Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

नवनाजी फासिस्ट जेलेंस्की और 31 देशों के फौजी झुंड नाटो का रुस के सामने अघोषित सरेंडर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 20, 2023
in ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
नवनाजी फासिस्ट जेलेंस्की और 31 देशों के फौजी झुंड नाटो का रुस के सामने अघोषित सरेंडर
नवनाजी फासिस्ट जेलेंस्की और 31 देशों के फौजी झुंड नाटो का रुस के सामने अघोषित सरेंडर

सर्वहारा के सबसे बड़े नेताओं में से एक लेनिन द्वारा निर्मित दुनिया का सबसे बड़े समाजवादी दुर्ग सोवियत संघ को चौथे नेता स्टालिन ने इस्पात की भांति संरक्षित किया था, जिसने पूंजीवादी-साम्राज्यवादी हमलों से सदा के लिए सुरक्षित कर दिया था, लेकिन एक गद्दार युक्रेनी ख्रुश्चेव ने साम्राज्यवादियों के सामने लज्जाजनक तरीके से सर्वहारा राज्य सोवियत संघ को खत्मकर न केवल सरेंडर करा दिया, अपितु उसे 15 टुकड़ों में विभाजित कर दिया.

अब, जब एक बार फिर अमेरिकी साम्राज्यवाद ने सोवियत संघ के एक सबसे बड़े टुकड़े रुस को ध्वस्त करने के लिए 43 टुकड़ों में बांटने की कोशिश में एकबार फिर यूक्रेनी गद्दार नवनाजी जेलेंस्की के कंधों पर सवार होकर जुट गया, तब रुस की जनता राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में साम्राज्यवादी अमेरिका के खिलाफ एकजुट हो गया और गद्दार नवनाजी जेलेंस्की वाली यूक्रेन पर हमला बोल दिया.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

कहना न होगा सोवियत संघ की स्थापना काल से ही यूक्रेन दो हिस्सों में राजनीतिक और सांस्कृतिक तौर पर बंटा हुआ था. पूर्वी यूक्रेन जहां समाजवादी सोवियत खेमे के साथ रहा, वहीं पश्चिमी यूक्रेन साम्राज्यवादी खेमे के साथ था और द्वितीय विश्वयुद्ध में फासिस्ट हिटलर का फुट आर्मी बनकर समाजवादी सोवियत संघ पर जबरदस्त हमला बोला था, जिसे सोवियत संघ की लाल सेना ने महान नेता स्टालिन के नेतृत्व में धज्जियां उड़ा दी थी.

यहां यह बताना समीचीन होगा कि सोवियत संघ युग में गठित केजीबी जैसी अंतरराष्ट्रीय जासूसी संस्था विश्व में सबसे ताकतवर जासूसी संस्था है. खबर के अनुसार आज समूची दुनिया में केजीबी (अब उसका नाम बदल दिया गया है) के करीब 7 लाख जासूसों का विशाल फौज मौजूद है, जो सारी सूचनाएं रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पहुंचा रही है. हालत यह है कि नाटो के अधिकारी, ब्रिटिश के रक्षा मंत्रालय और युक्रेनी मंत्रालय तक रुस के जासूसों की जद में है. यूक्रेन विवाद पर अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक मामलों के जानकार ऐ. के. ब्राईट लिखते हैं –

  • उत्तर कोरिया से एक विशाल जंगी जहाज पर लदे अत्याधुनिक हथियारों की खेप मास्को कूच से नाटो में हड़कंप.
  • पुतिन के ईरान से 1400 ड्रोन जल्दी भेजने की खबर लीक होने पर सीआईए ने ह्वाइट हाउस को दी चेतावनी.
  • क्यूबा वियतनाम का संयुक्त अत्याधुनिक आपात मेडिकल दस्ता पहुंचा रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में।
  • चीन के 13 समुद्री जहाजों का बेड़ा हाइटेक हथियारों व भारी मात्रा में रसद सामग्री के साथ तैयार पुतिन के आदेश के इंतजार में.

अपुष्ट खबरों के मुताबिक पोलैंड खुफिया विभाग ने नेपाल का एक सैन्य दस्ता भी रूस पहुंचने की बात कही है. फिलहाल नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, हां नेपाल रक्षा विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने यह जरूर कहा है कि ‘नेपाल के रूस से हमेशा दोस्ताना संबंध रहे हैं. ये रिश्ता आगे भी बना रहेगा.’ नेपाल के पूर्व रक्षा अधिकारी के इस बयान का क्या मतलब निकाला जाए, इस पर हर किसी की मति गच्चा खा रही है.

बहरहाल, 15 और 16 अगस्त को यूक्रेन पर रूसी सैनिकों की ताबड़तोड़ बमबारी ने नाटो के होश फाख्ता कर दिये हैं. इस दरम्यान रूसी सैनिकों ने यूक्रेन के सोलेदार इलाके में महज 3 घंटे में 2200 यूक्रेनी सैनिकों को ढेर कर दिया और सोलेदार में तैनात नाटो के लगभग 70 फीसदी सभी कैटगरी के हथियारों को अपने कब्जे में ले लिया. यह दृश्य इतना भयावह था कि लगभग 33 ऐसे टैंक जिस पर नाजी-नाटो घमंड करता है, रूसी सेना को वो एकदम लावारिस हालत पर मिले यानी, यूक्रेनी सैनिक टैंक छोड़कर या तो भाग रहे हैं या फिर खुद को गोली मार ले रहे हैं.

हालांकि पुतिन ने यूक्रेनी सैनिकों से आत्महत्या न करने की अपील की है और उन्हें अच्छा जीवन जीने की सहुलियत देने का भी वादा किया है. नाटो के वरिष्ठ अधिकारी ने रूसी सेना पर आरोप लगाया है कि उनके सभी फाइटर जेट को रूसी सेना जैमर से सेंसरलेस कर रही है, जिससे वो टारगेट को हिट करने से पहले ही इलेक्ट्रॉनिक बाइपास सूचनाओं से महरूम होकर आपात लैंडिंग की हालत पर आ रहे हैं. इस अजीबो-गरीब बयान पर रूसी रक्षा विभाग ने चुटकी लेते हुए कहा है कि – ‘हम समझ सकते हैं नाटो अब कितना ताकतवर रह गया है !’

लगभग 100 ईसा पूर्व स्पार्टाकस जैसे महान योद्धा ने दुनिया को संदेश दिया कि युद्ध दौलत से नहीं, हौसलों से फतह होते हैं, इस बात को हमेशा साम्राज्यवादी मुल्क प्रचारित करने से बचते रहे हैं. 18वीं सदी के औद्योगिक विकास की बुलंद संभावना में आह्लादित विश्व पूंजीवाद ने जब कल-कारखानों का बेड़ा डालकर जघन्यतम सस्ते श्रम की लूट मचाई तो मेहनतकशों के उस त्रासदपूर्ण हाहाकार में स्पार्टाकस की घोषणा सन्दर्भहीन होती प्रतीत हुई, लेकिन स्पार्टाकस के बाद एक और महान घटना पेरिस कम्यून ने एक बार फिर यह साबित किया कि संगठित हौसलों से ही दुनिया में एक शक्तिशाली न्यायिक जन-व्यवस्था स्थापित हो सकती है.

और 18वीं सदी के उत्तरार्द्ध में कार्ल मार्क्स ने परिवर्तन की संभावना पर अवश्यंभावी वैज्ञानिक राजनीतिक दर्शन जारी कर लुटेरों की मंशा और मंसूबों पर ‘हथौड़ा’ चला दिया और इसी दर्शन ने अक्टूबर क्रान्ति, चीनी समाजवाद, क्यूबा, वियतनाम, उत्तर कोरिया आदि देशों में समाजवाद के अकल्पनीय प्रयोग कर समूची पृथ्वी को न केवल राजनीतिक तौर पर दो खेमों में फाड़ दिया बल्कि उछड़ैल धार्मिक मानवतावाद को नंगा करते हुए विश्व राजनीति में समाजवादी मूल्यों पर दृष्टिघाती हमला कर मन मसोस कर न्यूनतम लोकतंत्रात्मक समीकरणों का भी निर्माण किया, जिसके चलते कम्युनिस्ट देशों ने सर्वांगीण उन्नति के मामले में दुनिया के पूंजीवादी खेमे से बाजी मार ली.

आस्ट्रेलिया, जापान, भारत, नार्वे, अमरीका व तमाम देश जहां के शासकवर्गों ने अपने मुल्कों में अपनी सहुलियत की लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं कायम की, सर्वांगीण उन्नति के मामले में अपने प्रस्थान बिंदु के इर्द-गिर्द ही भटक रहे हैं जबकि उत्तर कोरिया, वियतनाम, क्यूबा, चाइना आदि कम्युनिस्ट देश अपने मुक्ति संग्रामों में जीत हासिल कर महज दो दशकों के भीतर महाशक्तियां बन बैठी हैं. सुरक्षित आर्थिक जीवन स्तर, उन्नत शिक्षा प्रणाली, विचार प्रधान सैन्य विकास के बल पर पूरी दुनिया में इन देशों की तूती बोल रही है.

भूमंडलीकरण के खोखली चुंधियाहट के बीच इस दौर में जब साम्राज्यवादी देशों का औद्योगिक ढांचा मंदी के थपेड़ों से लहुलुहान है, तब दुनिया के हर गरीब को ज़रूरत की सस्ती चीजें जो भी मुहैय्या हो रही है, वो सब समाजवादी मुल्कों से आयातित वस्तुएं हैं. दुनिया में ऐसी कोई फैक्ट्री नहीं है जहां उत्तर कोरिया, चाइना की टेक्नोलॉजी न हो. मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी से लेकर भारी उद्योग निर्माण मशीनों के पुर्जे-पुर्जे पर कम्युनिस्ट देशों के नाम हैं और इन्हीं मानवतावादी देशों के नाम के चलते पुतिन जहां एक ओर चक्रवर्ती सम्राट का ताज हथियाने पर आमादा हैं, वहीं दूसरी ओर 31 देशों का कथित महाशक्ति झुंड ‘नाजी-नाटो’ अपनी अकाल मृत्यु की शैय्या पर आज महज अस्तित्व भर के लिए जूझते हुए खात्मे के कगार पर खड़ा हो गया है.

रुसी राष्ट्रपति पुतिन ने विक्ट्री डे परेड के दौरान अपने संबोधन में कहा कि – यूक्रेन पश्चिमी देशों का गुलाम बन गया है लेकिन हम जानते हैं कि हमें क्या करना है. सर्वोच्चता की कोई भी विचारधारा हमें स्वीकार नहीं है. पुतिन ने यूक्रेन की तुलना नाजियों से की और कहा कि रूसी मातृभूमि के खिलाफ युद्ध छेड़ा गया है. पुतिन पहले भी यूक्रेन और नाजियों की तुलना कर चुके हैं. पुतिन ने कहा कि इस युद्ध का नतीजा ही हमारी मातृभूमि की किस्मत तय करेगा. (अमर उजाला 9 मई 2023)

पुतिन एक मंझे हुए अन्तर्राष्ट्रीय नेता हैं और समूची दुनिया में वही एकमात्र नेता हैं जो ब्लैक बेल्ट धारी हैं. सबसे बड़ी बात पुतिन अखंड सोवियत संघ के कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता रहे हैं. सोवियत संघ विघटन के बाद पुतिन रूसी खुफिया विभाग केजीबी के प्रमुख तक रहे हैं. इस समय रूस यूक्रेन युद्ध में दुनिया की लोकतांत्रिक मीडिया पुतिन को एक ऐसा हीरो साबित कर रही मानो पुतिन अकेले ही नाटो पर नेस्तनाबूद कर देंगे जबकि उत्तर कोरिया और चाइना वरदहस्त के बिना पुतिन रूस-यूक्रेन युद्ध में कबके उखड़ गए होते.

खुद सीआईए ने रिपोर्ट में बताया है कि ‘पुतिन ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद से ही यूक्रेन पर आंख तरेर रखी थी और बहुत ही गुप्त तरीके से यूक्रेन युद्ध के लिए उत्तर कोरिया व चाइना से समर्थन लिया था. 2016 से फरवरी 2020 तक गुप्त तरीके से उत्तर कोरिया, चाइना और रूस के सेनाध्यक्षों की बीजिंग में करीब 13 बार मीटिंग हुई थी.’

पुतिन बार-बार कहते रहे हैं कि हम डालर का राज खत्म कर रूबल या अन्य साझा मुद्रा में व्यापार शुरू करेंगे लेकिन आम मेहनतकश के लिए वो किस तरह का राजनीतिक खाका चाहते हैं, इस पर पुतिन विरोधाभासी बयान देते रहे हैं इसीलिए उत्तर कोरिया और चाइना पुतिन के साथ एक विशेष सीमा तक मदद की बात भी करते हैं.

उत्तर कोरिया, चाइना अब लगभग रूस के साथ प्रत्यक्ष तौर पर आ खडे हुए हैं. चाइना कम्युनिस्ट पार्टी के बीते केन्द्रीय अधिवेशन में इस बात पर सहमति बनी कि नाटो-अमरीका के साम्राज्यवादी खात्मे के लिए चीन रूस को जरूरी मदद मुहैया करायेगा. हालांकि चीनी बुद्धिजीवियों का एक तबका मानता है कि रूस को मदद देने से समाजवादी मूल्यों में पहले से संशोधनवाद से हलकान चीनी समाजवाद असंतुलन की और भी पीड़ादायक स्थिति में जा सकता है.

वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया बिना चाइना वरदहस्त के जापान से भावी युद्ध में अपने को कमजोर मानता है इसलिए चीन के साथ उत्तर कोरिया भी रूस के साथ आ गया है. इन तीनों महाशक्तियों के युद्ध गठबंधन के बाद अब रूस-यूक्रेन युद्ध महज यूक्रेन को जीतने तक हासिल नहीं रह गया है. इनका मकसद है न्यूयॉर्क और लंदन को जमींदोज कर देना. पिछले दो दिनों में बेलारूस और पोलैंड की सीमा पर रूसी तोपों के नाटो अड्डों को टारगेट कर नये धमाकों ने तीनों परमाणु महाशक्तियों को हाई अलर्ट पर रख दिया है.

काम की एक खबर ये भी है कि नाटो देश व अमरीका हर हाल में क्रेमलिन से बात करने की जुगत लगा रहे हैं और नाटो देशों व अमरीका को यह अच्छी तरह मालूम है पुतिन को किंतु परन्तु की भाषा बिल्कुल पसंद नहीं है. मतलब, पुतिन का ‘नाटो को पाटो’ का गेम सक्सेस हो गया. देखना यह होगा कि बिना न्यूक्लीयर टकराव के अगर युद्ध खत्म हो जाता है तो उत्तर कोरिया, चाइना फिर रूस के विस्तारवाद पर कैसे अंकुश लगायेंगे ?

ऐ. के. ब्राईट आगे लिखते हैं – रूस-यूक्रेन युद्ध में मेहनतकशों के लिए कोई जगह नहीं है, सचेतन तौर पर हम यूक्रेनी मेहनतकश अवाम की हर पीड़ा के साथ खड़े हैं, जिसमें इस युद्ध के चलते हजारों लाखों की तादाद में यूक्रेनी नागरिक दूसरे देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए हैं, हजारों बच्चे स्त्रियां व बेकुसूर लोग जान गंवा चुके हैं और आने वाले समय में बचे खुचे यूक्रेन में और भी भयावह दृश्य होने जा रहा है जब परमाणु विस्फोट की महाविभीषिका को समेटे दुनिया के नक्शे से ‘एक था यूक्रेन’ हो जायेगा.

रूस व नाटो दोनों ही विस्तारवादी हैं. हम यूक्रेन या दुनिया के किसी भी हिस्से में न्यूक्लीयर अटैक का विरोध दर्ज करते हैं. हम जापान के हिरोशिमा नागासाकी पर अमरीका के परमाणु विस्फोट के जबाब में रूसी परमाणु विस्फोट का समर्थन नहीं कर सकते क्योंकि युद्ध का नजरिया मानवीय नहीं है, परन्तु वियतनाम, क्यूबा, ईराक, उत्तर कोरिया, चीन, ब्राजील सहित दुनिया के सभी जगहों पर मानवतावादी संघर्षों पर अमरीका के खूनी हस्तक्षेप से उपजे प्रतिशोधी अंतर्राष्ट्रीय जनाक्रोश का पुतिन इस वक्त प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

साथ ही पुतिन ने इसलिए भी इस युद्ध को बहुत रोमांचित बना दिया है कि वो बार-बार कह रहे हैं हम मानवता के शत्रु यूरोपीय देशों को सबक सिखायेंगे. पुतिन के इन शब्दों में कही न कही अमरीका द्वारा सोवियत रूस को तोड़ने की टीस झलकती है और निश्चित तौर पर अमरीका की क्रूर बादशाहत का खात्मा होना ही चाहिए. जो लोग रूस अमरीका को नागनाथ सांपनाथ बता रहे हैं, उनका दुनिया को देखने का बहुत तंग नजरिया है.

यह भारतीय अवसरवादी कम्युनिस्ट पार्टियों का भ्रामक दुश्प्रचार है कि इस युद्ध में रूस के साथ ज्यादा नजदीकी नहीं रखनी चाहिए. भारतीय कम्यूनिस्ट दलों की दलील है कि ‘रूस अपने हथियारों को बेचने के लिए बाजार तलाश रहा है.’ बावजूद रूस यूक्रेन युद्ध जारी है. हम उम्मीद करते हैं रूस इस युद्ध में विजय होगा उत्तर कोरिया चीन भारत दुनिया में मानवतावादी मूल्यों को बहाल करने में नये सिरे से एकजुट होंगे.

Read Also –

स्टालिन : मानवता के महान नेताओं में से एक के 144वें जन्मदिन का जश्न मनाये !
पुतिन को नियंत्रित करती रूसी कम्युनिस्ट पार्टियां
लिथुआनिया नाटो शिखर बैठक से पहले यूक्रेन बाहर : यूरोप को पुतिन और एशिया को जिनपिंग करेंगे कंट्रोल
उत्तर कोरिया, चीन, रूस के चक्रव्यूह में तबाह होते नाटो देश
यूक्रेन युद्ध : अमरीका के नेतृत्व में चलने वाले नाटो को भंग करो
नाटो और अमरीका का सरेंडर ही अब परमाणु युद्ध से पृथ्वी को बचा सकता है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

शिक्षा के खिलाफ अनपढ़ों का मुहिम, अब करण सांगवान निकाले गए

Next Post

भूलने की सजा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

भूलने की सजा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

चेतन भगत जैसे लेखक कारपोरेट के प्रवक्ता बन गए हैं

October 30, 2021

जाकिर हुसैन साहब का भाषण : कोरे शब्द या खोखले उपदेश नहीं

May 3, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.