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महान समाजवादी विश्वद्रष्टा लेनिन के स्टेचू को ढा़हने का निहितार्थ

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 10, 2018
in ब्लॉग
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lenin ki pratima

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 25 वर्षों से चले आ रहे वामपंथी माणिक सरकार के शासनकाल की समाप्ति हो गई. भाजपा ने बहुमत के साथ सरकार बना ली. इसी के साथ भाजपाईयो से अपने निम्नस्तरीय मानसिकता का एक बार फिर परिचय देते हुए विश्व के महान समाजवादी चिंतक लेनिन की प्रतिमा को धारासायी कर दिया. लेनिन की प्रतिमा को ढ़ाहने में अपनी क्रूरता का परिचय देने में उसने बुलडोजर का सहारा लिया. लेनिन की प्रतिमा को ढ़ाहने के साथ ही भाजपा ने इस बात का भरपूर परिचय दे दिया कि वह समाजवादी विचारधारा का घोर विरोधी है, जो भारत के संविधान की प्रस्तावना का मूल आधार है.

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लेनिन की प्रतिमा ढ़ाहने के साथ ही भाजपा ने खुले तौर पर साबित कर दिया कि वह न केवल समाजवाद और देश के संविधान का ही निषेध करता है वरन् वह भगत सिंह  और चन्द्रशेखर आजाद जैसे महान देशभक्त का भी निषेध करता है, जिन्होंने अपना अंतिम पल महान समाजवादी द्रष्टा लेनिन की जीवनी को पढ़ते हुए खुद को फांसी के फंदे पर चढ़ाया था. इसी के साथ भाजपा देश के उन तमाम मूल्यों का भी निषेध करती है जो देश में समाजवादी आधार को मजबूत करती थी अर्थात, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा जैसै बुनियादी मानवीयता का भी निषेध करती है.

bhagatsingh aur lenin

इतिहास गवाह है भारत की स्वतंत्रता आन्दोलनों में भाजपा के मातृ संगठन आर एस एस का गद्दारी भरा इतिहास रहा है. कितना अजीब है अंग्रेजी हुकूमतों के लिए जासूसी करने और क्रांतिकारियों को फांसी के तख्ते पर पहुंचाने वाले आर एस एस के रहनुमा आज देश की जनता को देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं. देश और दुनिया के तमाम क्रांतिकारियों के खिलाफ खुद को खड़ा कर रहे हैं.

twitter

महाशक्तियों में एक सोवियत संघ को दुनिया की पटल पर एक सफल हस्ताक्षर के तौर पर जाना जाता है, जिसके रचयता स्वयं लेनिन थे. दुनिया की तमाम जनता के अंधकारमय जीवन में रोशनी का प्रवाह लाने वाले लेनिन की प्रतिमा को नष्ट करने का सीधा अर्थ है दुनिया की दुखियारी जनता को एक बार फिर से अंधे कुएं में धकेल देना, जिससे बाहर निकलने का रास्ता लेनिन ने बताया था, जिसे भगत सिंह के साथ साथ देश और दुनिया की करोड़ों जनता ने भी अपनाया था.

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देश की जनता के साथ गद्दारी का इतिहास अपने माथे पर चस्पा किये आर एस एस और उसके अनुषांगिक राजनैतिक संगठन भाजपा देश की विशाल आबादी को एक बार फिर गुलामी के दलदल में धकेलने को आमादा है. वह देश को एक बार फिर मनुस्मृति जैसे असमानता के अमानवीय कानूनों को लागू कर संविधान को निष्प्रभावी करना चाहती है, जिसका अंजाम देश की विशालकाय आबादी दलितों, शूद्रों, आदिवासियों, मुसलमानों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं को भुगतान होगा, जिसकी उदघोषणा भाजपा ने लेनिन की प्रतिमा को बुलडोजर से ढ़ाहकर कर दी है.

इन सब में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि क्रांतिकारी जब जेल, मौत और फांसी से नहीं घबराते तो वह भला प्रतिमा ढ़ाह देने भर से क्योंकर घबराने लगे ? बहरहाल भाजपा के इसी कुकृत्य बहाने एक बार फिर लेनिन और उनके विचार आम जनों के बीच बहसों में शामिल है.

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Comments 1

  1. Rajesh Bhardwas says:
    9 years ago

    बुलडोज़र से न तो लेनिन को नष्ट किया जा सकता है और न ही समाजवाद को. लेकिन इनकी विजयी भावना कानून विरोधी और देश विरोधी है. इतिहास बदलने का इनका तरीका तो तैमूर और महमूद गजनवी जैसा है. ‘देश भाजपा का है जनता विदेशी ‘ इनका यह विश्वास क्षणजीवी भी तो नहीं! इन्हें सच पता है कि यह लोग राष्ट्रहित की कीमत पर, राष्ट्रहित के समानांतर कुछ और कर रहे हैं. बाकी सब कुछ प्रोपेगैंडा है.

    Reply

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