Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

चोर अपने भ्रष्टाचार का ऑडिट नहीं करवाते

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 29, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
चोर अपने भ्रष्टाचार का ऑडिट नहीं करवाते
चोर अपने भ्रष्टाचार का ऑडिट नहीं करवाते
girish malviyaगिरीश मालवीय

बहुत से लोग कहते हैं कि मोदी सरकार में भ्रष्टाचार नहीं हुआ, उन लोगो से एक बात पूछना चाहता हूं क्या आपने पिछ्ले 7-8 सालों में मोदी सरकार के कामकाज के बारे में कैग की रिपोर्ट की कोई भी ख़बर पढ़ी ? ‘भारत का नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG) संभवतः भारत के संविधान का सबसे महत्त्वपूर्ण अधिकारी है. वह ऐसा व्यक्ति है जो देखता है कि संसद द्वारा अनुमन्य खर्चों की सीमा से अधिक धन खर्च न होने पाए या संसद द्वारा विनियोग अधिनियम में निर्धारित मदों पर ही धन खर्च किया जाए.’ ये डॉ. भीम राव अम्बेडकर का कथन हैं.

CAG के माध्यम से ही संसद की अन्य सार्वजनिक प्राधिकरणों की जो सार्वजनिक धन खर्च करते हैं, उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है और यह जानकारी प्रतिवर्ष जनता के सामने रखना जरूरी होता है. 2015 से पहले हर साल संसद में कैग की रिपोर्ट पर हंगामा होता था, घोटाला हुआ या नहीं हुआ बात दीगर है लेकिन 2जी नीलामी, कोयला ब्लॉक नीलामी, आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाला और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे अनेक प्रकरण उस वक्त कैग रिपोर्ट के द्वारा ही हमारी जानकारी में आए थे.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

आज कैग की क्या हालत है कभी आपने जानने की कोशिश की ? क्या मीडिया ने कभी आपको कैग की रिपोर्ट के लिए अवेयर किया ? आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मोदी सरकार में कैग का किस तरह से गला घोंटा गया है. इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई जानकारी से पता चला कि केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से संबंधित सीएजी रिपोर्ट 2015 में 55 से घटकर 2020 में केवल 14 रह गई. यानी, मोदी जी के रहते संसद में यूपीए सरकार से लगभग 75% कम रिपोर्ट CAG की पेश हुई है, और जो पेश हुई है उनमें भी लीपापोती करने की कोशिश साफ़ नजर आती है.

भ्रष्टाचार का ताजा उदाहरण आपके सामने है. केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी द्वारा कुछ ही दिन पहले 25 जुलाई को सदन में दिए गए एक लिखित उत्तर में बताया गया कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है. भारत में कोयले का उत्पादन 31% बढ़ा है, तो फिर आप ही बताइए कि एनटीपीसी पर और देश के विभिन्न राज्यो पर, विदेशों से बेहद महंगे कोयले के आयात का दबाव क्यों बनाया जा रहा है ?

देश की कोल इंडिया लिमिटेड मात्र तीन हजार रुपये प्रति टन की दर से कोयला राज्यों को दे रही है जबकि अडाणी से कोयला खरीदने के लिये जो टेंडर डाले गए उसमें अडानी ने 30 से 40 हजार रुपये प्रति टन की दर से कोयला आयात के रेट दिए हैं. और अभी खबरें आ रही है कि दस गुना रेट पर कोयला आयात करने के टेंडर पास भी हो गए हैं. इस तरह से जबरन 10 गुना महंगा विदेशी कोयला खरीदेंगे तो देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को महंगी बिजली ही खरीदना पड़ेगी.

कल ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे बिजली मंत्रालय को राज्यों और उसकी बिजली उत्पादन कंपनियों को कोयले के आयात के लिए अपने ‘जबरदस्ती दिए गए निर्देश’ को वापस लेने के लिए कहें, जिनकी उन्हें आवश्यकता नहीं है. फेडेरेशन ने कहा कि 25 जुलाई को संसद में कोयला मंत्रालय के जवाब को देखते हुए महंगा विदेशी कोयला आयात जरूरी ही नहीं है.

इतनी बड़ी लूट खुले आम चल रही है लेकिन न कोई कुछ समझने को तैयार हैं, न कुछ करने को. कैग जैसी संस्था को किनारे लगा दिया गया है तो भ्रष्टाचार की रिपोर्ट देगा ही कौन. लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जानें वाला मीडिया तो पहले ही बिक चुका है !

नमामि गंगे परियोजना

इतने सालों में आज पहली बार ये पता चला है कि गंगा के प्रदूषण को साफ़ करने वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी अडानी की कंपनी चला रही हैं, और मोदी सरकार ने उससे ऐसा समझौता किया है कि किसी समय प्लांट में क्षमता से अधिक गंदा पानी आया तो शोधित करने की जवाबदेही अडानी की कंपनी नहीं होगी.

यह जानकारी कल देश की जनता को इलाहाबाद हाईकोर्ट के माध्यम से मिल पाई जब एक जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही थी. नमामि गंगे परियोजना के महानिदेशक ने कोर्ट को यह जानकारी दी कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तो अडानी जी चला रहे हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने जब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के कांट्रेक्ट की शर्तो का खुलासा हुआ तो जजों ने अपना माथा पीट लिया क्योंकि अदानी से किए कांट्रेक्ट में यह प्रावधान किया गया है कि किसी समय प्लांट में क्षमता से अधिक गंदा पानी आया तो शोधित करने की जवाबदेही उसकी नहीं होगी.

इलाहबाद हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे करार से तो गंगा साफ होने से रही. कोर्ट ने कहा ऐसी योजना बन रही है जिससे दूसरों को लाभ पहुंचाया जा सके और जवाबदेही किसी की न हो. ऐसा करार कर लिया गया है कि कंपनी बिना ट्रीटमेंट किए पैसे ले रही है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्णपीठ मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एम. के. गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कहा कि ‘जब आपने कांट्रेक्ट ही ऐसा किया है है तो ट्रीटमेंट करने की जरूरत ही क्या है ?’

हाईकोर्ट ने योगी सरकार के कामकाज पर उंगली उठाते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि बोर्ड साइलेंट इस्पेक्टेटर बना हुआ है, इसकी जरूरत ही क्या है, इसे बंद कर दिया जाना चाहिए. ऐक्शन लेने में क्या डर है ? कानून में बोर्ड को अभियोग चलाने तक का अधिकार है ? आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि नमामि गंगे’ परियोजना की डेडलाइन 2020 थी, लेकिन 2022 में अब तक इसके 10 फ़ीसदी प्रोजेक्ट भी ठीक से पूरे नहीं हुए हैं.

ऐसा नहीं है कि कोर्ट के सामने पहली बार यह मामला आया है. 2019 में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जजों की पूर्ण पीठ ने केंद्र सरकार से नमामि गंगे प्रॉजेक्ट कार्य के प्रगति की जानकारी मांगी थी. कोर्ट ने पूछा कि जितने भी एसटीपी स्थापित किए गए हैं, वे ठीक से कार्य कर रहे हैं या नहीं ? उनकी क्या स्थिति है और गंगा में नाले का गंदा पानी सीधे कैसे जा रहा है ? उन्हें रोकने का इंतजाम क्यों नहीं किया गया है और गंगा में न्यूनतम जल प्रवाह रखने की क्या योजना है ? लेकिन उस वक्त आम चुनाव होने थे लिहाजा सुनवाई टलती गई और 2022 आ गया.

2016 में नमामी गंगे परियोजना का बजट 20,000 करोड रुपए का बनाया गया था. साफ़ दिख रहा है कि 20 हजार करोड़ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं. मीडिया पिछ्ले कई दिनों से पश्चिम बंगाल में हुए 20 करोड के भ्रष्टाचार की खबरें सुबह शाम जनता को परोस रहा है लेकिन 20 हजार करोड़ के भ्रष्टाचार पर कोई बात नहीं हो रही ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

दुनिया की सबसे भ्रष्ट मीडिया के दवाब में है भारत की न्यायपालिका, तो फिर आप किस पायदान पर खड़े हैं जनाब ?

Next Post

IGIMS : मजदूरों के हक और अधिकार की लड़ाई का एकमात्र रास्ता हथियारबंद संघर्ष ही बच गया है ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

IGIMS : मजदूरों के हक और अधिकार की लड़ाई का एकमात्र रास्ता हथियारबंद संघर्ष ही बच गया है ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मुख्यधारा के नाम पर संघ के सांस्कृतिक साम्राज्यवाद का पर्दाफाश करने की जरूरत है

March 25, 2019

जाकिया जाफरी की 16 साल लंबी कानूनी लड़ाई ‘प्रक्रिया का दुरुपयोग’ ?

June 26, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.