गदर्शन में जिम्मेवारियां लेकर काम करते आए हैं.

प्रेस विज्ञप्ति
प्रेस विज्ञप्ति : पेज – 1
प्रेस विज्ञप्ति : पेज – 2

विज्ञप्ति में बर्खास्त करने के कारण के बारे में बताते हुए आगे कहा गया है कि दोनों का पार्टी की बुनियादी लाइन से मतांतर था, जो बाद में ढुलमुलपन में तब्दील हुआ. वे पार्टी की इलाकावार सत्ता दखल करने, आधार इलाका निर्माण करने की दीर्घकालीन जनयुद्ध की लाइन पर भिन्न मत रखते थे. उनमें कानूनी और खुले जनसंगठन तक सीमित रहकर और कानूनवाद में डूबकर काम करने का गलत रुझान था. उन्हें पार्टी लाइन से मजबूती से जोड़े रखने के लिए पार्टी की ओर से राजनीतिक अध्ययन कक्षाएं व चर्चाएं आयोजित की गई. लेकिन उनकी समझ और व्यवहार में कोई खास बदलाव दिखलाई नहीं दिया. दुश्मन के भीषण हमले में एनआरबी के भंग होने की परिस्थिति में उन्होंने सीसी से सम्पर्क रखकर मार्गदर्शन लेने की बजाय पार्टी लाइन से हटकर व्यक्तिगत तौर पर मनमर्जी से काम करते रहे.

2014 में पंजाब में सम्पन्न हुए प्लेनम के बाद जोसेफ को राज्य कमेटी में कॉ-कॉप्ट करने से लेकर अबतक उनके कामकाज में पार्टी की लाइन से हटकर फैसले लेने की प्रवृति हावी होती गई और वे अवसरवादी तरीके से पार्टी को गुटबाजी और विभाजन (स्पलिट) की ओर ले गए. 2016 में कामरेड बलराज के जेल से रिहा होने के बाद उनके साथ कामरेड जोसेफ और कामरेड संजीत अवसरवादी तरीके से सांठगांठ करते हुए पार्टी संविधान और अनुशासन को तोड़ते हुए पार्टी विरोधी गुटबाजीपूर्ण और विघटनकारी गतिविधियों में शामिल होते आए. उन्होंने कामरेड बलराज के नेतृत्व में पार्टी विरोधी समानांतर केन्द्र स्थापित किया.

2021 में संपन्न सीसी की 7वीं बैठक में पारित प्रस्ताव के मुताबिक पार्टी महासचिव की ओर से उत्तर रीजन के राज्यों की सभी पार्टी कतारों को कामरेड बलराज की पार्टी विरोधी गतिविधियों से दूर रहने के लिए आगाह करते हुए पत्र जारी किया गया था, जिसमें उनके दक्षिणपंथी अवसरवाद से लड़ते हुए पार्टी लाइन पर डटे रहने, और उनसे सभी प्रकार के संबंध तोड़ने के लिए निर्देश जारी किया गया था. इसके बावजूद दोनों कामरेड बलराज के नेतृत्व में बनाए गए पार्टी विरोधी समानांतर केन्द्र का हिस्सा बने रहे और विघटनकारी गतिविधियां जारी रखी.

उपरोक्त पृष्ठभूमि में सीसी की 8वीं बैठक के प्रस्ताव के तहत सीसी (केन्द्रीय कमिटी) कामरेड बलराज को पार्टी से बर्खास्त करने के साथ-साथ उनके नेतृत्व में कार्यरत व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त का. जोसेफ और कामरेड संजीत को भी पार्टी से बर्खास्त करती है. इसलिए हमारी केन्द्रीय कमेटी अंतर्राष्ट्रीय व समूचे देश खासतौर पर पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार की क्रांतिकारी कतारों, पार्टी सदस्यों, हमदर्दों, समर्थकों एवं क्रांतिकारी जनता का आह्वान करती है कि वे जोसेफ और संजीत से दूर रहे, सतर्क रहे और उनके दक्षिणपंथी अवसरवादी लाइन से डटकर मुकाबला करते हुए पार्टी लाइन को आत्मसात करते हुए पूरे देश में क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाए.

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के इस विज्ञप्ति और अर्जुन प्रसाद सिंह के जवाब के बाद कई सारे सवाल उठ खड़े हुए हैं –

  1. क्या माओवादी संगठन विभाजन के दौर से गुजर रही है ?
  2. जब ये कामरेडद्वय 2012 से ही अलग कार्य कर रहे थे, तब इतनी देर (12 साल बाद) से सूचना क्यों जारी की गई ?
  3. क्या सीपीआई (माओवादी) के गठन जल्दीबाजी में की गई ?
  4. उत्तरी रीजनल ब्यूरो (एन.आर.बी) के ध्वस्त होने का कारण क्या था ?
  5. क्या आज भी पार्टी दक्षिणपंथी अवसरवाद से जूझ रही है ?
  6. क्या संशोधनवाद के खतरा से पार्टी को सदैव जूझना पड़ेगा ?
  7. मार्च, 2026 तक माओवादियों को भारत से खत्म कर देने की धमकी का मुकाबला पार्टी किस तरह कर पायेगी ?

मुझे लगता है भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को जनता के बीच से उठ रहे इन सवालों का जवाब जरूर देना चाहिए. बहरहाल, देश की जनता इस बात पर गहराई से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के द्वारा प्रशस्त मार्ग को देख रही है. साथ ही वह चिंतित भी है. देखना होगा उत्तर भारत में ध्वस्त माओवादी संगठन और केन्द्रीय भारत में लाखों की तादाद में पुलिसिया गिरोह की मौजूदगी और उसके निरंतर हमलों के बीच से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) किस तरह आगे बढ़ती है.

  • महेश सिंह

Read Also –

पेजर बना बम ! अमित शाह के धमकी को हल्के में न लें माओवादी
भारत की क्रांति के आदर्श नेता व भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य कॉ. अक्किराजू हरगोपाल (साकेत) एवं उनके एकमात्र पुत्र ‘मुन्ना’ की शहादत
दस्तावेज : भारत में सीपीआई (माओवादी) का उद्भव और विकास
भाकपा (माओवादी) के गद्दार कोबाद पर शासक वर्ग का अविश्वास
भाकपा (माओवादी) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए वरिष्ठ नेता कोबाड गांधी को निष्कासित किया
किसी भी सम्मान से बेशकीमती है माओवादी होना
वार्ता का झांसा देकर माओवादियों के खिलाफ हत्या का अभियान चला रही है भाजपा सरकार
किसी भी स्तर की सैन्य कार्रवाई से नहीं खत्म हो सकते माओवादी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

भागी हुई लड़कियां : एक पुरुष फैंटेसी और लघुपरक कविता

Next Post

माओवादियों के खिलाफ भाजपा का नया नौटंकी – ‘केंजा नक्सली-मनवा माटा’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

माओवादियों के खिलाफ भाजपा का नया नौटंकी - 'केंजा नक्सली-मनवा माटा'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कोराना के नाम पर जांच किट में लूटखसोट

April 28, 2020

महामानव पर ‘गर्व’ के दौर में ‘अर्बन नक्सल’

October 16, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.