Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

बैताल कथा – ‘जो तीसरी बार मूर्ख बने वह गधा ही हो सकता है’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 16, 2024
in लघुकथा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
बैताल कथा - 'जो तीसरी बार मूर्ख बने वह गधा ही हो सकता है'
बैताल कथा – ‘जो तीसरी बार मूर्ख बने वह गधा ही हो सकता है’

बेताल बोला – ‘हे राजन ! तुम मुझे लादे लादे थक गए हो. तुम्हारी थकान दूर करने को एक कहानी सुनाता हूं. शीर्षक है तीसरी बार.

एक बार जंगल के राजा शेर ने सभा बुलाई और कहा कि ‘मैं राजा हूं क्या मेरा शिकार के लिए इधर-उधर घूमता अच्छा लगेगा ? अब से मेरे लिए शिकार का इंतजाम मंत्रिमंडल करेगा.’

You might also like

एन्काउंटर

धिक्कार

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

उसने सबसे शातिर मंत्री लोमड़ी को शिकार को लाने के लिए कहा. लोमड़ी समझदार थी. उसने एक गधे से जाकर कहा कि ‘हे गर्दभ राज ! आपको शेर ने बुलाया है.’

गधा बोला – ‘मुझे मूर्ख समझती हो. मैं शेर के पास जाऊंगा, वो मुझे खा नहीं जाएगा.’

लोमड़ी ने समझाया कि ‘शेर पहले जैसा मांसभक्षी नहीं रहा. वह बदल गया. वह आपको अपना राज्य सौंपना चाहता है. आप चलें.’

गधा वाकई बेवकूफ होता है, आप सब जानते हैं. तो वह लोमड़ी के बहकावे में आकर चल पड़ा. जैसे ही शेर के दरबार में पहुंचा शेर ने झपटा मारा. गधा दुलत्ती मार कर भाग खड़ा हुआ लेकिन झपट्टे में शेर के हाथ गधे के कान लग गए.

शेर कान खाकर बोला – ‘कान से मेरा पेट कैसे भरेगा ? जाओ जल्दी से शिकार लेकर आओ.’

लोमड़ी फिर गई और गधे को कहने लगी – ‘आप भाग क्यों आए महाराज ?’

गधा बोला ‘अरे भागता नहीं तो क्या करता ? शेर तो मुझे खाने को तैयार था. मेरा कान उखाड़ लिया.’

लोमड़ी बोली – ‘रहे ना गधे के गधे. अरे कान इसलिए उखाड़े की
कान रहते हुए तुम्हारे सिर पर मुकुट कैसे रखते. चलो, राजा बिना मुकुट अच्छा लगता क्या ?’

अब आप जानते हैं गधे तो गधे होते हैं, वह फिर चल पड़ा. जैसे ही दरबार में पहुंचा भूखे शेर ने फिर झपट्टा मारा, गधा फिर भाग लिया लेकिन भागते गधे की पूंछ शेर के मुंह में आ गई थी.

लोमड़ी तीसरी बार गधे के पास पहुंची और बोली – ‘अरे तुम तो अहमक हो, भाग क्यों आए ?’

गधा बोला – ‘अरे पहली बार कान, दूसरी बार पूंछ. शेर तो मुझे खाने की जुगत में था, नहीं तो मेरी पूछ क्यों उखाड़ता ?’

लोमड़ी मुंह बना कर बोली – ‘सच में ही दुनिया तुम्हें गधा कहती है क्योंकि तुम हो ही मूर्ख. भले आदमी पूंछ के रहते तुम सिंहासन पर कैसे बैठते ? तुम्हारा कान उखाड़ा तुम्हें मुकुट पहनाने के लिए.
दूसरी बार तुम्हारी पूंछ ताकि तुम्हें सिहासन पर बैठने में दिक्कत न हो. चलो शेर तुम्हें वाकई राजा बनाएगा.’

गधा फिर जा पहुंचा. अबकी बार शेर को उसकी मौसी लोमड़ी ने सिखा पढ़ा रखा था.

शेर बोल – ‘आओ गधे भाई आओ. तुम तो मेरे परिवार हो. मेरे सिंहासन पर तुम्हारा ही हक है.’

गधा बेचारा शेर की चुपनी चिकड़ी बारे सुन कर शेर के पास चला गया. शेर ने लाड लड़ाने के खातिर पहले उसके चेहरे पर हाथ फेरा, फिर गर्दन पकड़कर उसे मार डाला. तो मित्रों आपने देख लिया कि तीसरी बार गधे का क्या हाल हुआ.

बेताल ने कहानी सुनाकर पूछा – ‘राजन इस कहानी से तुम क्या समझे ?’

विक्रम बोला – ‘यह कहानी है. उसी तरीके की कहानी जैसे पंचतंत्र में हैं यानी जानवरों के माध्यम से इंसानों को समझने हेतु. इसका उपदेश है – जो तीसरी बार मूर्ख बने वह गधा ही हो सकता है.’

  • रणविजय कुमार सिंह

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Tags: गधापंचतंत्रबैताल कथा
Previous Post

आजादी

Next Post

18वीं लोकसभा चुनाव : मोदी सरकार के 10 साल, वादे और हक़ीक़त

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
लघुकथा

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है…

by ROHIT SHARMA
January 5, 2026
लघुकथा

सवाल

by ROHIT SHARMA
August 16, 2025
Next Post

18वीं लोकसभा चुनाव : मोदी सरकार के 10 साल, वादे और हक़ीक़त

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अच्छा हुआ वशिष्ठ बाबू चले गए

November 15, 2019

आखिर क्यों यूक्रेन पर आक्रमण करना रुस के लिए जरूरी था ?

February 27, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.