Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

गांधी की नज़र में सावरकर की माफी !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 2, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
गांधी की नज़र में सावरकर की माफी !
गांधी की नज़र में सावरकर की माफी !
kanak tiwariकनक तिवारी

देश में हो रही उथलपुथल और ऊहापोह के (भी) चलते विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने का इरादा सरकार के इरादे और बहुमत के बावजूद खटाई में तो है. सावरकर ने हिन्दू धर्म की एकल ऐंद्रिकता के ‘हिंदुत्व‘ शब्द का आविष्कार किया. जवानी में मिली कठोर जेल यातनाओं के कारण बर्बर गोरी हुकूमत को लगातार माफीनामे लिखकर कैद से बरी होकर जीवन भर हुकूमत के खिलाफ रहस्यमय ढंग से खामोश रहे. इससे हटकर राष्ट्रपिता की सयानी बुद्धि की नज़र से सावरकर की शुरुआती भूमिका और विचारों को समझना सार्थक होगा. गांधी की हत्या को लेकर सावरकर पर भी लगा आरोप भले ही सिद्ध नहीं हो पाया.

1909 में गांधी इंग्लैंड में रह रहे कुछ भारतीयों द्वारा हथियारों की मदद से अंगरेजी हुकूमत को हटाने की हिंसात्मक लेकिन जरूरी की जा रही चुनौतियों तथा बर्तानवी हुकूूमत की वहशी जवाबी हरकतों के कारण समझाने की कशिश लेकर लन्दन गए. अहिंसा की समझाइश की खारिजी होने पर गांधी बेहद निराश हो गए. श्यामजीकृष्ण वर्मा और सावरकर सहित हिंसक-क्रांति के कई पैरोकार भारतीयों से एक सभा में हिंदुओं के आराध्य राम के जीवन के मूल संदेश पर बहस भी हुई. राक्षसों की हिंसा तक सीमित नहीं करके लोकतंत्र के आदर्श आयामों के आधार पर रामराज्य स्थापित करने की बात गांधी ने सावरकर की सम्मान-सभा में कही थी. उस सभा की अध्यक्षता करने गांधी के अलावा और कोई तैयार नहीं था.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

सावरकर से प्रेरित युवा मदनलाल धींगरा ने अंगरेज अधिकारी कर्नल वाइली की लंदन में सरेआम हत्या कर दी. सावरकर पर कुछ और हिंसक गतिविधियों के लिए फ्रांस से जुगाड़कर हथियार भेजने का आरोप भी था. इस पर खुद गांधी का ही लिखा विवरण पढ़ना बेहतर है –

‘वे काफी समय तक लन्दन में रहे. यहां उन्होंने भारत की आजादी के लिए एक आन्दोलन चलाया. वह एक वक्त में ऐसी हालत में पहुंच गया कि श्री सावरकर पेरिस से भारत को बन्दूकें आदि भेजने लग गए थे. पुलिस की निगरानी से भाग निकलने की उनकी सनसनी फैला देने वाली कोशिश और जहाज के झरोखे से उनका फ्रांसीसी समुद्र में कूद पड़ना भी हुआ. नासिक के कलेक्टर श्री ए.एम.टी. जैक्सन की हत्या के सिलसिले में उन पर यह आरोप लगाया गया था कि जिस पिस्तौल से जैक्सन की हत्या की गई, वह सावरकर द्वारा लन्दन से भेजी गई पिस्तौलों में से एक थी….सन् 1857 के सिपाही विद्रोह पर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी, जो जब्त कर ली गई है. सन् 1910 में उन पर मुकदमा चलाया गया और 24 सितम्बर, 1910 को उन्हें वही सजा दी गई जो उनके भाई को दी गई थी. सन् 1911 में उन पर लोगों को हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया लेकिन इनके विरुद्ध भी किसी प्रकार की हिंसा का आरोप सिद्ध नहीं हो पाया.’

यह अलग बात है कि इसके बाद सावरकर को माफीनामे लिखकर अंगरेज सल्तनत से अंदमान की कठिन जेल सजा से 1921 में और 1924 में पूरी रिहाई मिली. सावरकर बंधुओं के माफीनामे के बावजूद काफी अरसा तक ब्रिटिश हुकूमत द्वारा उन्हें नहीं रिहा करने को लेकर गांधी ने राजनीतिक सयानेपन, सहानुभूति और संवैधानिक प्रतिबद्धता की भाषा में एक इबारत यंग इंडिया के 26 मई 1920 के अंक में लिखी –

‘दोनों भाइयों ने अपने राजनीतिक विचारों का खुलासा कर दिया है. दोनों ने कहा है उनके मन में किसी प्रकार के क्रान्तिकारी इरादे नहीं हैं. अगर उन्हें छोड़ दिया गया तो वे 1919 के रिफाॅर्म्स ऐक्ट के तहत काम करना पसन्द करेंगे. उनका ख्याल है इस गर्वनमेंट आफ इंडिया ऐक्ट 1919 के तहत सुधारों से लोगों के लिए इस तरह का काम करना सम्भव हो जाता है जिससे भारत को राजनीतिक जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. दोनों ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि वे ब्रिटिश रिश्तों से अलहदा नहीं होना चाहते. इसके बरक्स उन्हें लगता है कि भारत की किस्मत ब्रिटेन के साथ रहकर ही सबसे अच्छी तरह गढ़ी जा सकती है.’

गांधी अंगरेजों की नीयत, कानूनों की मंशा और भारतीय संघर्षकथा में सावरकर की क्रांतिकारी लगती भूमिका तथा सजा को लेकर इतिहास की नज़र से मकड़जाल निकाल देते हैं. सरल हृदय लेकिन कम्प्यूटरनुमा दिमाग के गांधी दो टूक कहते हैं कि सावरकर बंधुओं ने ब्रिटिश हुकूमत को बिना शर्त समर्थन दिया है और गवर्नमेंट आफ इंडिया ऐक्ट 1919 को भी. जबकि वह सुधार कानूनों के नाम पर अंगरेजों ने भारतीयों की मुश्कें बांधने वाली बदनीयती से लादा था. फिर भी गांधी इन्सान की गरिमा और उसकी आजादी पर किसी भी तरह की अत्याचारी बंदिश लगाए जाने की गुलाम भारत में भी संवैधानिक भाषा में मुखालफत करते हैं.

आज एक बात और मालूम होना चाहिए. सावरकर की रिहाई के माफीनामे के समर्थन में गांधी के दस्तखत की उम्मीद की गई थी. गांधी ने दस्तखत करने से इंकार किया लेकिन सयानेपन तथा मनुष्यता की उदारता के चलते अपनी भूमिका का सचनामा गांधी ने 27 जुलाई 1937 के बाॅम्बे क्राॅनिकल को भेजे एक पत्र में लिखा – ‘सावरकर मानते होंगे मैंने उनकी रिहाई के लिए भरसक कोशिश तो की थी. वे यह भी मानेंगे मेरे और उनके बीच लंदन में हुई पहली मुलाकात के वक्त आत्मीय रिश्ते थे.’ शेगांव से 12 अक्टूबर 1939 को लिखे पत्र में गांधी ने खुलासा किया कि ‘वे अपनी बात समझाने भारत में सावरकर के घर भी गए थे, भले ही उसे ठीक नहीं समझा गया हो.’

भूगोल और इतिहास के भाष्य बदल भी जाते हैं. गांधी की अद्भुत प्रतिभा की इन्सानियत का विस्तार नापना कूढ़मगज मजहबी नजरिए से मुश्किल है. गांधी को समझने में कशिश, कोशिश और पीढ़ियों का धीरज चाहिए. उनकी दिमागी रसमयता मनुष्य होने के आयाम का लचीला विस्तार करती है. उन्होंने उस सावरकर की रिहाई की कोशिशें की थी –

  1. जो बकौल खुद क्रांति का विचार छोड़ना चाहता था.
  2. जो 1919 के रिफाॅर्म्स ऐक्ट का समर्थन कर चुका था.
  3. जो ब्रिटिश गुलामी से अलग नहीं होना चाहता था.
  4. जो ब्रिटेन के साथ रहकर ही भारत की किस्मत गढ़े जाने के पक्ष में था.
  5. जो गवर्नमेंट आफ इंडिया ऐक्ट से भारतीयों को जिम्मेदारी मिलना कहता था.
  6. जो माफीनामे पर गांधी से समर्थन की क्यों उम्मीद कर रहा था ?

हलो प्रधानमंत्री जी ! इसके बाद भी भारत रत्न दोगे ?

Read Also –

कायर सावरकर के माफीनामे की तुलना अब शिवाजी महाराज से
संघी ऐजेंट मोदी का ‘अमृतकालजश्न’ यानी महापुरुषों को हटाकर पेंशनभोगी गद्दार सावरकर और अंग्रेजी जासूसों को नायक बनाना
तिरंगा को आतंक बना कर गद्दार सावरकर को स्थापित करने का कुचक्र रचा मोदी ने
सावरकर के युग में गांधी और नेहरू एक बार फिर लाज बचाने के काम आ रहे हैं
कायर सावरकर : जेल से रिहाई के बाद सावरकर ने क्या किया ?
अथ बलात्कारी वीर सावरकर पुत्र जन्म कथा
उदार गांधी की नज़र में सावरकर 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

सिलक्यारा टनल : जिम्मेदार गौतम अदानी और नरेंद्र मोदी सहभागी है

Next Post

सावरकर को ‘वीर’ नहीं गद्दार सावरकर कहना चाहिए

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

सावरकर को 'वीर' नहीं गद्दार सावरकर कहना चाहिए

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

न्याय-व्यवस्था से झूठी उम्मीद जगाती ‘जय भीम’

December 17, 2021

सवालों से भागना और ‘जय हिन्द’ कहना ही बना सत्ता का शगल

February 13, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.