Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अब आऊटसोर्सिंग कर्मियों को आत्मसम्मान रहित बनाने का षड्यंत्र, अब दान में कम्बल-स्वेटर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 16, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
अब आऊटसोर्सिंग कर्मियों को आत्मसम्मान रहित बनाने का षड्यंत्र, अब दान में कम्बल-स्वेटर
अब आऊटसोर्सिंग कर्मियों को आत्मसम्मान रहित बनाने का षड्यंत्र, अब दान में कम्बल-स्वेटर (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना

अखबार में एक कोने में छोटी सी खबर है कि पटना के एक बड़े कॉलेज में आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे 46 कर्मचारियों के बीच गर्म कपड़े और कंबल का वितरण किया गया. शीत लहर में हम अक्सर ऐसी खबरें देखते हैं जिनमें भिखमंगों, फुटपाथवासियों, रिक्शा चालकों आदि को कपड़ों और कंबलों का दान किया जाता है.

अब ऐसे अनुग्रह प्राप्त करने वालों में सरकारी संस्थानों में प्रतिदिन सात-आठ घंटे ड्यूटी बजाने वाले कर्मियों के नाम भी शामिल हो रहे हैं. इनमें क्लर्क भी होंगे, चपरासी और सिक्युरिटी गार्ड जैसे कर्मी भी होंगे. खबर में बताया गया है कि दानस्वरूप स्वेटर और कंबल आदि प्राप्त कर वे कर्मी काफी खुश देखे गए और उन्होंने इस दया के लिए कॉलेज प्रबंधन को ‘शुकिया’ कहा.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

इस खबर को पढ़ने के बाद पिछले साल की अमेरिका की एक घटना याद आई. वालमार्ट कंपनी ने अपने निचले दर्जे के कर्मचारियों को खाद्य और कुछ अन्य आवश्यक सामग्रियां दानस्वरूप दी. ऐसा यह कंपनी अक्सर करती है. कर्मचारियों ने कंपनी प्रबंधन को एक आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने लिखा –

‘हमें आपका यह अनुग्रह नहीं चाहिए. इसके बदले हम चाहते हैं कि आप हमें उचित वेतन दें ताकि हम अपनी और अपने परिवार की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी कर सकें. हम आपके संस्थान में कड़ी मेहनत करते हैं और हम नहीं चाहते कि इतनी कड़ी मेहनत करने के बावजूद हम या हमारा परिवार किसी भी तरह के दान या दया पर निर्भर हों. हम अपने परिश्रम की बदौलत आत्मसम्मान के साथ जीना चाहते हैं.’

वालमार्ट के कर्मचारियों का उक्त पत्र ऐसे प्रबंधनों और नियोक्ताओं के लिए सीख है जो अपने निचले दर्जे के स्टाफ के कड़े श्रम का लाभ तो लेते हैं लेकिन उनका घोर आर्थिक शोषण करते हैं और उन्हें इतना भी पारिश्रमिक नहीं देते कि वे अपनी मौलिक जरूरतों को भी पूरा कर सकें. यदा कदा किन्हीं अवसरों पर दानस्वरूप उन्हें कुछ एकस्ट्रा दे कर वे अपना अनुग्रह दर्शाते हैं और कर्मियों के भीतर सुलग रहे असंतोष को ठंडा करते हैं.

उल्लेखनीय है कि दुनिया भर की कंपनियों के प्रति एक बड़ी शिकायत यह उभर कर सामने आई है कि वे अपने निचले दर्जे के कर्मियों के अथक परिश्रम की बदौलत अपने मुनाफे का ग्राफ तो बेहद ऊंचा कर रही हैं लेकिन उन्हें परिवार सहित जीने लायक वेतन नहीं देती.

अब इसमें हमारे देश और राज्यों के सरकारी संस्थानों का नाम भी जुड़ रहा है. हालांकि, किसी भी सरकारी कॉलेज में तृतीय या चतुर्थ श्रेणी के पदों पर विधिवत नियुक्त कर्मचारियों का वेतन अच्छा खासा होता है और उन्हें अपने परिवार के साथ आत्म सम्मान से जीने के लिए किसी तरह के दान या अनुग्रह की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन अब तो चलन बढ़ रहा है कि विधिवत नियुक्त नहीं करेंगे, एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी लाएंगे, उनसे कड़ी ड्यूटी लेंगे, उन्हें कोई अधिकार नहीं देंगे और इतना कम वेतन देंगे कि वे दिहाड़ी मजदूर टाइप के हो कर रह जाएंगे.

स्थायी रूप से नियुक्त किसी कर्मी का जितना न्यूनतम वेतन होता है उसका एक चौथाई भी आउटसोर्सिंग से नियुक्त लोगों को नहीं मिलता. सेवा सुरक्षा आदि की तो बात ही बेमानी है. कब नौकरी से निकाल दिए जाएंगे, कोई ठिकाना नहीं.

इसमें गौर करने की बात यह है कि सरकारी संस्थान आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को जिन एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त करते हैं. उन एजेंसियों को प्रति कर्मचारी प्रति माह अच्छी खासी राशि का भुगतान करते हैं. ये एजेंसियां नियुक्त कर्मी और नियोक्ता संस्थान के बीच में बिचौलिया हैं जो बिना कुछ किए धरे बहुत कमाई करती हैं.

उत्पादन की प्रक्रिया के विकेंद्रीकरण और ‘कॉस्ट एफिशिएंसी’ के लिए आउटसोर्सिंग से काम लेना कंपनियों के लिए एक जरूरी कदम है लेकिन सरकारी संस्थानों में इस प्रवृत्ति का प्रसार कर्मियों के आर्थिक शोषण का कारण बन गया है.

ऐसे कर्मचारियों की त्रासदी है कि वे अपने अधिकारों की परिभाषा तक नहीं पढ़ सकते क्योंकि कोई अधिकार हैं ही नहीं. उन्हें इतना निरीह बना दिया गया है कि वे दान में मुफ्त के कंबल या स्वेटर पा कर निहाल हुए जा रहे हैं. अपने शोषक नियोक्ताओं का धन्यवाद कर रहे हैं.

शोषण के विरुद्ध शोषितों की आवाज न उठे इसलिए कर्मियों को आत्मसम्मान से रहित बना देने का षड्यंत्र कितना सफल हो रहा है, कॉलेज के द्वारा कंबल-स्वेटर दान और दान लेने वालों की खुशी में इसका उदाहरण हम देख सकते हैं.

Read Also –

दास युग में जीने को अभिशप्त है IGIMS के आऊटसोर्सिंग कर्मचारी
सरकार के संरक्षण में कार्पोरेट की संगठित लूट का नायाब तरीका
कामगार विरोधी आर्थिक संस्कृति और कार्य संस्कृति : अब स्थायी नहीं, आउटसोर्सिंग से होगी नियुक्ति
आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों के शोषण और लूट के लिए कुख्यात IGIMS
अग्निपथ और आउटसोर्सिंग से बहाली मनुष्यता के शव पर मुनाफा की शक्तियों का नग्न नर्तन

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

श् श् श्…

Next Post

स्टालिन के बारे में सच्चाई की खोज : यूरी ज़ुकोव की पुस्तक ‘इनोई स्टालिन’ (‘डिफरेंट स्टालिन’) के बारे में

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

स्टालिन के बारे में सच्चाई की खोज : यूरी ज़ुकोव की पुस्तक 'इनोई स्टालिन' ('डिफरेंट स्टालिन') के बारे में

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत में क्रांति के रास्ते : काॅ. स्टालिन के साथ

November 12, 2024

असद फेक एंकाउंटर का घटिया स्क्रिप्ट…ये महापाप है !

May 4, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.