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Home गेस्ट ब्लॉग

हिंदू राष्ट्र की मूर्खतापूर्ण जिद से गुलाम हो जाओगे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 27, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
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हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार

मैंने आज तक चार बीबी वाला मुसलमान नहीं देखा. 40 बच्चों वाला तो छोड़ो 10 बच्चों वाला मुसलमान भी नहीं देखा. अलबत्ता मेरे खुद के ताऊ जी के 18 बच्चे हुए. दादी के 10 हुए. मेरा एक हिंदू दोस्त चौदह भाई बहन थे. मैं ऐसे बहुत सारे हिंदुओं को जानता हूं जिनके पिता की एक से ज्यादा पत्नियां थी. मेरा एक साथी है जिसकी तीन बीवियां हैं, वह मुसलमान नहीं है. फिर भी हम लगातार बकर-बकर करते रहते हैं कि मुसलमान चार शादियां करते हैं और उनके 40 बच्चे होते हैं.

हमें आंख खोलकर अपने आसपास की सच्चाई से कुछ नहीं सीखना होता. कोई कुछ बता दे उसी को सच मानकर जीवन गुजार देते हैं. वैसे तो हमारे धर्म ने हमें यही सिखाया है कि प्रश्न मत करो, तर्क मत करो, श्रद्धापूर्वक चुपचाप सब स्वीकार कर लो. उसने हमारे दिमागों को कुंद कर दिया है.

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मैंने एक बार कहा कि ‘आजकल मुसलमान ट्रेनों में नॉनवेज खाना ले जाने में डरने लगे हैं कि कोई बीफ का इल्जाम लगाकर उन्हें लिंच ना कर दे.’ इस पर हमारे एक रिश्तेदार बोले तो ‘यह लोग भी तो पाकिस्तान में हिंदुओं को परेशान करते हैं.’ मैंने जवाब दिया – ‘पाकिस्तान में मुसलमान क्या कर रहे हैं, उसके लिए भारत के मुसलमान से बदला लिया जाएगा क्या ?’ वह बोले – ‘हां हैं तो यह सब एक ही.’

मैंने कहा – ‘अगर एक मुसलमान की गलती की सजा दूसरे को दी जा सकती है तो फिर तो यह नियम हिंदू पर भी लागू होना चाहिए. फिर तो हाथरस में अगर हिंदुओं ने बलात्कार किया तो सजा आपको दी जा सकती है.’ बोले – ‘क्यों हमें कैसे दी जा सकती है ? हम अलग हैं, वह अलग हैं.’

मैंने कहा – ‘यह तो कमाल है. आप एक मुसलमान की गलती की सजा दूसरे मुसलमान को देने के लिए तैयार हैं लेकिन एक हिंदू की गलती की सज़ा दूसरे हिंदू को देने के लिए तैयार नहीं हैं ? हिंदू के लिए एक नियम मुसलमानों के लिए दूसरा नियम देश ऐसे कैसे चलेगा ?’ लेकिन वे आखिर तक ना ना में सिर हिलाते रहे मुझ से सहमत नहीं हुए. टीवी और व्हाट्सएप नें दिमागों को बिल्कुल सोचने लायक नहीं छोड़ा है. अब हम सामान्य तर्क इस्तेमाल करने की हालत में भी नहीं बचे हैं.

सत्ताधारी दल को ऐसी ही बेवकूफ जनता चाहिए, जो ना तर्क इस्तेमाल कर सके ना सवाल उठा सके, इससे उसकी सत्ता को कभी खतरा नहीं पैदा होता. मैं इस बात से डरता हूं कि अगर देश की जनता आपस में धर्म के आधार पर एक दूसरे से इतनी नफरत करेगी और सामान्य तर्क का भी इस्तेमाल नहीं करेगी तो आखिर यह देश कैसे बचेगा ?

कंवल भारती ने ठीक ही लिखा है – भाई जब हिंदू राष्ट्र था तब तो तुम गुलाम हो गए थे,
बाद में भगत सिंह जैसे नास्तिक और आजादी की लड़ाई में करोड़ों मुसलमानों के सहयोग से गुलामी गई और आज़ादी आई. अब तुम फिर से हिंदू राष्ट्र की मूर्खतापूर्ण जिद पकड़ कर बैठे हो. अगर हिंदू राष्ट्र बना तो तुम फिर से गुलाम हो जाओगे क्योंकि हिंदू धर्म का आधार ही जाति व्यवस्था है.

अगर सहमत नहीं हो तो चलो एक ऐसा हिंदू बताओ जिसकी कोई जाति ना हो ? जातिवाद ही हिंदुत्व है. जातिवाद के कारण ही दलितों को युद्ध से अलग कर दिया था. एक खास जाति को युद्ध लड़ने के लिए निश्चित किया था. एक जाति कैसे लड़ कर कैसे जीत पायेगी ?

भारत में अलग-अलग जाति के राजा थे. सब एक दूसरे से लड़ते रहते थे, एक दूसरे को लूटते थे. धन दौलत पशु स्त्रियां सब कुछ लूटा जाता था. वैसा ही पुराना हिंदू राष्ट्र बनाना है क्या ? जहां सब कुछ जाति के आधार पर चलेगा या फिर संविधान के मुताबिक जाती पाती मुक्त सभी धर्मों की बराबरी पर आधारित स्त्री पुरुष समानता पर आधारित लोकतांत्रिक देश बनाना है ? क्या बोलते हो मित्रों ?

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