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Home गेस्ट ब्लॉग

बर्बादी का धुआं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 20, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
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Servamitra Surjanसर्वमित्रा सुरजन

कांवड़ यात्रा शुरु होते ही सोशल मीडिया पर एक तस्वीर बहुत वायरल हुई, जिसे देखकर हर संवेदनशील नागरिक और खासकर अभिभावकों का दिल दहल जाना चाहिए. भगवान शिव की तस्वीर छपी भगवा वेशभूषा में कुछ बच्चे एक जगह बैठे हैं, जिनकी उम्र बमुश्किल 10-12 बरस की लग रही है, हो सकता है कुछ बच्चे उससे भी छोटे हों. ये बच्चे चिलम फूंक रहे हैं, धुआं उड़ा रहे हैं और एक-दूसरे को चिलम भी दे रहे हैं. एक बच्चा बीच में पानी पीता है, शायद उससे चिलम का धुआं बर्दाश्त नहीं हो रहा.

इन बच्चों की जो उम्र है, वो पौष्टिक भोजन लेने की है, लेकिन उसकी जगह ये धुआं अपने फेफड़ों में भर रहे हैं.क्षकांवड़ यात्रा जैसे कपड़े पहने हैं, तो मुमकिन है ये कुछ लोगों के साथ नन्हे कांवड़िए बन गए हों और अल्पायु में ही पुण्य कमाने के नजरिए से इनके बड़ों ने इन्हें ये सब करने की छूट दी हो. हमारे देश में तो बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है.

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भगवानों के बाल रूप की पूजा में उन्हें मक्खन, मिश्री, दूध, मेवे जैसी पौष्टिक चीजों का भोग लगाया जाता है, फिर इन बच्चों को किस तरह चिलम फूंकने दिया जा रहा है, ये विचारणीय है. जिस किसी ने ये वीडियो बनाया, उसकी उम्र क्या होगी, ये भी पता नहीं लेकिन अगर वो कोई वयस्क है, तो फिर उसकी सोच पर हैरानी होती है कि आखिर किस तरह वो अपने सामने बच्चों को यूं बर्बाद होते देख रहा है !

देश के बहुत से धार्मिक लोग इस वक्त सावन माह में शिवभक्ति में डूबे हुए होंगे. इनमें से कई सुविधासंपन्न लोग हर सोमवार मंदिरों में कई लीटर दूध से अभिषेक भी करते होंगे. इनके घरों के बच्चे अच्छी और महंगी स्कूलों में पढ़ने जाते होंगे. क्या वीडियो में दिख रहे बच्चे भी महंगे स्कूलों में पढ़ने जाते होंगे ? ये बच्चे स्कूल की जगह कांवड़ यात्रा में क्यों दिख रहे हैं ? इन सवालों पर समाज के संपन्न और धार्मिक प्रवृत्ति के लोगों को अवश्य विचार करना चाहिए.

इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि हमारे देश में शिक्षकों को किस काम में अपना कीमती वक्त देना चाहिए ? अब तक शिक्षकों को चुनाव और जनगणना के कामों में तो लगते देखा है, लेकिन उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी के गोला गोकरननाथ में बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक और अध्यापिकाओं की ड्यूटी लगाई गई है.

गोला कस्बे में सावन के हर सोमवार को कांवड़ियों की हजारों की संख्या में भीड़ इकठ्ठा होती है और इस वजह से हर साल 3 किमी के दायरे में आने वाले स्कूल बंद रखे जाते हैं. अब शिक्षकों को सोमवार को पढ़ाने की जगह कांवड़ियों की सेवा में लगने का आदेश आया. जब इस पर विवाद हुआ तो सफाई पेश की गई कि ये स्वैच्छिक सेवा है, आदेश नहीं.

उत्तरप्रदेश में इससे पहले भी कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसाने जैसे काम हो चुके हैं. इस बार कांवड़ ड्यूटी में लगे शिक्षकों की खबर सामने आई. मुमकिन है देश के अन्य बहुत से सरकारी विद्यालयों में इसी तरह का हाल हो, वहां से भी ऐसी ही खबरें सामने आएं. इन खबरों पर कुछेक देर की चर्चा होती है, किसी स्थायी समाधान पर पहुंचने की फिक्र व्यापक तौर पर दिखाई नहीं देती. यही कारण है कि देश में शिक्षा अधोगति को प्राप्त हो रही है.

महंगे निजी स्कूल हों या सरकारी स्कूल, आए दिन छात्रों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार या उत्पीड़न की खबर आती है. ऐसा ही एक मामला अभी तमिलनाडु से सामने आया है, जिसके बाद से वहां बवाल मचा हुआ है. यहां के कल्लाकुरिचि जिले के एक स्कूल में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने कथित तौर पर तीसरी मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली.

पुलिस को जो खुदकुशी का खत मिला है, उसमें लड़की ने स्कूल के दो शिक्षकों पर उसे और कुुछ छात्रों को हर समय पढ़ने के लिए मजबूर करके प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. साथ ही लिखा है कि लड़की को इन शिक्षकों ने डांटा भी था और दूसरे शिक्षकों को भी घटना के बारे में पता था. पुलिस ने बताया कि दोनों शिक्षकों से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्होंने सभी बच्चों को कड़ी मेहनत करने के लिए कहा था, क्योंकि सभी पढ़ाई के प्रति लापरवाह होते जा रहे थे.

पढ़ाई के लिए शिक्षक अगर जोर डालें तो इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं है लेकिन पढ़ने के लिए प्रताड़ित करना या अपमानित करना, चिंतनीय है. वैसे लड़की के परिजनों का आरोप है कि जिस स्थान पर वह मृत पाई गई थी, उसके पास एक दीवार पर खून से लथपथ हथेली का निशान था जो कि हाथापाई या संघर्ष की ओर इशारा करता है. इस घटना के बाद स्कूल के कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया लेकिन इस घटना ने ऐसा तूल पकड़ा कि बात हिंसक विरोध-प्रदर्शन तक जा पहुंची.

नाराज भीड़ ने स्कूल के भीतर तोड़फोड़ की, कई बसों को आग के हवाले कर दिया. इस बीच लड़की का पोस्टमार्टम हुआ और अदालत के आदेश पर दोबारा पोस्टमार्टम किया गया. लड़की की मौत का सच, सही रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा और उसके बाद ही दोषियों को पकड़ा जाएगा लेकिन शिक्षा व्यवस्था का सच एक बार फिर समाज के सामने उजागर हुआ है, जिससे मुंह मोड़ना ठीक नहीं होगा.

शिक्षा क्षेत्र की एक अन्य आपत्तिजनक घटना केरल से सामने आई, जहां नीट परीक्षा देने गई लड़की के साथ अपमानजनक व्यवहार करते हुए उसके अंत:वस्त्र उतरवा कर परीक्षा केंद्र में भीतर जाने दिया गया. इस मामले में अब आईपीसी की धारा 354 और 509 के तहत मामला दर्ज किया गया है लेकिन अपने साथ हुए इस व्यवहार के बाद लड़की ने किस मानसिक स्थिति में परीक्षा दी होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है.

यह विचारणीय है कि नकल रोकने के नाम पर हम किस तरह अपनी ही भावी पीढ़ी को अपराधियों की तरह देखते हैं और वैसा ही व्यवहार उनसे करते हैं. उत्तर से लेकर दक्षिण तक शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी ऐसी खबरों पर जब तक गंभीर विमर्श नहीं होगा, हमारी नयी पीढ़ी के जीवन में बर्बादी का धुआं भरता रहेगा.

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