Tuesday, June 9, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

27 मई पुण्यतिथि पर : नेहरू तुम अब तक उदास हो !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 27, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
27 मई पुण्यतिथि पर : नेहरू तुम अब तक उदास हो !
27 मई पुण्यतिथि पर : नेहरू तुम अब तक उदास हो !
kanak tiwariकनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़

1964 में 27 मई को मौत के बाद जवाहरलाल नेहरू का यश इतिहास की थाती है. उनका अनोखापन बेमिसाल है. नेहरू में दोष भी ढूंढ़े जा सकते हैं. हुकूमत की मौजूदा विचारधारा उनके सिर पापों की गठरी बांध उन्हें गुमनामी में धकेल देना चाहती है. नेहरू विस्मृति के अंधेरे में भी जुगनू की तरह दमकते ही रहते हैं. वे अकेले हैं जो दक्षिणपंथ के हमले का शिकार हैं. आजा़दी की जद्दोजहद में तिलक, गांधी, नेहरू और सुभाष उत्तरोत्तर पड़ाव हैं.

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के बाद नेहरू ने गांधी का सम्मान करते भी उनकी आदर्शवादिता को अव्यावहारिकता कहकर ठुकरा दिया. उन्हें कठोर पत्र भी लिखे. उन्होंने गांधी की मुखालफत करते भगतसिंह के पक्ष में करीब आधी कांग्रेस को खड़ा भी किया. सुभाष बोस के साथ भगतसिंह के मुकदमे की पैरवी की. उन पर सरदार पटेल के साथ भारत विभाजन का दोष भी थोपा गया.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

उन्होंने योजना आयोग, भाखरा नांगल, आणविक शक्ति आयोग, भाषावाद प्रांत, सार्वजनिक उपक्रम, संसदीय तमीज और संविधान की इबारतें नायकत्व की भूमिका के साथ रची. कश्मीर समस्या को लेकर उनमें उलझाव बताया गया. पंचशील के मुखिया होने के बावजूद चीन ने दोस्ती और विश्वास में बहुत बड़ा धोखा दिया, कीमत देश की धरती को चुकानी पड़ी. लोकतंत्र के रहनुमा नेहरू ने अपना व्यक्तित्व कई बार थोपने की कोशिश की लेकिन बहुमत के आगे मासूमियत से हारते भी रहे.

कांग्रेस अध्यक्ष बेटी इंदिरा ने केरल की सरकार की बर्खास्ती को लेकर उसे खारिज कर दिया. नेहरू राजेन्द्र प्रसाद को दुबारा राष्ट्रपति बनाने के बदले उपराष्ट्रपति डाॅक्टर राधाकृष्णन को प्रोन्नत करना चाहते थे, कांग्रेस ने बात नहीं मानी. नेहरू अदब से झुक गए.

दिल्ली की जनसभा में संचालक ने यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो को पहला पुष्पगुच्छ देने नेहरू को आमंत्रित किया. जवाहरलाल ने चेहरा लाल पीला करते कहा – दिल्ली के नागरिकों की ओर से पहला पुष्पगुच्छ सौंपने का अधिकार महापौर अरुणा आसफ अली को है. यह संस्कारशीलता आज महापौरों को उपलब्ध नहीं है. उन्हें मंत्री, सचिव और आयुक्तों के सामने ऊंची नाक रखने से मना किया जाता है.

तपेदिकग्रस्त पत्नी को स्विट्ज़रलैंड के अस्पताल में छोड़ जेलों में जवानी सड़ा दी. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान खंदकों में बैठकर हेरल्ड लास्की के फेबियन समाजवाद के पाठ पढ़े. अपनी बेटी को पिता के पत्र के नाम से चिट्ठियों की शृंखला लिखी, वह इतिहास बन गई. बेटी देश की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री बनी और शहीदों की मौत पाई. नेहरू खानदान पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाले यह नहीं कहते.

जवाहरलाल ने अपना उत्तराधिकारी जयप्रकाश में ढूंढ़ा था, इंदिरा गांधी में नहीं. वे अटलबिहारी वाजपेयी को कांग्रेस में लाने-लाने को थे. नहीं चाहने पर भी मुख्यमंत्री रविषंकर शुक्ल के दबाव के कारण छत्तीसगढ़ में भिलाई इस्पात संयंत्र को लाकर प्रदेश को नया औद्योगिक तीर्थ दिया. उनकी किताबों विश्व इतिहास की झलक, भारत की खोज और आत्मकथा की राॅयल्टी से परिवार का खर्चा चलता रहा.

नेहरू में कवि और दार्शनिकता था. उनकी इतिहास दृष्टि में नदियां, हवाएं और तरंगें बहती हैं. नेहरू की गंगा सुदूर अतीत से भविष्य के महासागर तक संस्कारों का सैलाब लिए अनंतकाल तक बहती रहेगी. उनकी गंगा वसीयत से बेहतर वसीयत संसार में कहीं नहीं है. असाधारण बौद्धिक सांसद हीरेन मुखर्जी ने कहा था – ‘मैं ऐसी वसीयत लिखने वाले की हर गलती माफ कर सकता हूं, यहां तक कि खराब सरकार को भी.’

नेहरू ने प्रधानमंत्री नहीं साहित्य अकादमी के अध्यक्ष की हैसियत से सर्वोच्च सोवियत नेता ख्रुश्चेव को लिखा था – डाॅक्टर जिवागो उपन्यास के लेखक बोरिस पास्तरनाक को रूसी समाज की कथित बुराइयों को उजागर करने के आरोप में अनावश्यक सजा़ नहीं दें.

आल्डस हक्सले ने लिखा – जवाहरलाल का व्यक्तित्व गुलाब की पंखुड़ियों से बना है. शुरू में लगता था चट्टानी राजनीति में गुलाब की पंखुड़ियां कुम्हला जाएंगी लेकिन गुलाब की पंखुड़ियों ने तो पैर जमाने षुरू कर दिए हैं. नेहरू का स्पर्श पाकर राजनीति सभ्य हो गई है. टैगोर ने उन्हें भारत का ऋतुराज कहा था. विनोबा के लिए अस्थिर दौर में सबसे बड़े स्थितप्रज्ञ थे.

उनके निंदक आज भी फलफूल रहे हैं. शेख अब्दुल्ला को नेहरू का अवैध भाई बताते हैं. उनके पूर्वजों में मुसलमानों का रक्त अफवाहों के इंजेक्शन के जरिए डालते हैं. एडविना माउंटबेटन से उनके संबंधों में मांसलता का वीभत्स देखते हैं. उन्हें काॅमनवेल्थ को कायम रखते हुए कई समझौतों के लिए दोषी करार दिया जाता है. यह सफेद झूठ कहने वाले सर्वोच्च पद पर हैं. नेहरू सरदार पटेल की अंत्येष्टि में नहीं गए थे.

निखालिस हिन्दू लगते गांधी, मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, सरदार पटेल, लालबहादुर शास्त्री, राजगोपालाचारी वगैरह कांग्रेसियों की तस्वीरों का संघ परिवार मुरीद है. नेहरू के सियासी और खानदानी वंशज गाफिल हैं. जवाहरलाल से बेरुख भी हैं. कांग्रेस इस असाधारण बौद्धिक से घबरा या उकताकर मीडिलफेल जी-हुजूरियों के संकुल को अपना बौद्धिक विश्वविद्यालय बनाए हुए है.

काश ! वे महान क्रांतिकारी भगतसिंह को पढ़ लेते. उसने कहा था – मैं देश के भविष्य के लिए गांधी, लाला लाजपत राय और सुभाष बोस वगैरह सब को खारिज करता हूं. केवल जवाहरलाल वैज्ञानिक मानववाद होने के कारण देश का सही नेतृत्व कर सकते हैं. नौजवानों को चाहिए नेहरू के पीछे चलकर देश की तकदीर गढ़ें. नेहरू चले गए. भगतसिंह भी. उस वक्त के नौजवान भी. वर्तमान के ऐसे करम हैं कि नेहरू अब भी उदास हैं !

Read Also –

जैसे-जैसे लोकतंत्र खत्म किया जा रहा है, नेहरू और ज्यादा प्रासंगिक होते जा रहे हैं
जवाहरलाल नेहरू : देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद रखने वाले बेजोड़ शिल्पी, एक लेखक के रूप में
नेहरू को बदनाम करने की साजिश में यह सरकार हमें ‘इतिहास’ पढ़ा रही है
नेहरू के भारत में राजनीति के अपराधीकरण पर सिंगापुर की संसद में चर्चा
भारत और पाकिस्तान में सिर्फ नेहरू का फर्क
भारत में नेहरू से टकराता फासीवादी आंदोलन और फासीवादी रुझान
भारत में हर समस्‍या के लिए जवाहर लाल नेहरू जिम्‍मेदार हैं ?
नेहरू परिवार से नफरत क्यों करता है आरएसएस और मोदी ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Tags: 27 मई पुण्यतिथि पर : नेहरू तुम अब तक उदास हो !
Previous Post

ये बातें किसी भी नेता को शर्मसार करने वाली कही जा सकती है

Next Post

क्या आपने कभी फर्ज़ी एनकाउंटर को सही ठहराया है ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

क्या आपने कभी फर्ज़ी एनकाउंटर को सही ठहराया है ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्या आप सोचते हो ?

August 15, 2020

विश्वगुरू बनते भारत की पहचान : एबीवीपी के गुंडों से पैर छूकर मांफी मांगते गुरू

September 29, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.