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प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और लार्ड मैकाले की आधुनिक शिक्षा पद्धति में अंतर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 5, 2018
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प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति जो केवल सवर्णों की पुश्तैनी मानी जाती थी. दलितों और शुद्रों का इस शिक्षा पद्धति में प्रवेश सर्वथा वर्जित ही नहीं अपितु दण्डनीय अपराध भी माना जाता था. लार्ड मैकाले ने वक्त के उस अन्तराल में ब्रिटिश साम्राज्य के हित में ही सही परन्तु प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को ध्वस्त कर एक अपेक्षाकृत आधुनिक शिक्षा पद्धति को स्थापित किया. लार्ड मैकाले के इस आधुनिक शिक्षा पद्धति ने देश के बहुसंख्यक दलित-शुद्रों को पहली बार शिक्षित किया और नवीन दुनिया से परिचित कराया.

एक नजर हम प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और लार्ड मैकाले की अपेक्षाकृत प्रगतिशील शिक्षा पद्धति पर डालते हैं –

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प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति –

1. इसका आधार प्राचीन भारतीय धर्मग्रन्थ रहे.

2. इसमें शिक्षा मात्र ब्राह्मणों द्वारा दी जाती थी.

3. इसमें शिक्षा पाने के अधिकारी मात्र सवर्ण ही होते थे.

4. इसमें धार्मिक पूजापाठ और कर्मकाण्ड का बोलबाला रहता था.

5. इसमें धर्मिक ग्रन्थ, देवी-देवताओं की कहानियां, चिकित्सा, भेशजी, कला और तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, जादू टोना आदि शामिल रहे हैं.

6. इसका माध्यम मुख्यतः संस्कृत रहता था.

7. इसमें ज्ञान-विज्ञान, भूगोल, इतिहास और आधुनिक विषयों का अभाव रहता था, अथवा अतिश्योक्तिपूर्ण ढंग से बात कही जाती थी. जैसेः-राम ने हजारों वर्ष राज किया, भारत जम्बू द्वीप में था. कुंभकर्ण का शरीर कई योजन था, कोटि-कोटि सेना लड़ी, आदि.

8. इस नीति के तहत कभी ऐसा कोई गुरुकुल या विद्यालय नहीं खोला गया, जिसमें सभी वर्णों और जातियों के बच्चे पढ़तें हों.

9. इस शिक्षा नीति ने कोई अंदोलन खड़ा नहीं किया, बल्कि लोगों को अंधविश्वासी, धर्मप्राण, अतार्किक और सब कुछ भगवान पर छोड़ देने वाला ही बनाया.

10. यह गुरुकुलों में लागू होती थी. वैसे नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय भी हुए, शिक्षा की प्रणाली में कोई अंतर नहीं था.

11. गुरुकुलों में प्रवेश से पूर्व छात्र का यज्ञोपवीत संस्कार अनिवार्य था. चूंकि हिन्दू धर्म शास्त्रों में शूद्रों का यज्ञोपवीत संस्कार वर्जित है, अतः शूद्र व दलित तो इसको ग्रहण ही नहीं कर सकते थे. अतः इनके लिये यह किसी काम की नहीं  रही.

12. इसमें तर्क का कोई स्थान नहीं था. धर्म और कर्मकाण्ड पर तर्क करने वाले को नास्तिक का करार दे दिया जाता था. जैसे चार्वाक, तथागत बुद्ध और इसी तरह अन्य.

13. इस प्रणाली में चतुर्वर्ण समानता का सिद्धांत नहीं रहा.

14. प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में दलित विरोधी भावनाएं प्रबलता से रही हैं. जैसे कि एकलव्य का अंगूठा काटना, शम्बूक की हत्या आदि।

15. इससे हम विश्व से परिचित नहीं हो पाते थे. मात्र भारत और उसकी महिमा ही गाये जाते थे.

16. इसमें वर्ण व्यवस्था का वर्चस्व था.

17. इसमें व्रत, पूजा-पाठ, त्योहार, तीर्थ यात्राओं आदि का बहुत महत्त्व रहा.

लार्ड मैकाले की आधुनिक शिक्षा पद्धति –

1. इसका आधार तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार उत्पन्न आवश्यकतायें रहीं.

2. लॅार्ड मैकाले ने शिक्षक भर्ती की नई व्यवस्था की, जिसमें हर जाति व धर्म का व्यक्ति शिक्षक बन सकता था. तभी तो रामजी सकपाल (बाबा साहेब डॉक्टर अम्बेडकर के पिताजी) सेना में शिक्षक बने.

3. जो भी शिक्षा को ग्रहण करने की इच्छा और क्षमता रखता है, वह इसे ग्रहण कर सकता है.

4. इसमें धार्मिक पूजापाठ और कर्मकाण्ड के बजाय तार्किकता को महत्त्व दिया जाता है.

5. इसमें इतिहास, कला, भूगोल, भाषा-विज्ञान, विज्ञान, अभियांत्रिकी, चिकित्सा, भेशजी, प्रबन्धन और अनेक आधुनिक विद्यायें शामिल हैं.

6. इसका माध्यम प्रारम्भ में अंग्रेजी भाषा और बाद में इसके साथ-साथ सभी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाएं हो गईं.

7. इसमें ज्ञान-विज्ञान, भूगोल, इतिहास और आधुनिक विषयों की प्रचुरता रहती है और अतिश्योक्ति पूर्ण या अविश्वसनीय बातों का कोई स्थान नहीं होता है.

8. इस नीति के तहत सर्व प्रथम 1835 से 1853 तक लगभग प्रत्येक जिले में एक स्कूल खोला गया. आज यही कार्य राज्य और केंद्र सरकारें कर रही हैं. साथ ही निजी संस्थाएं भी शामिल हैं.

9. भारत में स्वाधीनता आंदोलन खड़ा हुआ, उसमें लार्ड मैकाले की आधुनिक शिक्षा पद्धति का बहुत भारी योगदान रहा, क्योंकि जन सामान्य पढ़ा-लिखा होने से उसे देश-विदेश की जानकारी मिलने लगी, जो इस आंदोलन में सहायक रही.

10. यह विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लागू होती आई है.

11. इसको ग्रहण करने में किसी तरह की कोई पाबन्दी नहीं रही, अतः यह जन साधारण और दलितों के लिये सर्व सुलभ रही. अगर शूद्रों और दलितों का भला किसी शिक्षा से हुआ तो वह लार्ड मैकाले की आधुनिक शिक्षा प्रणाली से ही हुआ. इसी से पढ़ लिख कर बाबासाहेब अम्बेडकर डॉक्टर बने.

12. इसमें तर्क को पूरा स्थान दिया गया है. धर्म अथवा आस्तिकता-नास्तिकता से इसका कोई वास्ता नहीं है.

13. यह गरीब भिखारी से लेकर राजा-महाराजा, सब के लिये सुलभ है.

14. इसमें सर्व-वर्ण व सर्व-धर्म समान हैं. आदिवासी और मूलनिवासी भी इसमें शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं. लेकिन जहां-जहां संकीर्ण मानसिकता वाले ब्राह्मणवादियों का वर्चस्व बढ़ा है, उन्होनें इसमें भी दलितों को शिक्षा से वंचित किया है.

15. इससे हम आधुनिक विश्व से सरलता से परिचित  हो रहे हैं.

16. इसमें सभी जातियां, वर्ण और धर्म समान हैं.

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