Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अडानी रोजगार नहीं देता, अन्तर्राष्ट्रीय फ्रॉड करता है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 9, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अडानी ग्रुप में नौकरी करने वालो की संख्या मात्र 23 हज़ार से कुछ ज्यादा है जबकि अडानी ग्रुप के मालिक दुनिया के तीसरे सबसे अमीर आदमी रह चुके हैं. इसकी तुलना में अमेजन जैसी कंपनी जो खुद कोई वस्तु नहीं बनाती है, वो हजारों लाखों कंपनियों से अपने ग्राहकों के लिए उचित मूल्य पर सामान खरीदती-बेचती है. यानी कि एक सप्लाई चेन चलाती हैं, उसके यहां 15 लाख़ 41 हजार इंप्लोई काम करते हैं.

आप जानते हैं ही है कि अमेजन पर ये आरोप लगते हैं कि वो करोड़ों जॉब खाकर ये बिजनेस कर रहे हैं. अमेजन के मालिक जेफ बेजोस फोर्ब्स की लिस्ट में पिछले साल बहुत ऊपर नीचे हुए हैं. एक बार तो वे अडानी से भी नीचे चले गए थे तो क्या आपने कभी ये सोचा कि दुनिया के तीसरे सबसे धनी आदमी के अडानी ग्रुप में इतने कम लोग क्यों काम करते हैं ?

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

अच्छा एक मजे की बात और समझिए कि गौतम अडानी फोर्ब्स की सूची में 2014 में 609वें स्थान पर थे. जी हां 609 वे स्थान पर. तब अडानी समूह के पास 10 हजार इंप्लोई काम कर रहे थे. 13 सितंबर 2013 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने अपना पीएम उम्मीदवार घोषित किया तब अडानी समूह की कंपनियों का मार्केट कैप 51,573 करोड़ रुपये था. 2013 तक, अडानी समूह की अधिकांश संपत्ति गुजरात में स्थित थी. लेकिन 2022 तक, यह पूरे देश में फैल गया.

लेकिन क्या कमाल की बात है कि इन आठ सालों इसके कर्मचारियों की संख्या में मोटे तौर पर सिर्फ ढाई गुना की वृद्धि हुई. जबकि अदानी की दौलत में इन आठ सालों में 41 गुना वृद्धि हुई. 2022 में अडानी ग्रुप का कुल मार्केट कैप 20.31 लाख करोड़ रुपये के आसपास था. अडानी की कुल दौलत 122.3 अरब डॉलर हो गई. एक बार सोचिए जरूर कि अडानी की दौलत फिर कैसे इतनी बढ़ गई जबकि उसने जॉब तो न के बराबर दिए ?

गुजराती सेठ अडानी देश के लोगों रोजगार देते हैं ? कितना ? एक लाख ? दो लाख ? चार लाख ? दस लाख ? घंटा. पूरे ग्रुप में मात्र 23,000 लोग काम करते हैं. आप कहेंगे कि ये भी ठीक है. नहीं, ठीक नहीं है. बाकी सारी कंपनियों लाखों में रोजगार देती हैं. आइए डिटेल देते हैं.

जिस गुजराती सेठ के लिए एलआईसी का 35000 करोड़ डुबा दिया, वह एलआईसी अकेले 1,15,000 लोगों को नौकरी दे रही है. इसके अलावा एलआईसी के लगभग 14 लाख एजेंट हैं जो अपनी मेहनत से कुछ न कुछ कमाते हैं. मिस्टर ठगेंद्र ने गद्दी संभालते ही गुजराती सेठ को एसबीआई से 6000 करोड़ दिलवाए थे, वह एसबीआई देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक है और 2,45,000 लोगों को पक्की सरकारी नौकरी देता है. गुजराती सेठ से 11 गुना ज्यादा. तो गुजराती सेठ के लिए एसबीआई को क्यों दांव पर लगाया ?

भारत में सबसे ज्यादा रोजगार कौन देता है ? आज भी सबसे ज्यादा सरकारी विभाग. अकेले भारतीय सेना 14,00,000 लोगों को रोजगार देती है. भारतीय रेलवे 12,54,000, अर्धसैनिक बल 8,90,000, डाक विभाग 4,66,000, कोल इंडिया 2,72,000 नौकरी देता है. इन संस्थाओं को जिस गुजराती सेठ के हाथों बेचा जा रहा है वह सिर्फ 23000 रोजगार देता है !

भारत में और भी उद्योगपति हैं. उनके द्वारा दिये गए रोजगार के आंकडों को देखिए –

  • टाटा समूह – 9,35,000
  • इंफोसिस – 3,46,000,
  • Larsen & Toubro – 3,06,000
  • महिंद्रा समूह – 2,60,000,
  • विप्रो – 2,50,000,
  • रिलायंस ग्रुप – 2,30,000,
  • माइक्रोसॉफ्ट – 2,21,000,
  • HDFC – 1,41,000,
  • HCL 2,22,270
  • Quess Corporation – 3,83,000
  • अमेरिकी कंपनी Accenture भारत में 3 लाख और
  • अमेजन इंडिया 1 लाख लोगों को रोटी दे रही है.

भारत का सबसे बड़ा धनकुबेर गुजराती सेठ रोजगार सिर्फ 23000 को नौकरी क्यों दे रहा है ? ठगेंद्र के चमचे कह रहे हैं कि गुजराती सेठ को कुछ मत कहो, रोजगार देता है. कहीं छुईमुई मुरझा गया तो रोजगार चला जायेगा ! 23000 रोजगार देने वाले भ्रष्टाचारी को बचाना है, और साढ़े 12 लाख रोजगार देने वाले रेलवे को उसी भ्रष्टाचारी के हाथ बेच देने पर मौन साध जाना है ?

ठगेंद्र गुजराती सेठ को क्यों बचा रहे हैं ? क्योंकि गुजराती सेठ के सारे कारनामों के तार ठगेंद्र से जुड़े हैं. यहां रोजगार नहीं, भ्रष्टाचार बचाना है. लेकिन अब पाप का घड़ा भर गया है. जुगलबंदी की पोल खुलने लगी है. बांग्लादेश वाले कह रहे हैं कि हमसे अडानी की महंगी बिजली खरीदवाने का समझौता करवाया गया.

कुछ महीने पहले श्रीलंका वाले कह रहे थे कि अडानी को पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट पीेएम मोदी के कहने पर श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति राजपक्षे ने दिलाया था. आस्ट्रेलिया वाले तो सालों से कह रहे हैं कि अडानी हमारे यहां कोयला खदानों से कोयला निकालकर पर्यावरण खराब कर रहा है.

पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं कर रही है मोदी सरकार ?

क्या आप जानते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले भारत के आयात में रूसी कच्चे तेल का हिस्सा केवल 0.2 प्रतिशत था लेकिन पिछले महीने जनवरी, 2023 में यह बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया है. जी हां 28 प्रतिशत ! भारत की मोदी सरकार बेंट क्रूड की तुलना में रूस से कच्चा तेल बेहद सस्ते दामों पर खरीद रही है.

रूस युक्रेन युद्ध के शुरुआत के समय तो रूस भारत को 35 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट दे रहा था, उस वक्त इंटरनैशनल मार्केट में कच्चे तेल (Crude oil) के दाम आसमान पर थे. सितंबर 2022 से रूस अपने तेल को ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 20 डॉलर प्रति बैरल सस्ता बेच रहा था.

दिसंबर में रूस ने भारत को रोजाना 11.9 लाख बैरल कच्चे तेल की सप्लाई की. जनवरी में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़कर 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यानी लगातार सस्ते दामों पर देश को कच्चा तेल मिल रहा है. इस दौरान बेंट क्रूड के दाम भी घटे हैं लेकिन आम जनता के लिए पेट्रोल डीजल के कीमतों में कोई कटौती नहीं की गई ! आम जनता को इस तरह से लूट कर सरकार किसकी जेब भर रही है ?

  • गिरीश मालवीय व अन्य

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

पार्टनर, तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है !

Next Post

उमंग : लोककला द्वारा सामाजिक बदलाव की पहल

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

उमंग : लोककला द्वारा सामाजिक बदलाव की पहल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

रोजगार: मोदी सरकार के तीन साल

रोजगार: मोदी सरकार के तीन साल

May 25, 2017

अयोध्या भारत की साझी विरासत

November 29, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.