Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

चड्डीश्वर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 10, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
चड्डीश्वर
चड्डीश्वर
विष्णु नागर

एक थे चड्डीश्वर. चड्डी को चड्डी की तरह तो पहनते ही थे, उसे कमीज बनाकर भी पहनते थे. चड्डी ही उनकी बनियान, उनका कच्छा थी. वह चड्डी ही बिछाते, चड्डी ही ओढ़ते थे, चड्डी में रहकर चड्डी-चिंतन करते थे. वह सिर से पैर तक बने थे चड्डी के.

एक दिन ऐसा भी आया कि चड्डी इस्तेमाल करते-करते घिस गई. यहां–वहां, जहां-तहां से फट गई मगर थी वह ऐतिहासिक चड्डी. कुछ का दावा था कि वह शिवाजी-राणा प्रताप के जमाने की थी, तो कुछ उसे 5000 साल पुराना बताते थे. जहां तक उनका अपना सवाल है, वह इसे पिछले 90 साल से कुछ ज्यादा समय से धारण कर रहे थे. नई थी, तब इतनी मजबूत नहीं थी मगर धुलते-धुलते मजबूत हो चली थी मगर इधर अचानक तार-तार हो गई थी.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

वह ठहरे प्राचीन संस्कृति के पुजारी, ऐसी चड्डी पहनें कैसे और न पहनें तो फिर पहनें क्या ? उन्हें अक्सर कनफ्यूजन हो जाता था कि वह चड्डी को पहनते थे या चड्डी उन्हें पहनती थी. इसे न छोड़ते बनता था, न पहनते. वैसे नंगे रहने में कठिनाई लोकलाजवाली ज्यादा थी लेकिन इससे बड़ी समस्या यह थी कि चड्डी के बगैर उन्हें अपना जीवन सूना-सूना लगता था. समस्या यह भी थी कि पुरानी की जगह नई चड्डी कैसे पहनें ? किस मुंह से पहनें ? वह चड्डी नहीं, संस्कृति थी. संस्कृति की रक्षार्थ पुरानी चड्डी पहनना जरूरी था. इधर पैंट पहनने का दबाव बढ़ रहा था मगर जो आनंद, जो मजा, जो सुख चड्डी में है, वह और कहां ?

चड्डी उनका भरी जवानी का पहला प्यार था. इसकी खातिर उस लड़की से प्यार नहीं किया था, जो कि बहुत प्यारी थी. उसे कैसे भुला सकते थे ? ठीक है, जीवन में कभी-कभी दूसरा-तीसरा-चौथा प्यार भी हो जाता है मगर पहले प्यारवाली बात फिर कहां ? चड्डी उनका यथार्थ थी, आदर्श थी, वर्तमान थी, भविष्य थी. तुझ बिन जिया, न जाय जैसी हालत उनकी थी.

बहुत अबौद्धिक किया, योग किया, भोग किया, ढोंग किया मगर कुछ समझ में नहीं आया. राष्ट्र चिंतन किया, हिंदू-मुसलमान किया, लव जेहाद किया, गौमाता किया, ध्वज प्रणाम किया, राष्ट्र वंदन किया, गुरू जी किया, डॉक्टर साहब किया, दंगा-फसाद किया. सीधे को उलटा किया, उल्टे को सीधा किया, फिर भी कुछ समझ में नहीं आया. यहां तक कि हिंदू राष्ट्र करने से भी समझ में नहीं आया. संविधान पढ़ने का भगीरथ प्रयत्न किया तो वह समझ में नहीं आया. तिरंगे की तरफ देखा तो उसके तीन रंग आंखों में चुभने लगे क्योंकि आदत एक रंग की थी. ‘जन गण गण’ किया तो ‘वंदेमातरम’ याद आया. हाय रे संकट.

सवाल जीवन-मरण का था कि इस फटी हुई प्राचीन चड्डी का क्या करें ? क्या उसमें थेगले लगाएं ? और लगाएं तो किस रंग के लगाएं ? हरे रंग के न लगाएं, इस पर सहमति थी मगर बाकी रंगों पर तीव्र असहमति थी. कोई कहता कि खाकी में खाकी थेगला होकर भी थेगला नहीं लगेगा. कोई कहता कि पीला लगाओ. कोई कहता भगवा ही क्यों नहीं ? अंततः अगवा रंग पर सहमति बनी मगर पता चला कि ऐसा रंग होता नहीं !

अचानक विपदा आन पड़ी थी. अकस्मात आकाशवाणी हुई कि खाकी छोड़ो, भूरी पैंट पहनो. सब तरफ अहा-अहा, वहा-वहा, यहां तक कि वाह-वाह तक होने लगी. घंटा-घड़ियाल बजे, शंखनाद हुआ, हर्ष विभोर लोग डांस- वभोर जब होने लगे तो अचानक किसी ने ध्यान दिलाया कि डांस करना संस्कृति के खिलाफ है, नृत्य भी नहीं, नर्तन करो.

नर्तन करना किसी को आता नहीं था, अंततः कीर्तन करने पर सहमति बनी. मगर कीर्तन किसका ? कृष्ण का या राधा का, राम का या शिव का या पार्वती का या आसाराम का ? किसी ने कहा- ‘वह भी भगवान हैं’, मगर दूसरे ने कहा – ‘लेकिन वह जेल में हैं’ तो जवाब आया – ‘यह तो अत्यंत उत्तम है. फिर तो आसाराम ही एकमात्र विश्वसनीय है, आदरणीय है, पूजनीय है. करो-जय आसाराम, जय आसाराम, प्रभु आसाराम जी, प्रभु आसाराम. आसाराम सबसे निराले, पियारे-पियारे सुमति के फुहारे. मेरे अल्लाह, मेरे दाता, सबको सम्मति दे भगवंता…’.

इतने में कोई बोल पड़ा – यह अल्लाह किसने बोला ? निकालो उसे यहां से. यह छद्म धर्मनिरपेक्षतावादी है, कम्युनिस्टों का एजेंट है, पापी है, म्लेच्छ है…’. मगर पता चला कि ऐसी गलती स्वयं प्रमुख कर बैठे हैं. प्रमुख ने आंखें दिखाईं तो वातावरण में अनुशासन उत्पन्न हो गया लेकिन भजन भंग हो गया. ध्यान का विखंडन-विसर्जन हो गया, वातावरण दु:खमय हो गया. हमारा यह वृत्तांत यहीं अधूरा रह गया. ये थीं खबरें कल तक, प्रतीक्षा करें परसों तक !

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

भारत की साझी संस्कृति की महान देन है हमारी उर्दू भाषा

Next Post

बिकनी और ‘बिकनी एटोल’ की त्रासदी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

बिकनी और ‘बिकनी एटोल’ की त्रासदी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अंबानी का नौकर मोदी किसानों को गुलाम बनाने के लिए करता दुश्प्रचार

December 18, 2020

सरकारी पुलिसिया हमले का विकल्प ‘आजाद गांव’

May 2, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.