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ईरान का IRGC : ताक़त, जुनून, शहादत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 21, 2026
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ईरान का IRGC : ताक़त, जुनून, शहादत
ईरान का IRGC : ताक़त, जुनून, शहादत

रात में ईरान ने समझदारी दिखाई और अरब देशों पर हमला नहीं किया, उसके हमले की जद में इज़राइल ही रहा और उसके तमाम पेट्रोलियम संयंत्र और वित्तीय ढांचे रात भर धू धू करके जलते रहे. ईरान ने इस युद्ध में इज़राइल और अमेरिका को लेकर बने बहुत से नरेटिव को ध्वस्त कर दिया.

  1. अमेरिका को कोई हरा नहीं सकता, अमेरिका के पास USS अब्राहम लिंकन बहुत ख़तरनाक एयरक्राफ्ट कैरियर है, ईरान ने ध्वस्त करके वापस भेज दिया.
  2. अमेरिका का सबसे उन्नत जेराल्ड आर. फोर्ड क्लास सबसे ख़तरनाक, ईरान ने उसे जला डाला. अब वह डूब जाए तो आश्चर्य नहीं.
  3. अमेरिका का सबसे एडवांस F-35 कोई छू भी नहीं सकता, ईरान ने कल उसे भी क्षतिग्रस्त कर दिया. जल्दी ही B1B और B2B बंबर भी ध्वस्त होंगे.
  4. इज़राइल की सुरक्षा अभेद्य है, उसपर कोई हमला नहीं कर सकता, उसका आयरन डोम उसे सुरक्षित रखता है, वह जिसे चाहे तबाह कर सकता है. 56 मुस्लिम देशों के बीच में अकेला सीना तान कर खड़ा है. ईरान ने उसे इतना मारा इतना मारा कि खंडहर हो गया, उसका प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने जीवित होने का सबूत देता फिर रहा है…और वह ज़िन्दगी भर अपने ज़िंदा होने का सबूत देता रहेगा. कल नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. झुके कंधे, बुझी आवाज़, वह भी डीपफेक सिद्ध हो रही है.

दरअसल 1979 के इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान ने आज के दिन के लिए ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी और 1979 के इस्लामिक रिवोल्यूशन के मूल भूत सिद्धांतों के आधार पर एक समानांतर सैन्य संस्थान बनाया ‘IRGC’ अर्थात इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कोप, जिनका उद्देश्य उन इस्लामिक रिवोल्यूशन के सिद्धांतों की रक्षा करना है.

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यह ईरान सेना के अतिरिक्त दूसरी फौज है जिसमें 5.0 लाख बेहद ख़तरनाक सोल्जर हैं, इसके अतिरिक्त 25 लाख दूसरी पंक्ति के सोल्जर हैं जो अमेरिका और इज़राइल के ज़मीन पर उतरने का इंतजार कर रहे हैं. बेहद ख़तरनाक और शहादत देने के‌ लिए तैयार फौज.

1979 के बाद ईरान ने अपनी भौगोलिक स्थिति का उपयोग किया और अपने ऊंचे ऊंचे पहाड़ों के नीचे शहर बसाए, पहाड़ों को अपना सुरक्षा कवच बनाया और उसके अंदर भी तहखाने बनवाए.

ईरान के 31 शहरों को सब जानते हैं मगर पहाड़ों के नीचे बसी दुनिया को कोई नहीं जानता. यहीं से ईरान ने आज के लिए तैयारी शुरू की… आज 47 साल में वह एक अकेला इज़राइल और अमेरिका को हरा चुका है…इसे कहते है जुनून.

ईरान ने इस्राइल पर मिसाइल हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है, जिसे अब तक की सबसे तेज़ और लगातार बमबारी वाली रातों में से एक माना जा रहा है…इस दौरान इस्राइल के
लगभग सभी प्रमुख शहरों में सायरन बजने लगे हैं और लोगों को सुरक्षित बंकरों या शेल्टर्स में जाने के आदेश जारी किए गए हैं. लाखों लोग अपनी रातें बंकरों में बिताने को मजबूर हैं, क्योंकि बार-बार मिसाइल हमले की चेतावनी मिल रही है…

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने क्लस्टर मिसाइल भी लॉन्च कर रहा है, जो इस्राइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर तेल अवीव, रामत गान, हाइफ़ा, जेरूसलम और उत्तरी क्षेत्रों में गिरे हैं.

इन हमलों से इमारतों को नुकसान, कुछ मौतें और घायल होने की घटनाएं दर्ज हुई हैं, हालांकि इस्राइल ने अधिकांश मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा कर रहा है…

यह हमले ईरान की ओर से ‘बदला’ के तौर पर देखे जा रहे हैं, जो हाल के हफ्तों में इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के सीनियर नेताओं और सैन्य ठिकानों और एनर्जी फैसिलिटी पर किए गए हमलों के जवाब में हो रहे हैं. स्थिति तेज़ी से बदल रही है…

सऊदी अरब के पत्रकार सईद अल-अनज़ी ने खाड़ी में तेल ठिकानों पर ईरान के हमले (जोकि तेहरान में गैस ठिकानों पर इज़राइल-अमेरिका गठबंधन के हमले के जवाब में था) के बाद कहा – ‘अमेरिका, अरब देशों की ज़मीन से ईरान के तेल को निशाना बनाता है, और ईरान जवाब में खाड़ी के तेल ठिकानों पर हमला करता है. इस क्षेत्र को बचाने और हमारी संपत्तियों को युद्ध की आग से सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता यह है कि खाड़ी देशों से अमेरिकी सेनाओं को बाहर निकाला जाए.’

  • अब्दुल

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