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हिमांशु कुमार के बाद अब मेधा पाटेकर संघियों के निशाने पर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 17, 2022
in ब्लॉग
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गांधी की हत्या करने और नेहरू को ‘बदनाम’ करने के बाद आरएसएस अपने मुखौटा संगठन भाजपा के माध्यम से देश की सत्ता पर कब्जा करने के बाद अब एक-एक कर उन तमाम लोगों व चेहरों को भारयीय राजसत्ता का इस्तेमाल करते हुए जेल में डालने की कबायद कर रही है, जो जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जिसे भाजपा अपने लिए खतरा मानता है. शातिर आतंकवादी संगठन आरएसएस दमन के कुचक्र चलाने के लिए एक शुद्र नरेन्द्र मोदी का इस्तेमाल कर रहा है.

यह जानना सचमुच आश्चर्यजनक है कि शुद्रों, औरतों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों को ब्राह्मणवादी गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए ब्राह्मणों के बीच से योद्धा बाहर निकल रहे हैं. उसी योद्धाओं की हत्या करने, उन्हें जेलों में बंद कर मौत के घाट उतारने और शुद्रों, औरतों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों को ब्राह्मणवादी गुलामी की बेड़ियों में जकड़ने का संकल्प एक शुद्र नरेन्द्र दामोदर दास मोदी कर रहा है.

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इस शुद्र नरेन्द्र मोदी के ‘जान पर खतरा’ बता कर शुद्रों के विजय स्तम्भ भीमा कोरेगांव को आधार बनाकर दर्जनों लेखकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों को जेलों में डालने और उनकी हत्या तक कर देने का षडयंत्र रचने के बाद अब देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को शुद्र नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने के नाम पर जेल में डाल दिया. तो वहीं आदिवासियों के हितों के लिए लड़ने वाले प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक हिमांशु कुमार को जेल में डालने की कोशिश की गई है. झूठ का पर्दाफाश करने के जुर्म में जुबेर पहले से ही अनेक फर्जी मुकदमें लिए जेल में बंद है.

बातें यही तक नहीं रुकने वाली है. अब तो इस आतंकवादी संगठन ने मेधा पाटेकर जैसी विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता को ’13 करोड़ रुपये के गबन’ के नाम पर बदनाम करने और जेल में डालने की तैयारी की जा रही है. पत्रकार कृष्ण कांत लिखते हैं –

हिमांशु कुमार के बाद अब मेधा पाटेकर संघियों के निशाने पर
मेधा पाटेकर

यह मेधा पाटेकर हैं. अपने ऑफिस में अपने बिस्तर पर बैठी दाल-रोटी खा रही हैं. यह कमरा उनके सोने का भी कमरा है, उनके पढ़ने का भी और उनका ऑफिस भी. उनका बिस्तर है- जमीन पर एक चटाई, एक तकिया, एक चादर, बाकी कमरा कागजात और किताबों से भरा.

5 साल पहले मैं उनके ऑफिस गया था. कोई 5 या 6 दिन यहां रहा था. उनके दफ्तर का खाना उतना ही साधारण होता है जैसे किसी आदिवासी के घर का खाना. उबली हुई पतली दाल बिना छौंक वाली और बड़ी-बड़ी मोटी चपाती.

यह तस्वीर उनके बड़वानी स्थित ऑफिस की है. मेधा जी एक सूती धोती, गले में एक डोरी से लटका चश्मा और हवाई चप्पल पहने आदिवासी इलाकों से लेकर दिल्ली तक खाक छानती रहती हैं.

जब मैं इनके पास गया था, उस वक्त सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों का मुद्दा जोर पकड़ा हुआ था क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांध का उद्घाटन कर दिया था और विस्थापितों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला था.

हर दिन इस दफ्तर में दर्जनों या सैकड़ों लोग आते थे. ये वो लोग थे जिनकी जमीन-खेत या घर-बार सब कुछ बांध क्षेत्र में चला गया था और उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला था. मेधा पाटेकर का काम था हर दिन अलग-अलग दफ्तरों में इन लोगों की याचिकाओं को पहुंचाना और उनके लिए उचित मुआवजा मांगना.

किसी समाज का पतन कैसे होता है यह देखने के लिए मेधा पाटेकर का उदाहरण सबसे मुफीद है. देश की सबसे गरीब और लाचार जनता की पूरे जीवन सेवा करने के बाद वे चुनाव लड़ीं तो जनता ने उनका साथ नहीं दिया. अब बाकी समाजसेवियों की तरह उन्हें भी प्रताड़ित किया जा रहा है.

मेधा जी और उनके एनजीओ पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 13 करोड़ का गबन किया है, इसे लेकर उनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है. मेधा पाटेकर ने अपनी पूरी जिंदगी पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने में लगा दी. सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए मेधा पाटेकर एकमात्र आवाज रही. उन्होंने सैकड़ों आदिवासियों, गरीबों और और कमजोर लोगों को उचित मुआवजा भी दिलवाया लेकिन आज उन्हें भ्रष्ट बताकर उन्हें जेल में डालने की कवायद चल रही है.

तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात के पीड़ितों की आवाज़ उठाने के लिए जेल में हैं. सुप्रीम कोर्ट में आदिवासियों के नरसंहार की जांच की मांग करने वाले हिमांशु कुमार पर कल कोर्ट ने 5 लाख का जुर्माना लगा दिया है. फेक न्यूज का भंडाफोड़ करने वाले जुबेर जेल में हैं.

अपनी युवावस्था में हमारे लिए जितने लोग समाज के आदर्श थे, आज वे सब अपराधी हैं और समाज में जहर घोलने वाले निष्कंटक राज कर रहे हैं. जो जितना बड़ा जहरीला, उसको उतना बड़ा पद.

यह न्यू इंडिया का अमृतकाल है. इसे समाजसेवी और बुद्धिजीवी नहीं चाहिए, इसे दंगाई, लुटेरे और डकैत चाहिए. आपको अमृतकाल की बधाई !

फर्जी मुकदमे बनाने में माहिर आरएसएस – भाजपा भारतीय राजसत्ता और दलाल कोर्ट का इस्तेमाल करते हुए यह बिल्कुल संभव है कि मेधा पाटेकर को जेल में बंद कर दें. इसके आगे और भी न जाने कितने लोग इस राजसत्ता निशाने पर लिए जायेंगे, अभी कहना मुश्किल है. भाजपा के इस खुल्लमखुल्ला आतंकवादी गतिविधियों की जिम्मेदार इस देश की जनता खुद है, जो प्रलोभनों में फंसकर गुंडों को देश की सत्ता सौंप देती है. कार्टूनिस्ट हेमन्त मालवीय लिखते हैं –

आज मेघा पाटेकर इलेक्शन में खड़ी हो जाय तो 1500 वोट भी नहीं देगी इनको वही विस्थापित समाज, जिनके लिए वह ताउम्र लड़ती रही है.

हम दोगले है सारे. जिन लोगों ने इस देश की जनता के लिए जीवन होम कर दिया, आज इस देश के लोग मेघा पाटेकर पर लगे 13 करोड के गबन के आरोपों को सच मानेंगे. अदालत इन्हें दोषी करार देगी, इनके खिलाफ फैसला देने वाले जज रिटायर होकर राज्यसभा जाएंगे.

जनता के धन पर ऐश का जीवन जीते, अपने मित्रों के नाम देश की हर सम्पत्ति करते मोदी जनता की नजर में ईमानदार है, 13 करोड़ की कार में घूमते, 8450 करोड़ के पुष्पक में उड़ते मोदी जनता के लिए फकीर है, गरीब है, आदर्श है और ये मेघा पाटेकर जिसकी लड़ाई से लोगों को करोड़ों का मुआवजा मिला, शर्मिला इरोम जैसे लोग बेईमान हैं ? वामी हैं  ? अर्बन नक्सली है ? गद्धार है ? देश के विकास का विरोधी है ?

जनता जो आज कुछ भोग रही है और आगे भोगेगी इसी काबिल हैं क्योंकि ऐसे ईमानदार सच्चे लोग सदा ही समाज मे प्रताड़ित होते हैं, इनकी खिल्ली उड़ाई जाती है, हमेशा ही असमाजिक तत्व कहे जाते हैं, जो इस समाज के दबे कुचले लोगों की लड़ाई लड़ते हैं, जनता इनको कुचल कर आगे बढ़ कर क्रूर, भ्रष्ट, अय्याश राजा के गले में ही सम्मान के हार डालती है, दौर चाहे ईसा का हो या आज का !

यह अनायास नहीं है कि एक के बाद एक आरएसएस के निशाने पर हैं. आरएसएस उन तमाम ताकतों, विचारों को खत्म करने पर आमदा है जो शुद्रों, महिलाओं, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, शोषितों, पीड़ितों तथा प्रगतिशील ताकतों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ये तमाम ताकत जिस जनसमुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं उसको शांत रखने के लिए शुद्र नरेन्द्र मोदी को सामने रखा है और महिलाओं-आदिवासियों को शांत रखने के लिए पहले रामनाथ कोविंद और अब द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति के तौर पर सामने रखा है.

देश की धर्मान्ध अशिक्षित जनता आरएसएस के इस कुटिलता को न समझ सके इसलिए उसने देश के तमाम प्रगतिशील ताकतों को खत्म करने का बीड़ा उठाया है. इसमें फादर स्टेन स्वामी की जेल हिरासत में तड़पा-तड़पा कर की गई हत्या और 90 फीसदी विकलांग जी. एन. सांई बाबा को मौय के मूंह तक ले जाने की कबायद शामिल है.

देश की जनता को अपने उन तमाम शुभचिंतकों की सुरक्षा के साथ साथ खुद की सुरक्षा के लिए उठ खड़े होना होगा. और यह तभी संभव है जब वह भारत की कम्युनिस्ट पार्टी – माओवादी के नेतृत्व में हथियार बंद होकर अपने ऊपर हो रहे हमलों का प्रतिकार करे, इस आरएसएस केन्द्रित प्रतिक्रियावादी गिरोह समेत तमाम दुष्टों का खात्मा कर देश की रक्षा कर सके. इसके सिवा आम जनता को खुद को बचाने का और कोई तरीका नहीं है. जिन्दा हो तो जिन्दा होने का सबूत तो देना ही होगा !

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