Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मिटता हुआ यूक्रेन, अस्त होता नाटो

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 8, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मिटता हुआ यूक्रेन, अस्त होता नाटो
मिटता हुआ यूक्रेन, अस्त होता नाटो

रूस यूक्रेन युद्ध के दरमियान एक ताजा हास्यास्पद घटना घटी है, जिसके तहत अब पूरी दुनिया को पता लग चुका है कि यूक्रेन के पास हथियारों की न केवल भारी किल्लत है, बल्कि इससे यह भी साफ अंदेशा लग रहा है कि अमरीका और नाटो देशों ने किस तरह से यूक्रेन को हथियारों की मदद देने का झांसा देकर तबाह कर दिया है.

हुआ ये कि यूक्रेनी सैनिकों के पास अब आत्मरक्षा तक के लिए हथियार नहीं हैं. रूसी रक्षा विभाग की तरफ से वारजोन के बीच का एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें यूक्रेनी सेना को एके-47 से रूसी ड्रोन व रूसी फाइटर जैट पर गोलियां चलाते देखा जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय युद्ध विरोधी मीडिया ने चुटकी लेते हुए कहा कि ‘ये जेलेंस्की की सेना की सुई से हाथी को मारने की आत्मघाती जिद है.’

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

भारतीय रक्षा विभाग के एक पूर्व जनरल ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नाटो और अमरीका यूक्रेन को अब हथियार देने के नाम पर सिर्फ कोरे आश्वासन ही दे रहे हैं क्योंकि रूस यूक्रेन युद्ध के चलते कई नाटो देश अब किनारा कर चुके हैं और बचे हुए नाटो देशों में भी यूक्रेन को हथियार देने के नाम पर भारी दरार देखी जा रही है.

उधर वारजोन से एक और सरप्राइज़ खबर ये है कि रूस ने बीते दिन में बाल्टिक सागर के ऊपर अपने बाम्बर विमान उड़ा दिए हैं जबकि बाल्टिक सागर पर अमरीका न केवल अपना दावा ठोकता है बल्कि अमरीकी परमाणु पनडुब्बियां व युद्ध पोत तक इस सागर पर तैनात हैं.

बताया जा रहा है कि रूस के इस कदम से पेंटागन पिछले पूरे तेरह घंटे तक बेहद डरा हुआ राष्ट्रपति बाइडन से संपर्क पर था लेकिन नाटो व अमरीकी सेना, रूसी बांबरों को ट्रैक करने से अलावा कुछ न कर सकी. बताते चलें कि अगले चार दिन बाद यानि 11 जुलाई को यूरोपीय देश लिथुआनिया में नाटो देशों की आपात बैठक होने जा रही है.

संभावना जताई जा रही है कि इस बैठक में इस बात पर सहमति बनाई जायेगी कि सभी नाटो देश रूस पर एक साथ हमला करें. इसलिए रूस ने इस समय यूक्रेन पर क्लस्टर बम छोडकर ये बता दिया है कि नाटो देशों ने अगर रूस के खिलाफ कोई साजिश रची तो इस क्लस्टर बम को परमाणु युद्ध का शंखनाद समझें.

यूक्रेन वारजोन से एक और हास्यास्पद रिपोर्ट ये आई है कि अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने खुलासा किया है कि यूक्रेन के काउंटर अफेंसिव के दिन से यानी कि 4 जून के बाद यूक्रेनी हथियार भंडार से दस हजार हथियार गायब हो चुके हैं. यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हथियारों पर डाका डालने के लिए जहां एक ओर इसे रूसी सेना की कारगुज़ारी करार दिया है तो वहीं दूसरी ओर रूसी रक्षा विभाग ने इसे नाटो व पश्चिमी मीडिया की लफ्फाजी कहा है.

रूसी रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूक्रेन में जिन दस हजार हथियारों के गायब हो जाने की अफवाह है, दरअसल वो हथियार नाटो व अमरीका ने यूक्रेन को या तो दिये ही नहीं थे या फिर यूक्रेनी सेना ने वो हथियार समुद्र में फेंक दिए हैं, क्योंकि यूक्रेनी सेना नाटो देशों द्वारा जीर्ण क्षीर्ण पुराने हथियार दिए जाने से नाराज़ थी.

बहरहाल, युद्ध जारी है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटे में रूसी सेना ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बारूदी कोहराम मचा रखा है. बताया जा रहा है कि राजधानी कीव में राष्ट्रपति भवन व अन्य मंत्रालयों की सुरक्षा, अमरीकी ह्वाइट हाउस की तरह सख्त कर दी गई है. हालांकि बैगनर ग्रुप के चीफ प्रिगोजिन ने कहा है युद्ध के समय हर जगह की सुरक्षा राष्ट्रपति भवन के बराबर ही होती है. हमारे सैनिकों के लिए यूक्रेन में कुछ भी अभेद्य नहीं है.

दूसरी तरफ न्यूक्लियर अटैक की संभावना भी बनी हुई है. जर्मनी ने यूक्रेन में रूस के क्लस्टर बम छोड़े जाने पर सख्त नाराजगी जाहिर की है लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने दो दिन पहले ही एक युद्धपोत को रूसी सैन्य बेड़े में शामिल करने वाले समारोह में कहा था कि –

‘इस युद्ध में हमारे जांबाज सैनिकों ने जो प्रदर्शन किया है, उसे रूसी संप्रभुता कभी नहीं भूल सकेगी. लेकिन शहीद सैनिकों के परिवार जो भावनात्मक युद्ध लड़ रहे हैं, रूस उनके इस वेदना की घड़ी में उन शहीद परिवारों के साथ खड़ा है. कोई भी संप्रभु देश अपने नागरिक जीवन को बदहाल नहीं बना सकता. हमने सभी आख़िरी कोशिशें पूरी कर ली हैं. यकीन कीजिए रूस आपका है और आप इसमें फतह हासिल करने जा रहे हैं.’

राष्ट्रपति पुतिन के इस आयोजन में कही गई एक बात ‘हमने सभी आख़िरी कोशिशें पूरी कर ली हैं’ पर नाटो व अमरीका की सांस अटक गई है. रूसी खुफिया विभाग केजीबी के एक पूर्व अधिकारी ने बताया है कि पुतिन झूठ नहीं बोलते हैं.

केजीबी के पूर्व अधिकारी के इस बयान पर पोलैंड के समाचार पत्रों ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया और चीन के परमाणु बमों की दर्जनों खेपें मास्को पहुंच चुकी हैं. समाचारों में दावा किया गया है कि पुतिन अपना परमाणु ट्रिगर दबायें और किम जोंग और जिनपिंग को खबर न हो ऐसे मुगालते में नाटो और अमरीका नहीं है और न ही किसी देश को रहना चाहिए.

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पहले ही कहा था कि हमारी लड़ाई यूक्रेन के साथ नहीं है बल्कि यूक्रेन को मदद करने वाले रूस के शत्रु पश्चिमी यूरोपीय देशों से है. पुतिन यही चाहते थे कि नाटो बेनकाब होकर रूस से सीधे युद्ध करे. आखिर नाटो को अपनी कथित मानवतावादी केंचुली को फेंकने के लिए पुतिन ने इस कदर मजबूर कर दिया कि अगली 11 – 12 तारीख को पूरी दुनिया, कम से कम यूरोप के लिए सांसें अटक जाने वाला समय से कम नहीं होगा.

सबसे बड़ी बात पुतिन को नाटो अमरीका की किसी भी गीदड़ भभकी की रत्ती भर भी परवाह नहीं है. जेलेंस्की पर नाटो का आरोप है कि उसकी सेना नाटो के हथियारों को खराब कर नाटो को बदनाम कर रही है. अंतरराष्ट्रीय युद्ध विश्लेषकों के अनुसार नाटो अपनी पूरी ताकत रूस पर झोंकने की बचकानी हरकत नहीं करेगा, अगर ऐसा होता है तो चीन व उत्तर कोरिया सहित 40 देश, नाटो व अमरीका को किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे …. और …. तीसरे विश्व युद्ध का महाविध्वंस लगभग तय है.

  • ऐ. के. ब्राईट

Read Also –

नाटो और अमरीका का सरेंडर ही अब परमाणु युद्ध से पृथ्वी को बचा सकता है
रुस-यूक्रेन युद्व में अमरीका ने सबको फंसा दिया है
किसी भी कीमत पर मानवता के दुश्मन अमेरिकी साम्राज्यवाद और नाटो को ध्वस्त करे रुसी और दुनिया की जनता
अमेरिकी साम्राज्यवाद को अब ही उसे रुस के रुप में वास्तविक चुनौती मिली है
जेलेंस्की के खिलाफ रुसी कार्रवाई में पश्चिमी मीडिया के झूठे प्रोपेगैंडा से सावधान
अमेरिका का मकसद है सोवियत संघ की तरह ही रुस को खत्म कर देना
आखिर क्यों यूक्रेन पर आक्रमण करना रुस के लिए जरूरी था ?
भारत नहीं, मोदी की अवसरवादी विदेश नीति रुस के खिलाफ है
नवनाजी यूक्रेन, अमेरिकी साम्राज्यवाद और नाटो गैंग के खिलाफ ‘जंग’ का एक साल
यूक्रेन युद्ध का क्या परिणाम होगा – तीसरा विश्वयुद्ध या जलेंस्की वध ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

रोजा लक्जमबर्ग : एक अद्वितीय विश्व क्रांतिकारी नायिका

Next Post

वो तानाशाह है…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

वो तानाशाह है...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कॉमरेड हिडमा और 6 अन्य माओवादी कार्यकर्ताओं को पकड़ कर निर्मम हत्या की निंदा करें !

November 22, 2025

किंचित परिवर्तन

February 27, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.