Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

‘सुप्रीम’ कठघरे में मोदी और उसके दलाल एलजी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 7, 2018
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

'सुप्रीम' कठघरे में मोदी और उसके दलाल एलजी

दिल्ली की चुनी हुई आम आदमी पार्टी की सरकार को पंगु बना देने और दिल्ली की हर जनोपयोगी नीतियों का दिल्ली के एलजियों के द्वारा खुल्लम-खुल्ला विरोध करने का साहस केन्द्र की मोदी सरकार के बदौलत ही संभव हो पाया था. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब एलजी के काम-काज या कहा जाये खुलेआम गुण्डागर्दी पर तीखा प्रहार किया और उसे संविधान के दायरे से बाहर बताया, तब निश्चित रूप से यह टिपण्णी सीधे केन्द्र के अपढ़ और मूर्खता का नित नये प्रतिमान कायम करने वाले प्रधानमंत्री मोदी की जनविरोधी नीतियों पर करारा तमाचा जड़ता है, जो खुद को प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू की तर्ज पर प्रधान सेवक और चौकीदार कहते नहीं थकते, जिसने देश को अराजकता के दौर में घसीट लिया है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

‘शिक्षित नागरिक ही विकसित और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करता है’ कि अवधारणा को लेकर दिल्ली में प्रचण्ड मतों से सत्ता पर लौटी आम आदमी पार्टी की सरकार की लंबी लकीर के सामने बौनी नजर आ रही ढ़पोरशंखी केन्द्र की मोदी सरकार अपने बौनापन को छुपाने के लिए आम आदमी पार्टी की जनोपयोगी नीतियों पर ही हमला करना शुरू कर दिया, जिसका परिणाम दिल्ली सहित देश भर में अराजकता का डरावना स्वरूप फैल गया.

सुप्रीम कोर्ट के सबसे बड़े संविधान पीठ के निर्णय ने न केवल दलाल एलजी के रवैये और केन्द्र की मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों पर ही तीखा प्रहार किया है बल्कि दिल्ली हाई कार्ट के दलाल चरित्र का भी भण्डाफोर कर दिया है, जिसने पुरानी राजशाही यानी गुलामी के दौर को देश में एक बार फिर स्थापित करने की घटिया राजनीति को स्थापित करने की कोशिश की और एक चुनी हुई सरकार को महज फरयादी बना दिया. हाई कोर्ट के उक्त दलाल जजों ने एलजी को दिल्ली का सर्वेसर्वा बताने के एवज में कितने करोड़ रूपयों की घूस खाई या जज लोया के आत्मा का दर्शन किये, यह तो नहीं पता, पर उनकी घटिया हरकतों के कारण दिल्ली की जनता का पूरा तीन साल बर्बाद हो गया, उसकी भरपाई कौन भरेगा ?

निश्चित तौर पर देश की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को फरयादी बना देने वाले हाई कोर्ट के दलाल जजों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और एलजी अनिल बैजल के खिलाफ एक चुनी हुई सरकार को तंगोतबाह करने और आम आदमी के विरूद्ध साजिश रच कर लोकतंत्र को खतरे में डालने के अपराध में उन्हें उनके पद से बेईज्जत कर अविलम्ब बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए.

देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खत्म करने और नौकरशाहों को चुनी हुई सरकार के खिलाफ काम करने के लिए उकसाने के अपराध में दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को भी देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कर अविलम्ब बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाना और नौकरशाहों के तंत्र में उन तमाम जनविरोधी ताकतों पर कार्रवाई आज की फौरी मांग है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जिन चीजों का पूरी तरह से दिन की उजाले की तरह स्पष्ट कर दिया है, वह है –

  • दिल्ली मंत्रिमंडल को सभी फैसलों की जानकारी उपराज्‍यपाल को देनी चाहिए, लेकिन हर मामले में उपराज्यपाल की सहमति ज़रूरी नहीं. इतना ही नहीं राज्य सरकार को बिना किसी दखल के काम करने की आज़ादी हो.
  • दिल्ली को राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला पहले ही आ चुका है. चीफ जस्टिस ने कहा कि हर फ़ैसले की जानकारी एलजी को दी जाए और उपराज्‍यपाल हर मामला राष्ट्रपति को न भेजें. हर मामले में सहमति ज़रूरी नहीं है.
  • चीफ जस्टिस व दो अन्य न्यायमूर्तियों ने कहा, भूमि, पुलिस और लॉ एंड ऑर्डर को छोड़कर, जो केंद्र का एक्सक्लूसिव अधिकार है, दिल्ली सरकार को अन्य मामलों में कानून बनाने और प्रशासन करने की इजाज़त दी जानी चाहिए.
  • चीफ जस्टिस व दो अन्य न्यायमूर्तियों ने कहा, LG सीमित सेंस के साथ प्रशासक हैं, वह राज्यपाल नहीं हैं, एलजी एक्समेंटिड क्षेत्रों को छोड़कर बाकी मामलों में दिल्ली सरकार की ‘एड एंड एडवाइस’ मानने के लिए बाध्य हैं.
  • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमने सभी पहलुओं – संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि – पर गौर किया है.
  • जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि लोकतंत्र में रियल पावर चुने हुए प्रतिनिधियों में होनी चाहिए. विधायिका के प्रति वो जवाबदेह हैं, लेकिन दिल्ली के स्पेशल स्टेट्स को देखते हुए बैलेंस बनाना जरूरी है. मूल कारक दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है. उन्‍होंने कहा कि एलजी को ये दिमाग में रखना चाहिए कि वो नहीं बल्कि कैबिनेट है, जो फैसले लेती है.
  • जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि दिल्‍ली सरकार द्वारा एलजी को दी गई ‘एड एंड एडवाइस’ पर बाध्यकारी है.
  • सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि उपराज्‍यपाल की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को फैसलों कि जानकारी देनी होगी. इतना ही नहीं चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में अहम है इसलिए मंत्रिपरिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार और एलजी के बीच राय में अंतर वित्तीय, पॉलिसी और केंद्र को प्रभावित करने वाले मामलों में होनी चाहिए. कोई फैसला लेने से पहले एलजी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं, सिर्फ सूचना देने की जरूरत. छोटे-छोटे मामलों में मतभेद ना हो. राय में अंतर होने पर राष्ट्रपति को मामला भेजें उपराज्‍यपाल.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उप राज्यपाल को स्वतंत्र अधिकार नहीं सौंपे गए हैं. उप राज्यपाल को यांत्रिकी तरीके से कार्य नहीं करना चाहिए और ना ही उन्हें मंत्रिपरिषद के फैसलों को रोकना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सहित पांच वरिष्ठ जजों की संविधान पीठ द्वारा लिया गया यह फैसला इस मामले में ऐतिहासिक महत्व रखता है कि यह फैसला केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा संविधान के साथ खिलवाड़ करने और देश की जनता के लोकतांत्रिक चरित्र का पूरी निर्लज्जता के साथ मजाक उड़ाने की घृणित साजिश पर संविधान के मौजूदा वास्तविक स्वरूप को स्थापित करनेवाला साबित हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उपराज्यपाल अनिल बैजल, हाईकोर्ट के दलाल जज, नौकरशाह अंशु प्रकाश देश के लोकतंत्र को खतरे में डालने की साजिश का पक्का दस्तावेज है, जिस आधार पर इन तमाम दोषियों पर फौरन कार्रवाई की जानी चाहिए और फांसी तक की सजा निर्धारित करना चाहिए.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों के ‘लोकतंत्र खतरे में है’ की चेतावनी को भी याद रखना जरूरी है कि किस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जो इस ऐतिहासिक महत्व के फैसले में शामिल रहे हैं, भी देश की लोकतांत्रिक ढ़ांचे को तबाह करने में मोदी की दलालों में शामिल थे.

Read Also –

अरविन्द केजरीवाल का पत्र जनता के नाम
आदमखोर : आम आदमी का खून पीता नौकरशाहकेजरीवाल के धरने से नंगा होता मोदी का बर्बर चेहरा[

प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

गफलत में है कांग्रेस ?

Next Post

देश के लोकतांत्रिक चरित्र को खत्म करने का अपराधी है मोदी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

देश के लोकतांत्रिक चरित्र को खत्म करने का अपराधी है मोदी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

विद्रोह का मतलब विद्रोह है…!

September 25, 2023

आरएसएस का पर्दाफाश : इतिहास के सबसे बड़े दक्षिणपंथी संगठन की संरचना का ख़ुलासा, भाग – 3

January 5, 2026

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.