Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

हिमांशु कुमार के बाद अब मेधा पाटेकर संघियों के निशाने पर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 17, 2022
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

गांधी की हत्या करने और नेहरू को ‘बदनाम’ करने के बाद आरएसएस अपने मुखौटा संगठन भाजपा के माध्यम से देश की सत्ता पर कब्जा करने के बाद अब एक-एक कर उन तमाम लोगों व चेहरों को भारयीय राजसत्ता का इस्तेमाल करते हुए जेल में डालने की कबायद कर रही है, जो जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जिसे भाजपा अपने लिए खतरा मानता है. शातिर आतंकवादी संगठन आरएसएस दमन के कुचक्र चलाने के लिए एक शुद्र नरेन्द्र मोदी का इस्तेमाल कर रहा है.

यह जानना सचमुच आश्चर्यजनक है कि शुद्रों, औरतों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों को ब्राह्मणवादी गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए ब्राह्मणों के बीच से योद्धा बाहर निकल रहे हैं. उसी योद्धाओं की हत्या करने, उन्हें जेलों में बंद कर मौत के घाट उतारने और शुद्रों, औरतों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों को ब्राह्मणवादी गुलामी की बेड़ियों में जकड़ने का संकल्प एक शुद्र नरेन्द्र दामोदर दास मोदी कर रहा है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

इस शुद्र नरेन्द्र मोदी के ‘जान पर खतरा’ बता कर शुद्रों के विजय स्तम्भ भीमा कोरेगांव को आधार बनाकर दर्जनों लेखकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों को जेलों में डालने और उनकी हत्या तक कर देने का षडयंत्र रचने के बाद अब देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को शुद्र नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने के नाम पर जेल में डाल दिया. तो वहीं आदिवासियों के हितों के लिए लड़ने वाले प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक हिमांशु कुमार को जेल में डालने की कोशिश की गई है. झूठ का पर्दाफाश करने के जुर्म में जुबेर पहले से ही अनेक फर्जी मुकदमें लिए जेल में बंद है.

बातें यही तक नहीं रुकने वाली है. अब तो इस आतंकवादी संगठन ने मेधा पाटेकर जैसी विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता को ’13 करोड़ रुपये के गबन’ के नाम पर बदनाम करने और जेल में डालने की तैयारी की जा रही है. पत्रकार कृष्ण कांत लिखते हैं –

हिमांशु कुमार के बाद अब मेधा पाटेकर संघियों के निशाने पर
मेधा पाटेकर

यह मेधा पाटेकर हैं. अपने ऑफिस में अपने बिस्तर पर बैठी दाल-रोटी खा रही हैं. यह कमरा उनके सोने का भी कमरा है, उनके पढ़ने का भी और उनका ऑफिस भी. उनका बिस्तर है- जमीन पर एक चटाई, एक तकिया, एक चादर, बाकी कमरा कागजात और किताबों से भरा.

5 साल पहले मैं उनके ऑफिस गया था. कोई 5 या 6 दिन यहां रहा था. उनके दफ्तर का खाना उतना ही साधारण होता है जैसे किसी आदिवासी के घर का खाना. उबली हुई पतली दाल बिना छौंक वाली और बड़ी-बड़ी मोटी चपाती.

यह तस्वीर उनके बड़वानी स्थित ऑफिस की है. मेधा जी एक सूती धोती, गले में एक डोरी से लटका चश्मा और हवाई चप्पल पहने आदिवासी इलाकों से लेकर दिल्ली तक खाक छानती रहती हैं.

जब मैं इनके पास गया था, उस वक्त सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों का मुद्दा जोर पकड़ा हुआ था क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांध का उद्घाटन कर दिया था और विस्थापितों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला था.

हर दिन इस दफ्तर में दर्जनों या सैकड़ों लोग आते थे. ये वो लोग थे जिनकी जमीन-खेत या घर-बार सब कुछ बांध क्षेत्र में चला गया था और उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला था. मेधा पाटेकर का काम था हर दिन अलग-अलग दफ्तरों में इन लोगों की याचिकाओं को पहुंचाना और उनके लिए उचित मुआवजा मांगना.

किसी समाज का पतन कैसे होता है यह देखने के लिए मेधा पाटेकर का उदाहरण सबसे मुफीद है. देश की सबसे गरीब और लाचार जनता की पूरे जीवन सेवा करने के बाद वे चुनाव लड़ीं तो जनता ने उनका साथ नहीं दिया. अब बाकी समाजसेवियों की तरह उन्हें भी प्रताड़ित किया जा रहा है.

मेधा जी और उनके एनजीओ पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 13 करोड़ का गबन किया है, इसे लेकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है. मेधा पाटेकर ने अपनी पूरी जिंदगी पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने में लगा दी. सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए मेधा पाटेकर एकमात्र आवाज रही. उन्होंने सैकड़ों आदिवासियों, गरीबों और और कमजोर लोगों को उचित मुआवजा भी दिलवाया लेकिन आज उन्हें भ्रष्ट बताकर उन्हें जेल में डालने की कवायद चल रही है.

तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात के पीड़ितों की आवाज़ उठाने के लिए जेल में हैं. सुप्रीम कोर्ट में आदिवासियों के नरसंहार की जांच की मांग करने वाले हिमांशु कुमार पर कल कोर्ट ने 5 लाख का जुर्माना लगा दिया है. फेक न्यूज का भंडाफोड़ करने वाले जुबेर जेल में हैं.

अपनी युवावस्था में हमारे लिए जितने लोग समाज के आदर्श थे, आज वे सब अपराधी हैं और समाज में जहर घोलने वाले निष्कंटक राज कर रहे हैं. जो जितना बड़ा जहरीला, उसको उतना बड़ा पद.

यह न्यू इंडिया का अमृतकाल है. इसे समाजसेवी और बुद्धिजीवी नहीं चाहिए, इसे दंगाई, लुटेरे और डकैत चाहिए. आपको अमृतकाल की बधाई !

फर्जी मुकदमे बनाने में माहिर आरएसएस – भाजपा भारतीय राजसत्ता और दलाल कोर्ट का इस्तेमाल करते हुए यह बिल्कुल संभव है कि मेधा पाटेकर को जेल में बंद कर दें. इसके आगे और भी न जाने कितने लोग इस राजसत्ता निशाने पर लिए जायेंगे, अभी कहना मुश्किल है. भाजपा के इस खुल्लमखुल्ला आतंकवादी गतिविधियों की जिम्मेदार इस देश की जनता खुद है, जो प्रलोभनों में फंसकर गुंडों को देश की सत्ता सौंप देती है. कार्टूनिस्ट हेमन्त मालवीय लिखते हैं –

आज मेघा पाटेकर इलेक्शन में खड़ी हो जाय तो 1500 वोट भी नहीं देगी इनको वही विस्थापित समाज, जिनके लिए वह ताउम्र लड़ती रही है.

हम दोगले है सारे. जिन लोगों ने इस देश की जनता के लिए जीवन होम कर दिया, आज इस देश के लोग मेघा पाटेकर पर लगे 13 करोड के गबन के आरोपों को सच मानेंगे. अदालत इन्हें दोषी करार देगी, इनके खिलाफ फैसला देने वाले जज रिटायर होकर राज्यसभा जाएंगे.

जनता के धन पर ऐश का जीवन जीते, अपने मित्रों के नाम देश की हर सम्पत्ति करते मोदी जनता की नजर में ईमानदार है, 13 करोड़ की कार में घूमते, 8450 करोड़ के पुष्पक में उड़ते मोदी जनता के लिए फकीर है, गरीब है, आदर्श है और ये मेघा पाटेकर जिसकी लड़ाई से लोगों को करोड़ों का मुआवजा मिला, शर्मिला इरोम जैसे लोग बेईमान हैं ? वामी हैं  ? अर्बन नक्सली है ? गद्धार है ? देश के विकास का विरोधी है ?

जनता जो आज कुछ भोग रही है और आगे भोगेगी इसी काबिल हैं क्योंकि ऐसे ईमानदार सच्चे लोग सदा ही समाज मे प्रताड़ित होते हैं, इनकी खिल्ली उड़ाई जाती है, हमेशा ही असमाजिक तत्व कहे जाते हैं, जो इस समाज के दबे कुचले लोगों की लड़ाई लड़ते हैं, जनता इनको कुचल कर आगे बढ़ कर क्रूर, भ्रष्ट, अय्याश राजा के गले में ही सम्मान के हार डालती है, दौर चाहे ईसा का हो या आज का !

यह अनायास नहीं है कि एक के बाद एक आरएसएस के निशाने पर हैं. आरएसएस उन तमाम ताकतों, विचारों को खत्म करने पर आमदा है जो शुद्रों, महिलाओं, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, शोषितों, पीड़ितों तथा प्रगतिशील ताकतों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ये तमाम ताकत जिस जनसमुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं उसको शांत रखने के लिए शुद्र नरेन्द्र मोदी को सामने रखा है और महिलाओं-आदिवासियों को शांत रखने के लिए पहले रामनाथ कोविंद और अब द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति के तौर पर सामने रखा है.

देश की धर्मान्ध अशिक्षित जनता आरएसएस के इस कुटिलता को न समझ सके इसलिए उसने देश के तमाम प्रगतिशील ताकतों को खत्म करने का बीड़ा उठाया है. इसमें फादर स्टेन स्वामी की जेल हिरासत में तड़पा-तड़पा कर की गई हत्या और 90 फीसदी विकलांग जी. एन. सांई बाबा को मौय के मूंह तक ले जाने की कबायद शामिल है.

देश की जनता को अपने उन तमाम शुभचिंतकों की सुरक्षा के साथ साथ खुद की सुरक्षा के लिए उठ खड़े होना होगा. और यह तभी संभव है जब वह भारत की कम्युनिस्ट पार्टी – माओवादी के नेतृत्व में हथियार बंद होकर अपने ऊपर हो रहे हमलों का प्रतिकार करे, इस आरएसएस केन्द्रित प्रतिक्रियावादी गिरोह समेत तमाम दुष्टों का खात्मा कर देश की रक्षा कर सके. इसके सिवा आम जनता को खुद को बचाने का और कोई तरीका नहीं है. जिन्दा हो तो जिन्दा होने का सबूत तो देना ही होगा !

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

मोदी के सुप्रीम कुत्तों का न्याय : हिमांशु कुमार जेल जायेंगे, हत्यारा मौज मनायेगा

Next Post

हिमांशु कुमार पर जुर्माना लगाकर आदिवासियों पर पुलिसिया क्रूरता का समर्थक बन गया है सुप्रीम कोर्ट

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

हिमांशु कुमार पर जुर्माना लगाकर आदिवासियों पर पुलिसिया क्रूरता का समर्थक बन गया है सुप्रीम कोर्ट

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सैनिक

February 7, 2024

विदेशों से आयात होता प्याज

December 5, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.