Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

फैसला : हाथरस में नहीं हुआ कोई बलात्कार !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 3, 2023
in कविताएं
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बुझ गई होगी टीवी स्क्रीन पर
वह चिता.
अख़बार के पन्नों की लग चुकी होंगी तहें
टीवी एंकर गरम पानी से कर रहे होंगे गरारा.

चिता का बिम्ब अब मुझे प्रभावित नहीं करता.
रोज़ – रोज़ सुलगने से बेहतर है
एक बार ही फुंक जाना.
लेकिन उस चिता को कौन फूंक रहा है
इससे पड़ता है फ़र्क.

You might also like

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

स्वप्न

पुलिस के लिए
एक पोस्ट अब गढ़ दी जानी चाहिए
शमशान घाट में भी.
रोज़ – रोज़ फूंकेंगे मुर्दे.
तृप्त होगी आत्मा थोड़ी.
इब्लीस का कोई रूप रंग होता है क्या ?

पर वे भी महज़ प्यादे हैं शायद
चाल तो कोई और ही चल रहा है.
समझो इसे
चिता को आग भले ही पुलिस ने लगाई
पर असल तो कोई और है
जो लिख रहा है पटकथा
कहीं दूर बैठ.
जो घुमा रहा है गोटियां
मनमाफ़िक और सौंप रहा है
चिता के लिए आग.

सबसे आसान शिकार हैं औरतें
अगर ग़रीब हैं तो अच्छा
युवा हैं तो और भी अच्छा.
दलित हैं तो सबसे अच्छा.

अरे ये ठाकुर बाभन नहीं करते बलात्कार कभी
छीssss…
वह भी दलित औरत का ?
इतिहास गवाह है
कभी नहीं किया
कभी किया ही नहीं.

रियाया की नववधुओं की
डोलियां कभी उतरी ही नहीं थी
उनके दुआरे.
उन्होंने कभी नहीं किया अपनी
पत्नियों तक का भी बलात्कार!
ये सब तो मनगढ़ंत किस्से हैं
सुनाए जाते हैं बढ़ा – चढ़ा कर
जैसे आजकल
टीवी चैनलों पर सुनाए जा रहे हैं समाचार.

उन दिनों नहीं होते थे कोई बलात्कार
न ही आज होते हैं.
नहीं हुआ था वहां कोई बलात्कार!
केवल फूंकी गई थी एक चिता.
क्योंकि और नहीं सुलगना चाहती थी वह
रोज़ – रोज़.

इसीलिए
चिता का बिम्ब मुझे प्रभावित नहीं
करता.
ये रोज़ – रोज़ का सुलगना
कतई नहीं होता मुझसे बर्दाश्त
भीतर तक बीमार हो जाती हूं मैं.
इस सुलगने का कोई इलाज हो
तो बताना.

सुना है ये रोज़ – रोज़ का सुलगना
होता है ख़तरनाक.
कोयले की खदान जैसा.
सतह के भीतर जितनी फैलती है आग
उतना ही ऊपर
बढ़ता जाता है ख़तरा,
और एक दिन हो जाता है विस्फोट.

इससे लगने वाली आग होती है
और भी ज़ियादा ख़तरनाक !
कहीं ऐसा न हो
चिता में जबरन लगी यह आग
एक रोज़ भड़क जाए इतनी
कि चूल्हे की आग
और जंगल की आग में
फर्क करना हो जाए दुश्वार ..

  • अमिताशीरीं

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

अडानी, मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट

Next Post

1962 की लडा़ई, थोड़े फैक्ट …

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
कविताएं

मैं तुम सबको देख रहा हूं –

by ROHIT SHARMA
June 4, 2025
Next Post

1962 की लडा़ई, थोड़े फैक्ट ...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मुसलमानों को भी राजनीति करने दीजिए

November 12, 2020

गंगा परियोजना : प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल का अंत

October 19, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.