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नाटो के हर बयान में अफसोस और खून के आंसू

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 1, 2023
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नाटो के हर बयान में अफसोस और खून के आंसू
नाटो के हर बयान में अफसोस और खून के आंसू

अमेरिकी पालतू नाजी जेलेंस्की और उसकी सेना का असली घृणास्पद चेहरा आये दिन और ज्यादा साफ होता जा रहा है. एक ओर तो वह रुस के आम नागरिकों के ऊपर हमला कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी सेना आम युक्रेनी नागरिकों के उपर भी हमला कर रही है, यहां तक की युक्रेनी महिलाओं पर भी हमला कर रही है और विरोध करने पर सीधे गोली मार रही है.

वायरल वीडियो के अनुसार यूक्रेन के निप्रो में युक्रेनी सेना एक महिला को कार से खींचकर बाहर निकाल रही है और उनके साथ अभद्रता से पेश आ रही है. जब उस महिला के पति ने उसका विरोध किया तो उस सैनिकों ने उनके पति को सीधे गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया. ऐसी हैवानियत यूक्रेन में आम हो गई है.

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पिछले दिनों एक विडियो वायरल हुई थी कि जिसमें युक्रेनी सेना आम युक्रेनी नागरिकों को जबरन घरों से खींच खींच कर फौज में भर्ती कराने का कोशिश कर रही थी और उस घर में कोहराम मचा हुआ था.

यही कारण है कि यूक्रेन की आम नागरिक इस युद्ध में रुसी सेना का सबसे बड़ा समर्थक बन गई है. यूक्रेन के ये आम नागरिक न केवल युक्रेनी सैन्य ठिकानों का पता रुसी सैनिकों तक पहुंचा रही है अपितु कई बार तो वह स्वयं नरभक्षी युक्रेनी सैनिकों पर हमला भी कर रही है. यह है नाजी जेलेंस्की के खिलाफ यूक्रेन की आम जनता का गुस्सा.

विदित हो कि राजनीतिक और सांस्कृतिक तौर पर यूक्रेन की जनता दो स्पष्ट रुप में विभाजित है, जिसमें यूक्रेन का पूर्वी हिस्सा सोवियत संघ की समाजवादी चेतना से प्रभावित है तो वहीं पश्चिमी यूक्रेन का हिस्सा हिटलर की नाजी हुकूमत से प्रभावित है. इसी पश्चिमी हिस्से के यूक्रेन के नाजीवाद स्वरूप का पक्षपोषण अमेरिकी साम्राज्यवाद और नाटो गिरोह कर रहा है. और जेलेंस्की इसी नाजी हिटलर गिरोह का वर्तमान प्रतिनिधि है.

विदित हो कि हिटलर का भी पक्षपोषण अमेरिका और ब्रिटेन ने किया था और आज उसके वर्तमान प्रतिनिधि जेलेंस्की का कर रहा है. सोवियत संघ का एक बड़ा टुकड़ा रुस के सैनिक आज भी यूक्रेन के आम नागरिकों को निशाना बनाने से बच रहा है वहीं नाजी सरगना जेलेंस्की लगातार अपने और रुस के आम नागरिकों को निशाना बना रहा है. ऐसे में जहां समूची दुनिया में जेलेंस्की निंदा का पात्र बन गया है वहीं उसका सहयोगी अमेरिका और नाटो भी भयानक आलोचनाओं का शिकार बन गया है.

अन्तर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार ऐ. के. ब्राईट जेलेंस्की, नाटो और अमेरिकी साम्राज्यवाद के इस नापाक गठबंधन का पर्दाफाश करते हुए लिखते हैं कि रूस यूक्रेन युद्ध एक ऐसे भयावह मोड़ पर आ चुका है जहां यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को हर तरफ से अपनी तबाही होती दिख रही है. पिछले 24 घंटे में यूक्रेन के लगभग 2800 सैनिकों की मौत हो चुकी है. अपने काउंटर अफेंसिव में आखिरी दांवपेंच भिड़ा रहा यूक्रेन अब दुनिया के नक्शे पर बारूदी कहर के गर्भ से निकला महज वीरान खंडहरों के किले में तब्दील देश हो चुका है.

जेलेंस्की नाजी मानसिकता का समर्थक है. उसने यूरोपीय देशों के नाजी अलगाववादियों को यूक्रेन युद्ध में साथ देने की अपील भी की है. परसों 29 अगस्त को सुबह 4 बजे जेलेंस्की ने वो गलती कर दी जो न केवल तीसरे विश्व युद्ध की वज़ह बनने जा रहा है बल्कि जेलेंस्की जिस आधे यूक्रेन के राष्ट्रपति बचे हैं, वो हिस्सा भी छोड़ जेलेंस्की अब राजनीतिक दरबदर होने जा रहे हैं.

29 अगस्त की सुबह यूक्रेनी सेना ने लगभग 2 दर्जन ड्रोनों के साथ रूस के पेस्कोव शहर पर हमला बोल दिया, जिसमें पेस्कोव एयर बेस पर खड़े 4 ट्रांसपोर्ट विमान पूरी तरह से तबाह हो गए और लगभग 5 कामर्शियल ट्रक भी ध्वस्त हो गए. यूक्रेन के रूस पर इस अटैक के महज 1 घंटे बाद यूक्रेन की राजधानी कीव, बारूदी धमाकों से इस कदर दहल उठी कि नाटो देशों के भी होश फाख्ता हो गए.

कीव में हुए रूसी हमलों में नाटो देशों से मिले 128 टैंकों के परखच्चे उड़ गए और 1700 यूक्रेनी सैनिकों को जान से हाथ धोना पड़ा. लगभग 458 यूक्रेनी सैनिकों के आत्मसर्मपण की भी खबर है. कल 30 अगस्त को रूसी सेना ने यूक्रेन के एक मिलिट्री ट्रेन जिस पर लगभग 14 टैंक जिसमें जर्मन लेपर्ड व अमरीकी पेट्रियट टैंक लदे होने की खबर है, को रूसी मिसाइल का शिकार होना पड़ा. यूक्रेनी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाटो से मिले पुराने हथियारों पर कहा कि ‘हमें नाटो से मिले हथियारों से जीत नहीं धोखा मिला है.’

एक और दिलचस्प खबर ये है कि नाटो सदस्य देश हंगरी ने अपने ही नाटो संगठन को युद्ध की धमकी दे दी है जिससे अमरीकी राष्ट्रपति जो-बाइडेन के चेहरे पर साफ शिकन के भाव देखे जा सकते हैं. हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सेज्जाटो ने साफ कह दिया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दरमियान उसके गैस पाइप लाइनों को खरोंच भी आई तो हंगरी नाटो देशों को बख्शेगा नहीं.

पीटर सेज्जाटो ने कहा कि ‘हमें फ्रांस की तरह नाटो की जी हुजूरी व चुप रहने वाला मत समझना.’ ज्ञात हो कि अमरीका ने अपने ही नाटो सदस्य देश फ्रांस की एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर सेंध लगाकर उसे शुरू करने से पहले ही बुरी तरह दुष्प्रचारित कर छिन्न भिन्न कर दिया.

फिलहाल ‘रूस आपरेशन Z’ पर ध्यान दें रहा है, जिसके तहत पुतिन संभावित तीसरे विश्व युद्ध में रूस की सीमाओं पर नाटो देशों की सैन्य गतिविधियों का मतलब और परिणामों पर बहस करने में मशगूल हैं. पोलैंड और लिथुआनिया के मध्य पड़ने वाले ‘सुआलकी गैप’ के नजदीक बैगनर लडाके व बेलारूसी सैनिकों का डेढ़ लाख से अधिक सैन्य जत्था पुतिन व अलेक्जेंडर लुकाशेंको के आदेश के इंतजार में हैं.

क्रेमलिन के एक अधिकारी ने बताया है कि पोलैंड में रूसी सैन्य कार्रवाई शुरू हो चुकी है. नाटो सदस्य देश हंगरी के विदेश मंत्री ने साफ कह दिया है कि ‘रूस यूक्रेन युद्ध की समाप्ति नाटो संगठन पोलैंड की बलि चढ़ाकर करेगा.’ बहरहाल, युद्ध जारी है और युद्ध के बीच से सिर्फ खूनी ध्वनियां उठती हैं.

इसी कड़ी में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया को नाटो व अमरीकी से नजदीकी रखने पर चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया उसे महज दो घंटे में दूसरा यूक्रेन बना देगा. इस बात में कोई दोराय नहीं कि उत्तर कोरिया, रूस और चीन दक्षिण कोरिया को चंद मिनटों में दुनिया के नक्शे से मिटा देंगे, अमरीका अब सिर्फ खोखली गीदड़भभकी दिखाने वाला देश रह गया है,

खुद अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन के अधिकारी कह रहे हैं कि अमरीका रूस से आर-पार की लडाई नहीं जीत सकता. समय समय पर सीआईए से लीक होते रहे दस्तावेजों को सही मानें तो सीआईए के मुताबिक नाटो का कोई भी देश, यहां तक कि अमरीका भी रूस से लड़ाई मोल लेने पर सौ बार सोचेगा क्योंकि पुतिन का ‘युद्ध-इतिहास’ गवाह है कि एक बार जो पुतिन से भिड़ गया उसे पुतिन किसी भी हालत में सोचने लायक नहीं छोड़ते.

हालांकि अमेरिका एक दोगला चरित्र का देश है. दिखावे के लिए जेलेंस्की को रूस के अंदर हमला करने पर नाराजगी जाहिर करता है लेकिन अगले ही पल वह जेलेंस्की को और अधिक दूर तक मारक क्षमता वाले मिसाइल देने की घोषणा भी करता है.

दरअसल अमरीका व अमरीकीपरस्त नाटो देश मजाक मजाक में यूक्रेन को रूस की खिड़कियों पर पत्थर मारने के लिए उकसा बैठे लेकिन उन्हें ये अंदाजा नहीं था कि पुतिन को अपने घर के आंगन पर अजगर के लावारिस बच्चों की उछलकूद बिल्कुल पसंद नहीं है और न ही नाटो देशों को इसका अंदाजा था कि पुतिन सबको एक ही यूक्रेनी बिल में फंसाकर सबका ‘जेलेंस्की’ बना देंगे.

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क्या मोदी सरकार रुस से संबंध खराब कर रही है ?

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