Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

..इस हश्र की शुरुआत तभी हो चुकी थी जब कोई चिल्लाया था ‘…अब कोई बात नहीं होगी !!’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 2, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बंगले में कुछ धडधडाती बूटों की आवाज आई. गोलियां चली. दरवाजा बजने लगा. पीएम ने खोला, तो कुछ युवा फौजी सामने थे. पीएम ने पूछा.

एक बोला – तुम्हें मारने आये हैं.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

पीएम बोले – बैठो, बात करते हैं.

सब बैठ गए. फ़ौजी बोले – ‘आप चीन पर अटैक नहीं करने दे रहे हो. आपको जीने का हक नहीं.

पीएम ने गहरी सांस ली, कहा- देश युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है.

इतने में सैनिकों का अफसर कमरे में घुसा. सबको बैठे देख उसके गुस्से का पारावार न रहा. चीखा – अब कोई बातचीत नहीं होगी. पिस्टल निकाली, पीएम को गोली मार दी.

उसी शाम विदेशमंत्री को भी एक धार्मिक पंथ के दो युवाओं ने सड़क पर गोली मार दी. 1932 की इस शाम, जापान में प्रजातन्त्र खत्म हो गया.

अगर 1857 की क्रांति सफल हो गई होती. मेरठ से दिल्ली पहुंचे सिपाहियों ने, अंग्रेजों को हराकर, मुगल वंश रिस्टोर कर दिया होता. गवर्मेंट नाना साहब पेशवा, लक्ष्मीबाई वगैरह सम्हाल लेते और सेना, लगभग ऑटोनोमस, मंगल पांडे, बख्त खां जैसे सेनापतियों के अंडर चलती, तो ऐसा ही कुछ जापान में हुआ. 1868 में विदेशियों को भगाकर, मेजी वंश पुनर्स्थापित किया गया. उस स्वतंत्रता युद्ध का नारा था- ‘हमारे राजा को वापस लाओ.’

पर नई गवर्मेंट में राजा, बस नाम का था. सत्ता कुछ एलीट्स के हाथ में थी, सेना पर उनका भी कंट्रोल न था. दिखाने को एक संसद बनी. इसमें रजवाड़ों की ताकतवर राज्यसभा थी. एक ठगवा लोकसभा भी, जिसके चुनाव में वोटिंग, बमुश्किल 1% जनता करती.

राज्यसभा से ही प्रधानमंत्री चुना जाता. जब 1918 में हारा तकाशी पीएम बने, वे लोकसभा से पीएम बनने वाले पहले आम आदमी थे. उसने विद्युत गति से राजनीतिक व्यवस्था बदल दी. वोटिंग राइट लगभग 40% जनता को दिया. लोकसभा में सदस्य बढा दिए.

सरकार में सिर्फ लोकसभा से मंत्री बनाया जाता. वे सेना, इंडस्ट्रीज, और दूसरी एजेंसियों पर हुक्म चलाने लगे. मिलिट्री नाराज, ब्यूरोक्रेसी नाराज, इंडस्ट्री नाराज. तो तकाशी का 1921 में मर्डर हो गया. पर सुधार रुके नहीं. लोकतंत्र खिल रहा था. 1930 का दशक, उथल पुथल का रहा.

लालच बुरी बला. नए नए नेता, सब बड़ा आदमी बनने की हड़बड़ी में थे. सांसदों, मंत्रियों ने जमकर करप्शन किया. बार बार सरकारें गिरती, दुश्मन मिलकर सरकार बना लेते. चुनावों में सत्ता पक्ष धांधली करवाता. बड़ा घटिया चुनावी कैम्पेन, एक दूसरे पर चारित्रिक आरोप.

रिश्वत स्कैण्डल, सेक्स, पतन, रोज एक नया खुलासा. इस लुटेरे लोकतंत्र से जनता जल्द ऊब गयी. उसे लगा- हमने अपने पवित्र राजा, याने मेजी वंश को जो सत्ता दी थी, इन लोगों ने उनसे सत्ता छीन ली है. तो देश के गद्दार नेताओं को हटाना होगा. फिर से राजा को सत्ता दिलानी पड़ेगी. जापान में राजा की गरिमा स्थापित करना, सबसे बड़ी देशभक्ति थी.

नीसो नाम के बुद्धिस्ट साधु ने घूम घूमकर भड़काऊ प्रवचन दिए. जापान भर में उसकी बड़ी फॉलोइंग बनी. उसे मिल्ट्री का फ़ंड, और समर्थन भी था. जनता में देशभक्ति, और नेताओं के खिलाफ नफरत भरी गई..

तो जहां तहां नेताओ की हत्या होने लगी. 1932 की उस शाम, विदेशमंत्री की हत्या में इस साधु के ही फॉलोवर पकड़े गए. और प्रधानमंत्री को, सैनिकों ने मार डाला. अभी सब कुछ न बिगड़ा था.
ज्यूडिशियरी का बिगड़ना बाकी था.

तो जब हत्यारों पर मुकदमा चला, जज साहब ने अपराधियों की कड़ी निंदा की. कहा- हत्या की सजा मौत है. पर ये देशभक्त हैं. राजा की गरिमा बढाने के लिए मर्डर किये हैं.

जज ने सिर्फ कैद दी और नए प्रधानमंत्री ने, सजा चटपट कम्यूट कर दी. अब कातिलों का स्वागत, फूल मालाओं से हुआ. मर्डर, देशभक्ति का नया मार्ग था. बस, राजा की जय बोलकर मारना है. नए पीएम, राज्यसभा से थे, वे भी मारे गए. उनके बाद वाले ने मौत के डर से इस्तीफा दे दिया. अंततः मिलिट्री ने टेकओवर किया. जनरल तोजो नए प्रधानमंत्री हुए.

ये मिलिट्री फासिस्ट सरकार थी. फौज ने फटाफट कण्ट्रोल कर लिया. दरअसल सारा रायता…चुपके उसी ने तो फैलाया था.

दुनिया के लिए दूसरा विश्वयुद्ध 1939 में शुरू हुआ. पर जापान 1930 से लगातार लड़ रहा था, जब उसने चीन के मंचूरिया पर कब्जा किया. अब राजा का साम्राज्य और बढाना था. तोजो ने फटाफट जर्मनी-इटली से समझौता किया, एक्सिस पॉवर का जन्म हुआ.

फिर तो तोजो ने खूब साम्राज्य बढाया. पूरे एशिया में कत्लेआम किये. अंत हिरोशिमा-नागासाकी से हुआ. सरेंडर के बाद, पूरी गवर्मेंट पर मानव अपराधों का मुकदमा चला. तोजो, और सीनियर कैबिनेट मेम्बर्स…फांसी चढ़े.

देश को नया प्रशासक मिला. एक विदेशी जनरल- डगलस मैकआर्थर. जापान 1952 तक अमेरिकी जूतों के तले रहा. इस हश्र की शुरुआत 1932 में हो चुकी थी. जब कोई चिल्लाया था…अब कोई बात नहीं होगी !!

  • मनीष सिंह

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar खषcode to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

यादों में मंटो

Next Post

मी लॉर्ड

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

मी लॉर्ड

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

8 मार्च : समकालीन विस्थापन-विरोधी संघर्ष और स्त्री प्रतिरोध

March 10, 2022

लोग करोना से कहीं ज्यादा लॉकडाउन से उपजी परिस्थितियों से मरने वाले हैं

March 31, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.