Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘कला’ : बेचैन करने वाली खूबसूरत बर्फ़ीली अवसाद की कहानी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 14, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'कला' : बेचैन करने वाली खूबसूरत बर्फ़ीली अवसाद की कहानी
‘कला’ : बेचैन करने वाली खूबसूरत बर्फ़ीली अवसाद की कहानी
मनीष आजाद

‘कला’ अपने साथ डाह, प्रतियोगिता, पश्चाताप, ईगो की अनेकों परतें साथ लिए विकसित होती है. हाल ही में नेटफ्लिक्स पर आई फिल्म ‘कला’ की कहानी भी बहुपरतीय है. हरेक परत अलग कहानी कहती है पर परस्पर गुंथी हुई.

एक परत है मां बेटी के जटिल रिश्तों की. मां बेटी को अंत तक अपना नहीं पाती. जब अपनाती है तो बहुत देर हो चुकी है. पितृसत्ता का ग्रहण बेटी के जीवन पर अभिशाप की बर्फ़ बन कर बरसता भी है और उसे आच्छादित भी किये रहता है. जुड़वां बच्चों में पहले बेटी होती है और फिर मृत बेटा. बेटे की कामना अतृप्त रह जाती है और बेटी मां की नफ़रत की आजीवन शिकार बनती है. बेटे की चाहत में एक अन्य लड़के को अपनाती है मां और बेटी को ठुकराती है.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

ज़ाहिर है बेटी के ज़हन पर नफ़रत और घृणा की बर्फ़बारी ऐसी होती है कि बेटी ‘कला’ मां के अपनाये ‘बेटे’ के प्रति डाह से भर उठती है.
फ़िल्म जगत में ‘देह’ देकर कुछ हासिल किया जा सकता है, यह बात कला अपनी मां से सीखती है और उनके पोषित बेटे को विस्थापित कर संगीत का सर्वोच्च हासिल करती है. फिर भी मां उसे अपनाने से इंकार कर देती है. कला जीवन भर मां के प्यार और अटेंशन हासिल करने में अपना जीवन गंवा देती है.

https://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2022/12/Qala-_-Official-Trailer-_-Triptii-Dimri-Babil-Khan-Amit-Sial-Varun-Grover-_-Netflix-India.mp4

Qala _ Official Trailer _ Triptii Dimri, Babil Khan, Amit Sial, Varun Grover _ Netflix India

हिमांचल की खूबसूरती को और भी रहस्यमयी और कुछ दृश्यों की मांग के अनुरूप भयावह बनाता है अमित त्रिवेदी का संगीत. संगीत का बेहतरीन साथ फिल्म को विकसित करता हुआ चलता है. कहीं कहीं संगीत फिल्म से अलग अपनी ख़ास उपस्थिति दर्ज़ कराता है. एक अलग तर्ज़ में निर्गुन सुनना अच्छा ही लगता है. एक दो गीत भी कर्णप्रिय हैं. बोल बहुत दिल को छूने वाले नहीं हैं फिर भी सुने जा सकते हैं.

कला के रूप में तृप्ति डिमरी काफ़ी सुंदर लगी हैं और चरित्र में उतर जाती हैं. बिल्कुल पश्चिम की कला फिल्म की हिरोइन की तरह. हालांकि क्लोज़अप शॉट्स में उनके चेहरे पर भाव उतने रियल नहीं लगते. जब वह डरती हैं तो वह डरी हुई नहीं लगती बल्कि अभिनय करती सी लगती हैं. कला के अभिनय को रिटेक से और निखारा जा सकता था.

कला की मां स्वस्तिका मुखर्जी ने ज्यादा सधा हुआ अभिनय किया है. उनके गहने और कॉस्टयूम काफ़ी खूबसूरत और आकर्षक है. हां इरफ़ान खान के पुत्र बाबिल खान के अभिनय पर पिता की विरासत का बोझ साफ़ नज़र आता है. पूरी फिल्म एक खूबसूरत तस्वीर की तरह शूट की गई है. हरेक फ्रेम काफ़ी कलात्मक और खूबसूरत है.

फ़िल्म 1940 के दशक की कहानी कहती है. जब गाँधी सोलन आये थे. भारत में 1940 का दशक राजनीतिक रूप से उथल पुथल का दशक है. और फिल्म देख कर पता चलता है कि उस वक्त भी अभिजात्य वर्ग अपने सामाजिक राजनीतिक यथार्थ से कटा हुआ था. उस वक्त भी उसे उससे कुछ लेना देना नहीं था. बस अपनी ज़िन्दगी जिए जा रहा था, ज़माने से बेखबर. अपनी बेटी के भी दिलो-दिमाग से ग़ाफ़िल..

कला फिल्म की निर्देशिका हैं अन्विता दत्त और प्रोड्यूसर हैं अनुष्का शर्मा. कला जब कला के लिए बनेगी, निरुद्देश्य होगी तो अवसाद में चली जाएगी. इस फ़िल्म को देख कर अवसाद की सर्द बर्फ़ दिलो-दिमाग पर छाने लगती है. बर्फ़ीली खूबसूरती बेचैन करती है, और रूह को रिहा नहीं करती.

Read Also –

अपनी ही बेटी के कब्र पर बेटों का महल सजाती मां !
‘मां’ के दूसरे रूपों के बारे में
राजा रवि वर्मा, जिन्होंने हिन्दू देवी-देवताओं को पहली बार कैनवास पर उतार जन-जन तक पहुंचाया

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

वो लौट रहे हैं

Next Post

हम गुलामी की अंतिम हदों तक लडेंगे

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

हम गुलामी की अंतिम हदों तक लडेंगे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हे राष्ट्र ! उठो, अब तुम इन संस्थाओं को संबोधित करो

March 30, 2019

बिगड़ते आर्थिक हालात, FRDI बिल की धमक और खतरे में जमाकर्ताओं की जमा पूंजी

March 8, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.