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अमेरिकी साम्राज्यवाद को अब ही उसे रुस के रुप में वास्तविक चुनौती मिली है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 28, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
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Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

परसों अमेरिका के 6 मालवाहक विमान हथियार लेकर पोलैंड की धरती पर उतरे. ये हथियार रूस के विरुद्ध उपयोग होंगे. इन्हें पोलैंड से यूक्रेन भेजा जाएगा. इस बीच रूस ने यूक्रेन को लगातार हथियार भेजे जाने पर अमेरिका व ब्रिटेन को गम्भीर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है, साथ ही पोलैंड को गैस सप्लाई भी रोक दी है क्योंकि पोलैंड ने गैस सप्लाई के बदले रूबल में भुगतान करने से इंकार कर दिया. ब्रिटेन व अमेरिका लगातार यूक्रेन को घातक हथियार भेजते रहे है.

वहीं कल ब्रुसेल्स में यूरोपीय यूनियन सहित 39 देशों ने एक बैठक कर यूक्रेन युद्ध की समीक्षा की व हर महीने इस तरह की बैठक करने का निर्णय लिया. इस तरह इस युद्ध में अब एक तरह से सभी डिप्लोमेटिक चैनल भी बन्द हो गए व यह युद्ध भी गम्भीर चरण की तरफ बढ़ चला. उधर रूस अपनी गोपनीय कूटनीति के अनुसार दक्षिण व पूर्व यूक्रेन में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए चल पड़ा.

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पश्चिम लगातार रूस पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा रहा है तो वे ही प्रतिबन्ध घुम फिरकर पश्चिम के विरुद्ध लग रहे है. रूसी मुद्रा प्रतिबंधों के बावजूद अमेरिकन डॉलर, यूरो व ब्रिटिश स्टर्लिंग के मुकाबले मजबूत हो रही. पश्चिम द्वारा यूक्रेन को नियमित हथियारों की सप्लाई को देखते हुए इस युद्ध के और अधिक फैलने व पोलैंड पर रूस के हमले से इंकार नही किया जा सकता. लगातार यूक्रेन को बेसुमार आधुनिक हथियार दिए जा रहे हैं व नाम यह लिया जा रहा है कि यह यूक्रेन को सहायता के रूप में दिए जा रहे हैं.

पश्चिम दरसअल दुनिया के सामने यह नहीं कह रहा है कि वह स्वयं यूक्रेन के नाम पर युद्ध लड़ रहा है. 2014 में यूक्रेन तख़्तापलट के बाद CIA ने ISIS की तर्ज पर यूक्रेन में एक सेना गठित की थी जिसका नाम अजोव सेना है. इस सेना ने नाजी हत्यारों को महिमामंडन कर पूर्व यूक्रेन में लगभग 14 हजार रूसी मूल के नागरिकों की हत्या की थी. इस नव नाजियों के समूह में CIA ने अलग अलग देशों के भाड़े के सिपाही भर्ती किये व उन्हें ट्रेनिंग दी गई.

इस नाजी सेना का मुख्यालय मर्यापुल शहर में है व साथ ही खरकोव, गेर्सन, सुमि, कीव व लीव में इसके मजबूत ठिकाने हैं. यूक्रेन सेना की रीढ़ ही अजोव सेना है व जब तक इस सेना को तहसनहस नहीं किया जाता तब तक रूसी सेना भी अजेय नहीं होगी. यह युद्ध जिस मोड़ पर पहुंचा है व जिस तरह के प्रतिबंध रूस के विरुद्ध लगे हैं उससे लग रहा है कि युद्ध जल्द ही समस्त यूरोप को अपनी जद में ले लेगा. अब तक पोलैंड के अलावा ब्रिटेन ही खुलकर रूस के विरुद्ध सामने आया है.

इटली, फ्रांस व जर्मनी खुलकर ब्रिटेन व पोलैंड की तरह रूस के खिलाफ सामने नही आ रहे हैं. अमेरिका की चाल है कि रूस के विरुद्ध किसी समय सोवियतों के भाग रहे व समाजवादी मुल्क रहे देशों को ही भिड़ा दिया जाय. इसी चाल की कड़ी में अभी हाल ही में पिछले सप्ताह लातविया, जॉर्जिया, एस्टोनिया , लिथुआनिया आदि 4 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को अमेरिका ने यूक्रेन भेजा था ताकि रूस इन पर हमला करे.

पश्चिम के बाहर के लोग अमेरिका की इस चाल को समझ रहे हैं मगर पोलैंड जैसे पूर्व समाजवादी देशों के राष्ट्राध्यक्ष यह नहीं समझ रहे हैं. अमेरिका चाहता है कि पश्चिम के मजबूत देशों को युद्ध से बचा लिया जाय, जिससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था को नुकसान ना हो व पूर्व समाजवादी देश यूक्रेन की भांति लड़ भिड़ मरे. सोवियतों के विघटन व समाजवादी गणराज्यों के बिखरने के बाद यह देखा गया है कि स्वतंत्रता, समानता, प्रेम, भाईचारे व सहअस्तित्व के मूल्यों को जबरदस्त आघात लगा है व हथियारों की होड़ अचानक बढ़ गई है.

जिन मूल्यों व आदर्शो को लेकर फ्रांसीसी क्रांति हुई, पश्चिम में पुनर्जागरण हुआ व रूस में अक्टूबर क्रांति हुई वे मूल्य आचानक धूलधूसरित हो गये. रीगन व गोर्बाचेव के मध्य हथियारों की होड़ को बंद करने हेतु जो संधि हुई थी जिससे आशा बंधी थी कि अमेरिका व सोवियत अब नए हथियार नहीं बनाएंगे मगर अमेरिका ने इस संधि को अपनी जीत मानकर ना केवल टूटी सोवियतों में नियंत्रण करना चाहा बल्कि रूस पर लगातार युद्ध थोपे व उसे चारों तरफ से घेरा.

अमेरिका ने उसके बाद निरन्तर उदार लोकतांत्रिक मुल्कों को बर्बाद किया, युद्ध थोपे व गृह युद्ध भड़काए. पूरे तेल क्षेत्र में नियंत्रण के बाद वह रूस की छाती पर चढ़कर बैठा. आज अगर रूस अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए यूक्रेन में युद्ध मैदान में आ डटा है तो उसके पीछे अमेरिका व पश्चिम की इस छल कपट व आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण की राजनीति को दोषी मानना चाहिए. पश्चिम इससे पहले अफगानिस्तान, इराक, लीबिया व सीरिया में कामयाब होता रहा मगर अब ही उसे वास्तविक चुनौती मिली है.

बुधवार को सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी सांसदों को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा- ‘बाहर (यूक्रेन में) जो हो रहा है अगर कोई उसमें दखलअंदाजी करने का इरादा रखता है, तो उन्हें पता होना चाहिए ये रूस इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा. जो कोई भी रूस को धमकी देगा उसे हम बिजली की तेजी से और घातक तरीके से जवाब देंगे. हमारे पास ऐसे हथियार जिन पर कोई और घमंड नहीं कर सकता.

‘हमारे पास इसके लिए सभी जरूरी हथियार हैं. हमारे पास ऐसे हथियार भी हैं जिन पर कोई और घमंड नहीं कर सकता. हम उनके बारे में शेखी नहीं बघारना चाहते, लेकिन हम उनका इस्तेमाल करेंगे. यूक्रेन के मामले में दखलअंदाजी करने वाले देश अगर हमें धमकी देते हैं तो रूस परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से भी हिचकिचाएगा नहीं.’

एक बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फिर दुनिया ब्यापक व गहरे युद्ध में फंसी है जिसने लोकतंत्र व मानव व्यवहार की मूल कमजोरी को सामने ला दिया है, जिसमें पूरी व्यवस्था की रचना ही बेलगाम व स्वतंत्र व्यक्ति करता है व उसे अपनी इच्छानुसार चलाता हैं.

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