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Home कविताएं

औरत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 16, 2025
in कविताएं
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औरत
औरत

महिलाएं चूल्हे पर चावल रख रही हैं
जिनके चेहरों की सारी सुन्दरता और आकर्षण
गर्म चूल्हे से उठती गर्मी दिखाई देने लगी.
गांव की लड़कियां जिनके भाई प्राइवेट कॉलेजों में पढ़ रहे थे
उन्हें पांचवीं कक्षा तक शिक्षा दी गई तथा
सिलाई-कढ़ाई भी सिखाई गई.
बेटा मारे, बेटी सज़ा पाए.
जिनकी शादी दस साल की उम्र में कर दी गई
जिन्हें घूंघट में भी नोचा और खाया गया
जिन्हें मरने के बाद भी खुशी नहीं मिली
किसका शव कब्र से बाहर निकाला गया ?
जो हमेशा परेशानी का सबब बन जाता है
गुमराह लड़कियां
जिनके शव कूड़े के ढेर पर फेंक दिए गए
धब्बेदार और फूला हुआ
जिसकी सारी कोमलता नये फूलों को
जन्म देने में खो गयी
जिन लोगों को स्वर्ण पदक मिलते हैं
उन्हें काम करने की अनुमति नहीं दी जाती.
जिन्हें मृत्यु के बाद स्वच्छ कफ़न मिले
मासिक धर्म के दौरान कपड़े न पहनें
वह सुंदर महिला कपास के बीज बो रही है
वह मिल की मशीनों पर काम करने वाली
एक कामकाजी महिला है.
जिनके स्तन पसीने से भीगे हुए हैं
आंखों की तीखी छुरियों से कटा हुआ
जिसके पति ने दूसरी शादी कर ली और
वह दिन-ब-दिन अपनी जिंदगी जीती रही
वह जिसने अपने पति को भरपूर यौन सुख दिया
लेकिन उसे संतान का उपहार नहीं दे सकी
बांझपन की भावना जिसने
उसकी नसों में जहर घोल दिया
जिसने अपनी सास से इसलिए शादी नहीं की
क्योंकि उसका दहेज कम था
जिसके पति ने कंडोम के लिए पैसे बचाकर
उसे बारह बच्चों का झुंड दे दिया
वह अपनी भूखी-प्यासी जिंदगी भर
उस झुंड को चराती और तितर-बितर करती रही.
जिसका प्रेमी अपने वादे पूरे न कर सका
जिसने अपने पिता की इच्छा से
अपना जीवित शरीर इस व्यापारी को सौंप दिया
जिसका जीवित या मृत लोगों से
कोई मतलब या उद्देश्य नहीं था
वह उसके लिए एक पालतू जानवर थी.
जो बच्चों की खातिर एक अजनबी के साथ रहती थी
जिसने गांव में शादी करने वाले अपने भाई की
खुशी के लिए,
सहा हमेशा जुल्म, रखा मौन व्रत
और भाई अपनी पत्नी की बातों पर कभी नहीं हंसा
जिसके पिता ने बेटे की चाहत में
छह बेटियों को जन्म दिया
और छह बेटियों की विरासत भी
बेटे की जेब में डाल दी गई.
जो लोग अस्पतालों में सरकारी नर्सों द्वारा
दुर्व्यवहार किये जाने के बाद
चुपचाप अपने बिस्तर पर पड़े रहते हैं
निजी स्कूलों ने छह हजार रुपये में
किसे नौकरी पर रखा है ?
जिन लोगों को उनकी मजदूरी, गवाही और
विरासत का आधा हिस्सा मिला
लेकिन जीवन पथ पर आए दुखों का
पूरा भार उनके कंधों पर डाल दिया गया.
जिनके बुर्के उनके शरीर को नहीं छिपा सके
वेश्याएं जिन्हें रोटी से नचाया जाता था
जो स्वर्ग में ऐसा खजाना हैं,
जिनके माथे पर ‘दास’ शब्द लिखा है
झांसी की रानियां जो संतानोत्पत्ति में उलझी रहीं
वे दार्शनिक या पैगम्बर नहीं बन सकते.
जो हमेशा से वहां थे और कहीं नहीं थे
ऐसी सभी महिलाओं को कोटि-कोटि नमन.

  • अक्सा गिलानी

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