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काराकास से रिपोर्ट: अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण किया, लेकिन वेनेज़ुएला ने पलटकर जवाब दिया और अपनी क्रांति को कायम रखा है…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 6, 2026
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काराकास से रिपोर्ट: अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण किया, लेकिन वेनेज़ुएला ने पलटकर जवाब दिया और अपनी क्रांति को कायम रखा है...
काराकास से रिपोर्ट: अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण किया, लेकिन वेनेज़ुएला ने पलटकर जवाब दिया और अपनी क्रांति को कायम रखा है…

3 जनवरी को तड़के लगभग 2:00 से 2:45 बजे के बीच अमेरिका की सशस्त्र सेनाओं ने वेनेज़ुएला पर बमबारी की. ग्रेटर काराकास क्षेत्र के कम से कम सात स्थानों पर हमला हुआ. साथ ही अरागुआ राज्य और मिरांडा राज्य के तटीय शहर हिगुएरोते में भी हमले हुए. इन हमलों में सैन्य कर्मियों के साथ-साथ आम नागरिकों की भी मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल थे. बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा. शहर के कुछ हिस्सों में बिजली चली गई थी, लेकिन रविवार सुबह तक बिजली पूरी तरह बहाल कर दी गई.

जो कुछ हुआ, वह अंतरराष्ट्रीय क़ानून और वेनेज़ुएला की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है. हमले के दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा कर अमेरिका ले जाया गया. यह उनके सुरक्षा दस्ते के कड़े प्रतिरोध के बावजूद हुआ. राष्ट्रपति का पूरा आंतरिक सुरक्षा घेरा डटकर लड़ा और मारा गया. अमेरिकी बलों ने राष्ट्रपति मादुरो की पत्नी सिलिया फ़्लोरेस को भी अगवा कर लिया.

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बमबारी के बाद सबसे पहले जनता को संबोधित करने वालों में रक्षा मंत्री व्लादिमिर पाद्रीनो लोपेज़ थे. उन्होंने सुबह-सुबह राष्ट्रीय टेलीविजन पर कहा कि सेना राष्ट्रपति मादुरो के प्रति वफादार है और स्थिति नियंत्रण में है. उन्होंने जनता से शांत रहने की अपील की.

वाकई, शहर में असाधारण शांति देखने को मिली. सुबह के शुरुआती घंटों से लेकर पूरे दिन यह साफ़ दिखा. विपक्ष की ओर से कोई प्रदर्शन नहीं हुआ. इसके बजाय लोग सरकार, राष्ट्रपति और क्रांति के समर्थन में जुटे. मिराफ्लोरेस पैलेस के पास एक बड़ी रैली हुई, जहां वक्ताओं—मिरांडा राज्य के गवर्नर एलियो सेरानो और सांसद ब्लांका एकहाउट, ओलिवर रिवास और तानिया दीआज़—ने राष्ट्रपति मादुरो का समर्थन किया, उनके अपहरण की निंदा की और वेनेज़ुएला व उसकी क्रांति के साथ अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की अपील की.

दिन की एक अहम घटना शाम 3:00 बजे उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ की प्रेस कॉन्फ़्रेंस थी. वेनेज़ुएला के संविधान के अनुसार, वे इस समय सरकार का नेतृत्व कर रही हैं. वे राष्ट्रीय टेलीविजन पर पूरे मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्यों के साथ दिखाई दीं, जिनमें पाद्रीनो लोपेज़, गृह मंत्री डियोसदादो काबेलो और विदेश मंत्री इवान गिल शामिल थे.

शांत स्वर में बोलते हुए रोड्रिगेज़ ने कहा कि राष्ट्रपति मादुरो को वापस लाने की बात की और उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वेनेज़ुएला की सरकार, सेना और जनता मिलकर देश की संप्रभुता की रक्षा करेंगे और साम्राज्यवादी हमले को परास्त करेंगे. उन्होंने बताया कि रक्षा का रास्ता नागरिक–सैन्य–पुलिस गठबंधन है, जिसे सक्रिय कर दिया गया है.

नागरिक–सैन्य–पुलिस गठबंधन की अवधारणा क्रांति के सर्वोच्च नेता ह्यूगो चावेज़ ने विकसित की थी और बाद में राष्ट्रपति मादुरो ने इसे आगे बढ़ाया. इसका उद्देश्य पूरे समाज को विदेशी आक्रमण के खिलाफ खड़ा करना है. यह विचार वियतनाम की ‘पीपुल्स वॉर’ रणनीति से प्रेरित है. इसमें वेनेज़ुएला की बोलिवेरियन मिलिशिया की सक्रिय भागीदारी शामिल है, जिनकी संख्या चार मिलियन से अधिक है.

अमेरिका द्वारा अगस्त से कैरिबियन क्षेत्र में की जा रही भारी सैन्य तैनाती के जवाब में बोलिवेरियन मिलिशिया का विस्तार तेज़ी से हुआ है. 3 जनवरी को पुष्टि हुई कि मिलिशिया देश भर में सक्रिय हैं और सरकार जनता को हथियारों के वितरण को जारी रखते हुए और बढ़ा रही है.

कैबिनेट के सभी प्रमुख सदस्यों के साथ दिए गए रोड्रिगेज़ के बयान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों का साफ़ खंडन हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि वे और उनकी टीम ‘वेनेज़ुएला चला रहे हैं’ और रोड्रिगेज़ उनसे बातचीत के लिए तैयार हैं. इसके उलट, रोड्रिगेज़ ने स्पष्ट किया कि वे और वेनेज़ुएला की सरकार राष्ट्रपति मादुरो के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और वही देश का संचालन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि ‘वेनेज़ुएला किसी का उपनिवेश नहीं है’ और पूरी तरह संप्रभु बना रहेगा. यानी, मादुरो के अपहरण के बावजूद देश की क्रांतिकारी सरकार सत्ता में बनी हुई है.

मेक्सिको, कोलंबिया, क्यूबा, ब्राज़ील और उरुग्वे सहित कई क्षेत्रीय सरकारों ने अमेरिकी हमले की निंदा की और वेनेज़ुएला के समर्थन की घोषणा की. रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भी समर्थन जताया. अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के कई शहरों में वेनेज़ुएला के समर्थन और अमेरिकी आक्रामकता के खिलाफ महत्वपूर्ण प्रदर्शन हुए.

3 जनवरी की देर शाम, डेल्सी रोड्रिगेज़ ने वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. हालांकि, निकोलस मादुरो देश के राष्ट्रपति बने हुए हैं.

  • क्राईस्ट गिलबर्ट
    अनुवाद- मनीष आज़ाद
    mronline.org से साभार

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