Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

1962 की लडा़ई, थोड़े फैक्ट …

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 4, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
1962 की लडा़ई, थोड़े फैक्ट ...
1962 की लडा़ई, थोड़े फैक्ट …

स्टेज 1

  1. 1952 में चीन की एक रोड का पता चला जो सुदूर उत्तर में वहां बनी, जो (शायद) भारत की जमीन थी.
  2. शायद इसलिए क्योंकि कश्मीर राजा उसे अपना कहते जरूर थे, लेकिन ब्रिटिश उसे बार्डर अनडिफाइन्ड मानते. नक्शे है बाकायदा बार्डर अनडिफाइन्ड लिखे हुए.
  3. हमने आपत्ति की लेकिन बार्डर ही अनडिफाइन्ड था तो क्लेम पुख्ता कैसे हो ? हमने 1954 में भारत का नया नक्शा जारी किया. वही, जिसे आप बचपन से देख रहे हैं.
Border Nehru ‘Clsimed’ in 1954 map.

स्टेज 2

  1. जब हमने नक्शा खींच दिया, तो वह जमीन भारत माता हो गई. जहां श-जहां कागज पर नक्शा खींच दो, उसे भारत माता मान लिया जाना चाहिए.
  2. जहां तक लाइन हमने खींची 1954 से 1960 तक, वहां तक पहुंचने की कोशिश की. यही फारवर्ड पॉलिसी थी. हम आधा रास्ता चले भी गए. तनाव बढने लगा.
  3. और भी आगे बढते तो चीन की रोड ले लेते तो चीनी रोकने आ गए. तब से वहीं स्टेण्डआफ चल रहा है.
India map of black contour curves of vector illustration
Map of India 1947. Clearly mentioning ‘boundary undefined’ (See top Right). India map of black contour curves of vector illustration.

स्टेज 3

  1. चीन ने कोशिश की. चाउ आए, प्रस्ताव दिया- अरूणाचल के इलाके में हम तुम्हारे नक्शे की लाइन मान लेंगे, अक्सई चिन पर हमारी मान लो.
  2. चीन ने शाक्सम घाटी का मामला पाकिस्तान से ऐसे ही सुलझाया था. नेहरू इस पर सहमत थे, संसद नहीं.
  3. नेहरू ने संसद को समझाया – नॉट ए ग्रॉस इज ग्रोन देयर. और महावीर त्यागी ने सीना ठोककर सिर कटाने वाला बयान दिया.
  4. वैसे भी सर सैनिकों के कटने थे, सांसदों और मीडिया के नहीं. तो संसद के दबाव में यह संभावित समझौता नहीं हो सका. उपर से गोवा जीतकर हर भारतवासी स्वयं को सर्वशक्तिमान मिल्ट्री पावर समझ रहा था. इसे शास्त्रों मे जिंगोइज्म कहा गया है.
  5. चीन मौका देख रहा था. मौका मिला – जब दुनिया क्यूबा मिसाईल संकट मे व्यस्त थी, रूस और अमेरिका परमाणु युद्ध के मुहाने पर थे, ठीक उसी समय चीन ने धावा बोल दिया.

स्टेज 4

  1. इन सीमाओं में सेना जो लगी थी, वो पेट्रोलिंग के लिए बिल्डअप था, युद्ध के लिहाज से नहीं.
  2. ज्यादातर चोटियां जो चीन ने जीतीं, लड़कर नहीं इसलिए जीती कि भारतीय फौजी ‘ग्रुप होने के लिए’ आगे की 4 चोटी छोड़कर पीछे 1 पर जमा होने लगे.
  3. चीन ने ज्यादातर खाली चोटियां कब्जा की. एक चोटी, याने नीचे की पूरी वैली आपके कन्ट्रोल में.
  4. जिंगोइज्म मे सिर कटाने का दावा करने वाले, अब संसद में नेहरू को गरियाने लगे. अटल ने युद्ध के बीच संसद में नेहरू सरकार को इनकैम्पेटेण्ट बताते हुए लंबा भाषण दिया.
  5. नेहरू ने उन्हें गद्दार नहीं कहा, चुपचाप सुना.
Disputed areas, along LAC

स्टेज 5

  1. क्यूबा संकट 13 दिन चला. पूरे 13 दिन चीन बढता रहा. क्यूबा संकट सुलझा, चीन ने स्टॉप कर दिया. उसे मालूम था, नेहरू की फोन लाइन अब काम करने लगेंगी.
  2. अगले 18 दिन नेहरू ने चौतरफा अंर्तराष्ट्रीय दबाव बनवाया. रूस ने चीन पर दबाव बनाया, चीन टालमटोल करता रहा. तो केनेडी ने अपना किट्टीहॉक का बेड़ा भेजने का आदेश दिया.
  3. जैसे ही अमेरिका ने आदेश दिया, खबर सुनते ही चीन ने एकतरफा युद्ध विराम किया और ….
  4. किट्टीहांक बेड़ा निकल पाता, उसके पहले (जो कम लोगों को ही पता है कि) चीन जीती हुई 90 प्रतिशत पहाड़ियां छोड़कर भाग गया.
  5. चीन का जमीन छोड़कर लौट जाना, जबरदस्त कूटनीतिक जीत थी. लेकिन हम हार की निराशा मे ऐसे डूबे कि सबकुछ नजरअंदाज कर नेहरू को ब्लेम करते रहे. 1962 के लिए नेहरू को ब्लेम करना एक फैशन है. कांग्रेस भी चुपचाप स्वीकार लेती है।

स्टेज 2 को वापस पढिये.

युद्ध के पहले, लद्दाख से 300 किमी आगे बढते हुए हमनें लाखों स्कवेयर किलोमीटर कब्जा किया था. कश्मीर राजा की आखरी चौकी लद्दाख थी. इसके आगे, पूर्व दिशा में अगर एक इंच भी भारत भूमि है तो वह नेहरू की विजय है.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

आज भारत की सीमा, लद्दाख से पूर्व में आगे कोई 260-70 किमी है. यानी, 1962 के बाद 30-35 किमी खो दिया गया है. ज्यादातर पिछले 20 सालों में … और विश्वास कीजिए, इसमें भी अधिक खोया है 2014 के बाद…और ये वो भूमि थी, जो नेहरू ने जीती (या कब्जा की) थी.

अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं जिंगोइज्म से तय नहीं होती. इससे केवल घरेलू वोट मिल सकते हैं. जिनके लिए वोट महत्वपूर्ण है, वो जिंगोइज्म को बढावा देते हैं. जिनके लिए शांति और शांति मे होने वाला विकास महत्वपूर्ण है, वे किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश करते हैं.

1962 भारत की जनता, नेताओं का एक गुट और मीडिया के जिंगोइज्म का नतीजा था. आज फिर घर घुसकर मारने, एक के बदले दस सिर लाने वाला बकवाद हावी है. आपको जमीन नहीं, ज्यादा से ज्यादा सिर चाहिए. चीन को जमीन चाहिए, सिर खोने के लिए उसके पास एक्सपेण्डेबल पॉपुलेशन बहुत है.

इन वास्तविकताओ को समझना जरूरी है. आप मुझे चीन समर्थक, नेहरू का चमचा वगैरह कह सकते हैं लेकिन इस आलेख को दो बार पढें, समझे और अपना ओपिनियन बनाएं. आपके भीतर का जिंगोइज्म शांत होगा, तो कोई कूटनीतिक पहल कामयाब हो सकेगी.

अंत में यह कहना चाहूंगा कि मौजूदा सरकार सबसे बेहतर सरकार है जो हमें इस अंतहीन युद्ध और तनाव से निकाल सकती है. यह कूटनयिक बुद्धि से शून्य इवेन्टबाज सरकार है. यह चीन को उसकी इच्छित जमीन भी देगी, आपको पता भी नही चलने देगी और बदले मे एक दो ‘लाठी-बल्लम विडियो’ वायरल कर, जीत का इवेन्ट बना देगी.

चीन को जमीन मिलेगी, आपको कटे सिरों की गिनती. पार्टी को सत्ता और मीडिया को विज्ञापन. एवरीबडी विल बी हैपी. ऐसी बेशर्मी भरी सरकार भारत को दोबारा नहीं मिलेगी.

  • मनीष सिंह

Read Also –

भारत चीन सीमा विवाद और 62 का ‘युद्ध’
भारत-चीन-पाकिस्तान सीमा
चीन के साथ पराजय का अनुभव
लद्दाख में चीन और मोदी सरकार की विदेश नीति
चीन : स्वाभिमान, आत्मगौरव और संप्रभुता भारत इन तीनों को तेजी से खो रहा है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Tags: 1962 की लडा़ईथोड़े फैक्ट ...
Previous Post

फैसला : हाथरस में नहीं हुआ कोई बलात्कार !

Next Post

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के प्रति बाइडेन प्रशासन की नीति – एंटनी जे. ब्लिंकन, विदेश मंत्री, अमेरिका

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के प्रति बाइडेन प्रशासन की नीति - एंटनी जे. ब्लिंकन, विदेश मंत्री, अमेरिका

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हाशिये के लोगों के बारे में सोचें और वैज्ञानिक चिंतन के लिए लड़ें

October 14, 2022

आर्य और तमिल – स्वामी विवेकानन्द

January 18, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.