Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आयेगा, तो अतीक ही …

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 28, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
आयेगा, तो अतीक ही ...
आयेगा, तो अतीक ही …
मनीष सिंह

अतीक अहमद बहुत ही सीनियर पॉलिटिशियन रहे. जन जन के नेता, और युवा हृदय सम्राट अतीक जी, 1989 में प्रथम बार विधायक तब बने, जब इस देश की मौजूदा संसद और विधायिकाओं के 90 फीसदी लोग गली में कंचे खेला करते थे.

औरों को क्या गिनें, हमारे मौजूदा प्रधानसेवक प्रथम बार गुजरात में विधायक चुने गए. अतीक जी इधर चार टर्म के विधायक हो चुके थे. असल में उन्होंने पहली बार उन्होंने संसद की साीढियों पर माथा टेका, अतीक सांसद होकर, टर्म पूरा करके, रिटायर हो चुके थे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

वे एक गम्भीर और लोकप्रिय जनसेवक थे. प्रयागराज की जनता की आंखों के तारें … इतने बड़े तारे कि अगर कोई पार्टी टिकट दे, या न दे.. जनता निर्दलीय ही अतीक अहमद को जिताती थी.

और अतीक अपने बाहुबल के इलाके में कभी माया को जिताते, कभी राम को. यह अलग बात कि जब नमाजवादियों को जिताने लगे, तो माया मिली न राम…!

यही इतिहास है.

चुनाव जीतना, बार बार जीतना, जितवाना…दरअसल सत्य ईमान का पुतला, याने मर्यादा पुरुषोत्तम बन जाने का सबूत होता है. यह सबक हमने टीवी पर सीखा। ऐंकर चीखता है अगर मौजूदा सरकार की नीति और उसके लोग इतने ही गलत हैं, तो भला जनता उन्हें बार बार चुनाव क्यों जितवा रही है ???

यही सवाल मैं अतीक अहमद के विरोधियों से पूछता हूं क्योंकि आख्रिकार अतीक अहमद के के पास जनता के दिये हुए जितने निर्वाचन सर्टिफिकेट रखे हैं, उनकी गणना प्रधानसेवक, ग्रूह सेवक और राज्य के मुख्यसेवक को मिले सर्टिफिकेट से ज्यादा हैं.

इस पर भी प.पू. अतीक जी अहमद पर माफियागिरी और अपराध का आरोप शांत नहीं होता तो आखिर अतीक अहमद की गलती क्या थी ??

गहन विश्लेषण के बाद समझ आया कि अतीक जी के पास संगठन नहीं था. एक अच्छा प्रचार सेल और डेडिकेटेड कार्यकर्ता नहीं थे. जनता न नीति देखती है, न अपना सुख-दु:ख, न छवि, न आपराधिक इतिहास.

वोट खराब नहीं करती इसलिए जीत की संभावना देखती है. वो संगठन, माहौल, कार्यकर्ता देखती है, उसकी मेहनत देखती है, पसीज जाती है.

संगठन, मीडिया, पैसा, होते आज व्हाट्सप में अतीक के एक-एक लोमहर्षक कांड को न्यायपूर्ण कार्यवाही बताकर छवि उज्ज्वल कर दे सकती थी. जहां भी उसने हथियार उठाये, उसके पहले की एक कहानी बता देती कि यह हमला तो मजबूर प्रतिक्रिया थी, क्रिया नहीं थी.

क्रिया-प्रतिक्रिया के कारनामे वाले नेता ही इस दौर में सशक्त करार दिए जाते हैं. साफ-सुथरी, गैर आपराधिक पृष्ठभूमि हो तो वह पप्पू होता है, सांसदी के अयोग्य करार दिया जाता है. हमारा इलेक्टोरेट हत्यारों को, कानून का मजाक बनाने वालों को पसन्द करता है. सर माथे बिठाता है, बार बार चुनता है.

बस नेता को गरीब परिवार से उठा होना चाहिए. अतीक भी गरीबी से उठे, परिवार से उठकर संघर्ष किया, मगर सरकार न बना सके.

सरकार बना लेते तो उन्हें अप्रशिक्षित सड़क छाप शोहदों की जरूरत न होती. पूरा संवैधानिक तन्त्र, उनके माफिया तन्त्र का कारिंदा बन जाता. अकादमी से प्रशिक्षित सरकारी सेवक उनके लिए छिनैती, फ्रॉड, कब्जा, दादागिरी, धमकीबाजी, अपहरण (आप कस्टडी कह लें) का काम करते. वह भी सरकारी खर्चे पर… निष्ठा के साथ करते. अतीक इस स्तर तक न जा सका, यही उसकी गलती थी.

अस्सी से नब्बे का दौर अपराधियों को राजनीति में लाने का था. लगभग हर दल ने उनको जोड़ा, सहयोग लिया, और जमकर सीटें गिनी, सत्ता छानी. यह लोकतंत्र कीे चोरी थी, संविधान से अपराध था, मगर निम्न कोटि का है.

आगे राजनीति का अपराधीकरण हुआ. अपराधी मंत्री बने, प्रशासन सम्हालने लगे. यह भी गलत था, मगर यह अपराध भी मध्यम कोटि का ही था.

सबसे बड़ा अपराध है संवैधानिक तंत्र को एक विशाल निजी माफिया में बदल देना. पूरी व्यवस्था जब अपने पक्ष को फायदा देने के किए माफियाओं के तरीके अपनाने लगे, विधि व्यवस्था का सलेक्टिव इस्तेमाल करे, तो उसमें और माफिया में क्या फर्क ?

जो साथ हों, उन्हें अभय, क्षमा, पुरस्कार… और जो विरुद्ध, उनको मौत !!! यही तो माफिया डॉक्ट्रिन होती है.

माफिया डॉक्ट्रिन, मौजूदा तन्त्र की ड्रायविंग फोर्स है. गैंग बदल कर शरणागत होने वाले सुपूजित है, चैंलेंजर्स का फिजिकल और पोलिटिकल एससिनेशन हो रहा है.

इसमे हमें बुराई नहीं दिखती, बल्कि हम तो चीयरलीडर हैं. समाज आल्हादित है, इसमें हमारी खुशी है तो तय रहा कि संविधान की ताकत को तोड़ मरोड़ कर उपयोग करने वाला रहा माफिया, अब कहीं नहीं जा रहा. वो यहां है, और रहेगा.

इसलिए जब खबर सुनी कि अतीक मारा गया…तो मैंने विश्वास नहीं किया. आप भी नहीं करेंगे, जब आंखें खोलकर देखेंगे. अतीक राज कर रहा है…और वह बेताज बादशाह भी नहीं.

उसके सर पर बाकायदा ताज रखा है. वह अट्टहास कर रहा है, वह जानता है कि जनता उसकी मुरीद है इसलिए वह निश्चिंत है. आप भी रहें … क्योंकि आयेगा, तो अतीक ही.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

मायका…!

Next Post

जब मैं मरूंगा…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

जब मैं मरूंगा...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

फासिस्ट मोदी सत्ता का एजेंडा – मंदिर और सीएए

March 6, 2024

भेड़िया गुर्राता है तुम मशाल जलाओ !

May 28, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.