Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

रत्ती : माप की प्राकृतिक ईकाई

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 3, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
रत्ती : माप की प्राकृतिक ईकाई
रत्ती : माप की प्राकृतिक ईकाई

‘रत्ती’ यह शब्द लगभग हर जगह सुनने को मिलता है. जैसे – रत्ती भर भी परवाह नहीं, रत्ती भर भी शर्म नहीं, रत्ती भर भी अक्ल नहीं…!! आपने भी इस शब्द को बोला होगा, बहुत लोगों से सुना भी होगा. आज जानते हैं ‘रत्ती’ की वास्तविकता, यह आम बोलचाल में आया कैसे ?

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ‘रत्ती’ एक प्रकार का पौधा होता है, जो प्रायः पहाड़ों पर पाया जाता है. इसके मटर जैसी फली में लाल-काले रंग के दाने (बीज) होते हैं, जिन्हें ‘रत्ती’ कहा जाता है. प्राचीन काल में जब मापने का कोई सही पैमाना नहीं था, तब सोना, जेवरात का वजन मापने के लिए इसी रत्ती के दाने का इस्तेमाल किया जाता था.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

सबसे हैरानी कि बात तो यह है कि इस फली की आयु कितनी भी क्यों न हो, लेकिन इसके अंदर स्थापित बीजों का वजन एक समान ही 121.5 मिलीग्राम (एक ग्राम का लगभग 8वां भाग) होता है.

तात्पर्य यह कि वजन में जरा सा एवं एक समान होने के विशिष्ट गुण की वजह से, कुछ मापने के लिए जैसे रत्ती प्रयोग में लाते हैं, उसी तरह किसी के जरा सा गुण, स्वभाव, कर्म मापने का एक स्थापित पैमाना बन गया यह ‘रत्ती’ शब्द. रत्ती भर मतलब जरा सा.

अक्सर लोग दाल या सब्जी में ऊपर से नमक डालते रहते हैं. पुराने समय में मांग हुआ करती थी – रत्ती भर नमक देना. रत्ती भर का मतलब ‘जरा सा’ होता है. अब रत्ती भर कोई नहीं बोलता  सभी जरा सा हीं बोलते हैं लेकिन रत्ती भर पर आज भी मुहावरे प्रचलित हैं. ‘रत्ती भर’ का वाक्यों में प्रयोग के कुछ नमूने देखिए –

  • तुम्हें तो रत्ती भर भी शर्म नहीं है.
  • रत्ती भर किया गया सत्कर्म एक मन पुण्य के बराबर होता है.
  • इस घर में हमारी रत्ती भर भी मूल्य नहीं है.
  • कुछ लोग ‘रत्ती भर’ भी झूठ नहीं बोलते.

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिस रत्ती की बात यहां हो रही है, वह माप की एक ईकाई है. यह माप सुनार इस्तेमाल करते हैं. पुराने जमाने में जो माप तौल पढ़े हैं, उनमें रत्ती का भी नाम शामिल है. विस्तृत वर्णन इस प्रकार है –

8 खसखस = 1 चावल,
8 चावल = 1 रत्ती
8 रत्ती = 1 माशा
4 माशा = 1 टंक
12 माशा = 1 तोला
5 तोला = 1 छटांक
16 छटांक = 1 सेर
5 सेर = 1 पंसेरी
8 पंसेरी = एक मन

हालांकि उपरोक्त माप अब कालातीत हो गये हैं, पर आज भी रत्ती और तोला स्वर्णकारों के पास चल रहे हैं. 1 रत्ती का मतलब 0.125 ग्राम होता है. 11.66 ग्राम 1 तोले के बराबर होता है. आजकल एक तोला 10 ग्राम होता है.

इन सभी माप में रत्ती अधिक प्रसिद्ध हुई, क्योंकि यह प्राकृतिक रुप से पायी जाती है. रत्ती को कृष्णला, और रक्तकाकचिंची के नाम से भी जानी जाता है. रत्ती का पौधा पहाड़ों में पाया जाता है. इसे स्थानीय भाषा में ‘गुंजा’ कहते हैं.

रत्ती के बीज लाल होते हैं, जिसका ऊपरी सिरा काला होता है. सफेद रंग के भी बीज होते हैं, जिनके ऊपरी सिरे भी काले होते हैं. यह बीज छोटा बड़ा नहीं होता बल्कि एक माप व एक आकार का होता है. प्रत्येक बीज का वजन एक समान होता है. इसे आप कुदरत का करिश्मा भी कह सकते हैं. रत्ती के इस प्राकृतिक गुण के कारण स्वर्णकार इसे माप के रुप में पहले इस्तेमाल करते थे, शायद आजकल भी करते होंगे.

रत्ती का उपयोग पशुओं के घावों में उत्पन्न कीड़ों को मारने के लिए किया जाता है. यह खुराक के रूप में प्रयोग किया जाता है. एक खुराक में अधिकतम दो बीज हीं दिए जाते हैं. दो खुराक दिए जाने पर घाव ठीक हो जाता है.

रत्ती के बीज जहरीले होते हैं इसलिए ये खाए नहीं जाते. इनकी माला बनाकर माएं अपने बच्चों को पहनाती हैं. ऐसी मान्यता है कि इसकी माला बच्चों को बुरी नज़रों से बचाती है.

  • संतोष गोदरा कोलू

Read Also –

59 ग्राम गांजा पर वितंडा : अब प्रतिरोध और प्रतिकार जरूरी
कॉरपोरेट्स के निशाने पर हैं आदिवासियों की जमीन और उनकी संस्कृति 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate

Previous Post

निपूतों के गैंग को आपके बच्चे चाहिए…

Next Post

रूस-यूक्रेन युद्ध से सीखे गए सबक को अमेरिकी सेना के सिद्धांत में शामिल करने का एक दृष्टिकोण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

रूस-यूक्रेन युद्ध से सीखे गए सबक को अमेरिकी सेना के सिद्धांत में शामिल करने का एक दृष्टिकोण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अब समझ में आया हमारे पुरखों ने 70 साल इन ढोंगियों को सत्ता से बाहर क्यों रखा…?

May 4, 2023

लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा – परिवारवाद या पैसावाद ?

February 12, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.