Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ डेमोक्रेटिक फ्रंट ने छत्तीसगढ़ में कथित न्यायेतर हत्याओं की निंदा की

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 13, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ डेमोक्रेटिक फ्रंट ने छत्तीसगढ़ में कथित न्यायेतर हत्याओं की निंदा की
ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ डेमोक्रेटिक फ्रंट ने छत्तीसगढ़ में कथित न्यायेतर हत्याओं की निंदा की

बीजापुर जिले के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में हाल ही में हुई मुठभेड़, जिसमें 31 माओवादी मारे गए, ने इस साल छत्तीसगढ़ में कुल माओवादी हताहतों की संख्या 81 कर दी है. इस घटना के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक भारत में ‘वामपंथी उग्रवाद’ को खत्म करने के सरकार के उद्देश्य को दोहराया. 3 अक्टूबर को नारायणपुर के थुलथुली में 38 माओवादियों की मौत के बाद, यह एकल सुरक्षा अभियान में माओवादियों की मौत की दूसरी सबसे बड़ी घटना थी.

2024 ऑपरेशन ग्रीन हंट के ख़िलाफ़ डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता, जिनमें डॉ. परमिंदर, प्रो. ए.के. मलेरी और बूटा सिंह महमूदपुर ने हत्याओं की आलोचना की है और इसे मुठभेड़ों की आड़ में न्यायेतर फांसी बताया है. उनका तर्क है कि माओवादी विद्रोह जैसे सशस्त्र संघर्ष लंबे समय से चली आ रही सामाजिक और आर्थिक असमानताओं से उत्पन्न होते हैं.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

डेमोक्रेटिक फ्रंट का तर्क है कि इस तरह के ऑपरेशन न केवल माओवादी ताकतों को बल्कि स्थानीय आदिवासी आबादी को भी प्रभावित करते हैं, जो अक्सर गोलीबारी में फंस जाते हैं. उनका तर्क है कि ये कार्रवाइयां व्यापक आर्थिक और राजनीतिक रणनीतियों के अनुरूप हैं जो स्वदेशी अधिकारों पर कॉर्पोरेट विकास को प्राथमिकता देती हैं. संगठन का दावा है कि जनवरी 2024 से बस्तर क्षेत्र में ‘ऑपरेशन कगार’ के तहत 350 से अधिक गैर-न्यायिक हत्याएं की गई हैं.

डेमोक्रेटिक फ्रंट के अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों के कारण सैन्यीकरण में वृद्धि हुई है, पूरे बस्तर में कई सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं. उनका आरोप है कि इस तरह के उपाय गैरकानूनी हिरासत, विस्थापन और मानवाधिकारों के उल्लंघन में योगदान करते हैं.

समूह ने इस कथन को भी चुनौती दी है कि माओवादी गतिविधियां बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा डालती हैं, यह दावा करते हुए कि राज्य की नीतियों और सैन्य रणनीतियों ने इन क्षेत्रों में शिक्षा और संसाधनों तक पहुंच को सीमित करने में भूमिका निभाई है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 तक माओवाद को खत्म करने के सरकार के लक्ष्य को दोहराया है. डेमोक्रेटिक फ्रंट का तर्क है कि दृष्टिकोण मुख्य रूप से राजनीतिक समाधान के बजाय सैन्य कार्रवाई पर केंद्रित है. उनका दावा है कि आधिकारिक आख्यान और मीडिया रिपोर्टें व्यापक सामाजिक-आर्थिक शिकायतों को नजरअंदाज करते हुए अक्सर उग्रवाद-विरोधी सफलता पर जोर देती हैं.

संगठन ने कथित न्यायेतर हत्याओं, ड्रोन हमलों को ख़त्म करने और जनजातीय क्षेत्रों में सुरक्षा उपस्थिति बढ़ाने का आह्वान किया है. वे स्वदेशी भूमि अधिकारों को मान्यता देने और जन आंदोलनों और असहमति की आवाजों के दमन को समाप्त करने की भी मांग करते हैं. वे आदिवासी समुदायों पर सुरक्षा अभियानों के प्रभाव को उजागर करने और नीतिगत बदलावों पर जोर देने के लिए देशव्यापी लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन की वकालत करते हैं.

  • हर्ष ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार

Read Also –

कॉरपोरेटपरस्त भारत सरकार के साथ युद्ध में माओवादी ‘माओ’ की शिक्षा भूल गए ?
हर तसवीर, हर शब्द सच है लेकिन सारी तसवीर, सारे शब्द मिलाकर एक झूठ बनता है
कॉरपोरेटपरस्त भारत सरकार के साथ युद्ध में माओवादी ‘माओ’ की शिक्षा भूल गए ?
माओवादियों के बटालियन से मुठभेड़, 12 की मौत और आजादी की कीमत

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate

Previous Post

माओ त्से-तुंग की चुनिंदा कृतियां : चीनी समाज में वर्गों का विश्लेषण

Next Post

क्या अमित शाह का माओवाद मुक्त भारत का सपना पूरा होगा ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

क्या अमित शाह का माओवाद मुक्त भारत का सपना पूरा होगा ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आम आदमी की शिक्षा के लिए देश में दो नीतियां

November 26, 2017

‘दी सेंटीपीड’ : आज के दौर के ‘दुःस्वप्न’ का यथार्थ…

December 15, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.