Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जनगणना में मातृभाषाओं का प्रश्न

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 23, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

इस बार की जनगणना में मातृभाषा का कॉलम नहीं था. स्वाभाविक रूप से देश के लोगों की मातृभाषा नहीं गिनी गई. भारत भौगोलिक रूप से एक बड़ा देश तो है ही साथ ही यहां विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा आदि के लोग रहते हैं. कहीं एक जगह बैठकर या किसी एक फार्मूले से पूरे देश को ठीक ढंग से जानना-समझना
संभव नहीं है. इसके लिए कई तरह के आंकड़ों की जरूरत पड़ती है.

जनगणना के द्वारा विभिन्न तरह के आंकड़े जमा होते हैं. इसके आधार पर पूरे देश को समझने-जानने में मदद मिलती है. भाषा भी ऐसा ही एक सवाल है. देश के लोगों की मातृभाषा क्या है, इसे जनगणना के माध्यम से जाना जा सकता है. अब तक इसी उद्देश्य से मातृभाषा को शामिल किया जाता रहा है. इस बार की जनगणना में मातृभाषा का नहीं पूछी गई. इससे देश भाषिक विविधता का अंदाज नहीं हो पाएगा.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

असल में केंद्र सरकार एक अज्ञात आशंका से पीड़ित है. मोदी सरकार को यह लगता है कि मातृभाषा की गणना होने से हिंदी भाषियों की संख्या घटी हुई दिखाई देगी. असल में उत्तर भारत के सभी लोगों की मातृभाषा हिंदी मानी जाती है. यहां की एक भाषा मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में आ चुकी है. मिथिलांचल में बड़ी संख्या में लोग अपनी मातृभाषा हिंदी नहीं लिखवाते हैं. इधर भोजपुरी, राजस्थानी, अवधी, ब्रजभाषा, मगही, अंगिका को अपनी मातृभाषा के रूप में मानने की मांग जोड़ पकड रही है.

अभी तक इन भाषाओं को बोलनेवालों को हिंदी में गिन लिया जाता रहा है. मोदी सरकार को यह डर था कि अगर इस बार जनगणना में मातृभाषा को शामिल किया गया तो भोजपुरी, राजस्थानी, मगही, अंगिका, अवधी, ब्रजभाषा जैसी कई भाषा-भाषी अपनी मातृभाषा हिंदी नहीं लिखवाएंगे, इसी अज्ञात आशंका से पीड़ित होकर उसने जनगणना से मातृभाषा का कॉलम ही हटा दिया.

उत्तर भारत में 49 से अधिक ऐसी भाषाएं हैं जिनकी गणना जनगणना में हिंदी में की जाती है. ऐसी भाषाओं में अवधी, भोजपुरी, मगही, अंगिका, वज्जिका, सुरजापुरी, राजस्थानी, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाएं शामिल हैं. इन भाषाओं को हिंदी मान लिया जाता है.

सन 1961 की जनगणना में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इन मातृभाषाओं की गणना की व्यवस्था करवाई थी. उस समय मातृभाषा तय करने वाला सरकारी निर्देश इस प्रकार था – ‘जनगणना के क्रम में लोग जैसा कहते हैं, उसी प्रकार मातृभाषा का उल्लेख, बोली सहित, पूर्णरूपेण करें. मातृभाषा वह भाषा है, जिसमें किसी की मां बाल्यावस्था में उससे बोलती है या वह भाषा है जो मुख्यतः परिवार में बोली जाती है. अगर बाल्यावस्था में ही मां की मृत्यु हो गई हो तो उस भाषा का उल्लेख करें जो इस व्यक्ति की बाल्यावस्था में उसके घर में मुख्यतः बोली जाती हो. बच्चे या गूंगे – बघिर के सम्बन्ध में उस भाषा का उल्लेख करें जो उन सबों की मांएं बराबर बोलती हो.’

मातृभाषा तय करनेवाले इस निर्देश के फलस्वरूप उत्तर भारत की भाषाओं की संख्या में बढोत्तरी हुई. इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है. सन 1951 के जनगणना में भोजपुरी भाषियों की संख्या 1902 थी, वह सन 1961 की जनगणना में बढ़ कर 78 लाख हो गई. कुछ लोगों को लगा कि इससे हिंदी की संख्या घट रही है. इसका विरोध हुआ, फलतः 1971 की जनगणना में इसे बदल दिया गया. तब से इन भाषाओं को हिंदी माना जाता रहा है.

कुछ लोग धर्म के आधार पर अपनी मातृभाषा लिखवाते हैं. भोजपुरी क्षेत्र के मुसलमानों की मातृभाषा भोजपुरी ही है परंतु कुछ मुसलमान उर्दू लिखवाते हैं. हिंदी, उर्दू यहां की मातृभाषा नहीं है वह अर्जित की हुई भाषा है. कभी राहुल सांकृत्यायन ने अपने एक लेख में मातृभाषाओं का प्रश्न उठाया था. यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है.

  • जितेन्द्र वर्मा

Read Also –

भाजपा के टपोरी तंत्र, टपोरी भाषा और टपोरी कल्चर में विकसित होता फासिस्ट कल्चर और हिन्दी भाषा
संस्कृत नहीं, पालि भारत की सबसे पुरानी ऐतिहासिक भाषा है
विश्व हिंदी दिवस : आरएसएस-मोदी गैंग ने हिंदी को प्रतिक्रियावादी और गाली की भाषा बनाया है
पापुलैरिटी की हवस और कोलोनियल भाषा हिन्दी की गरीबी का रोना
अब हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई : भाषा के नीम हकीम और मेडिकल शिक्षा
भाषा जब खत्म होती है
भाषा की हिंसा और हिंसा की भाषा : श्रमिक जातियों को अपराधी घोषित करना बंद करें
ईसा से पहले संस्कृत भाषा थी ही नहीं 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

चंद्रयान बनाने वाले मज़दूरों (वैज्ञानिकों) को 17 महीने से वेतन नहीं

Next Post

स्त्रियों तुम्हारी लड़ाई आसान नहीं है…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

स्त्रियों तुम्हारी लड़ाई आसान नहीं है...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अराजकतावाद पर भगत सिंह का दृष्टिकोण – 3

February 9, 2018

हमारी मूढ़ पीढ़ी अपना और अपने बच्चों का सब कुछ गंवा रही है

August 23, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.