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केजरीवाल के खिलाफ आखिर कौन ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 13, 2020
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केजरीवाल के खिलाफ आखिर कौन ?

दिल्ली सरकार का सरकारी स्कूल बनाम भाजपा की एमसीडी

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पर आये दिन हमले हो रहे हैं. उनके खिलाफ हो रहे राजनीतिक हमलों के साथ-साथ शारीरिक हमले भी किये जा रहा हैं. इसमें सबसे महत्वूपर्ण तथ्य यह है कि ये सभी हमले केन्द्र सरकार के ईशारे पर आयोजित किये जा रहे हैं. 2019 में दुबारा चुन कर सत्ता में लौटी भाजपा सरकार आज जब दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रही है, तब उसके सामने दिल्ली की आम आवाम को दिखाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है. इसके उलट भाजपा शासित एमसीडी में घोर अराजकता, बदहाली से त्रस्त है. यहां तक कि एमसीडी शासित स्कूलों में हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर क्लासों का बंटवारा तक कर दिया गया है. ऐसे में भाजपा के पास दिल्ली की आम जनता को दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है.

वहीं दिल्ली सरकार के पास आम जनता के सामने पेश करने के लिए काफी कुछ है. दिल्ली सरकार सत्ता में आने ही सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था पर जबरदस्त कार्य कियाा है. केन्द्र की भाजपा सरकार के उलट दिल्ली सरकार यह मानती है कि मुफ्त शिक्षा हर किसी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. इसलिए दिल्ली सरकार ने सर्वप्रथम सरकारी स्कूलों को उच्च गुणवत्तापूर्ण बनाई, उसके शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए कई बार विदेश भेजा ताकि शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ सके. शिक्षण कार्य और गैर-शिक्षण कार्य को अलग-अलग करके शिक्षा की उच्च गुणवत्ता ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की प्रतिष्ठा न केवल दिल्ली की आम जनता के बीच बढ़ी बल्कि समूचे देश सहित विदेशों के सामने भी कायम हो गई. निजी स्कूलों में आये दिन होने वाले फीस बढ़ोतरी से त्रस्त अभिभावकों ने न केवल राहत की सांस ही ली, बल्कि जो अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए निजी स्कूलों में भेजा करते थे, वे भी अपने बच्चों का नामांकन इस उच्च गुणवत्तापूर्ण सरकारी स्कूलों में कराने लगे.

दिल्ली सरकार ने दिल्ली के नागरिकों के स्वास्थ्य का भरपूर ख्याल रखा. केन्द्र की सरकार ने जहां स्वास्थ्य सेवा को व्यवसाय बना दिया और उसे पैसा कमाने का जरिया समझने लगा. इसके उलट दिल्ली सरकार तकरीबन हर मोहल्ले में मुहल्ला क्लीनिक की स्थापना की और लोगों को मुफ्त ईलाज, मुफ्त जांच की शानदार और उच्चस्तरीय चिकित्सा प्रणाली की स्थापना कर आम लोगों का दिल जीत लिया. इतना ही नहीं सरकारी अस्पतालों में किसी कारण इलाज न हो पाने की सूरत में निजी अस्पतालों में न केवल उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराने का दायित्व निभाहा, बल्कि उस पर लगने वाला कुल खर्च भी दिल्ली सरकार ने वहन किया. केन्द्र की मोदी सरकार ने केवल आयुष्मान कार्ड जैसा बकबास योजना चालू कर केवल लोगों को ठगने और बड़े घोटालों को पल्लवित-पुष्पित किया.

देश के भाजपा शासित अन्य राज्यों में जहां सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों को सड़क पर ही मरने छोड़ दिया करते हैं, अथवा अस्पतालों में लावारिस की तरी या निजी अस्पतालों में लाखों की फीस लेने के बाद ही इलाज करते हैं. इसके उलट दिल्ली सरकार ने एक कारगर नीतियों को लागू किया और सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने वाले को 2000 रूपया का ईमान राशि मिलने के बाद उसका इलाज सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की व्यवस्था की, जिसका कुल खर्च दिल्ली सरकार ने उठा रही है. इस बेमिशाल और कारगर नीतियों ने दिल्लीवासियों के जीवन की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर दी.

दिल्लीवासियों के जीवन की सबसे मुश्किल चीज पानी और बिजली की मुफ्त देने की कवायद शुरू की, जिसका परिणाम यह निकला कि दिल्ली के आम गरीब और मध्यम वर्ग के नागरिकों की बुनियादी समस्या हल हो गया. बाद में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में मार्शल की नियुक्ति, फ्री बस सेवा, डोर-टू-डोर सेवा, सीसीटीवी लगाये जाने आदि जैसे कामों को सरल और सहज कर देने के कारण दिल्लीवासियों के जीवन को सुरक्षित करने में बेमिशाल उपलब्धि हासिल हुई. भ्रष्टाचार दूर होने के कारण जो धनराशि भ्रष्टाचारियों के भेंट चढ़ जाया करती थी, वह धनराशि अब दिल्ली के नागरिकों की सेवा में खर्च होने लगी.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार की इन शानदार उपलब्धियों की तुलना में केन्द्र की मोदी सरकार अपने पूरे 6 सालों के कार्यकाल में देश के किसी भी हिस्से में कोई काम नहीं किया सिवाय देश भर में हिन्दु-मुस्लिम का फर्जी डिबेट पैदा करने, पाकिस्तान-पाकिस्तान का राग अलापने, विदेशों में हजारों करोड़ रूपये फूंक कर ऐश-मौज, देश की मेहनतकश जनता के खून-पसीने के लाखों करोड़ रूपयों को अपने काॅरपोरेट दोस्तों में बांटने, उसे विदेश भगा कर सेटल करने के सिवा और कुछ नहीं किया. उसके निगाह में आम आदमी कीड़े-मकोड़ों और मोदी और उसके काॅरपोरेट दोस्तों के ऐश-मौज खातिर धन कमाने का जरिया मात्र बनकर रह गया है.

ऐसे में दिल्ली समेत देश की जनता को लूटने वाले केन्द्र की मोदी सरकार देश की जनता को दिखाने योग्य कोई भी हितकारी योजना नहीं दिखा सकती इसलिए उसने सबसे बेहतर रास्ता यही चुना कि अगर बड़ी लकीर नहीं खींच सकते तो उस लकीर को मिटा दिया जाये. और केन्द्र की मोदी सरकार इसी योजना में लग गई. उसने दिल्ली सरकार के कामकाज करने के रास्ते में रोड़े अटकाने शुरू किया. दिल्ली के अपने पालतू कुत्ते उपराज्यपाल और उच्च न्यायलय के सहयोग से तमाम तरीके आजमाये. आये दिन दिल्ली सरकार के मंत्रियों, विधायकों को फर्जी मुकदमें में फंसा-फंसा कर जेल भेजा जाने लगा. यहां तक कि इसी कारण केन्द्र की मोदी सरकार अपने पालतू कुत्तों के जरिये दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर हमले करवाये, उनकी हत्या तक करवाने की कोशिश की. यह सब सिर्फ इसलिए किया गया कि दिल्ली सरकार जनता के कामों को नहीं कर सके, और केन्द्र की मोदी सरकार अपने दलाल-चापलूस मीडिया का सहारा लेकर दिल्ली समेत देश की जनता को हमेशा गुमराह कर सत्ता हासिल करता रहे. परन्तु दिल्ली सरकार ने अपने कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू कर मोदी जैसे धूर्त के चेहरे पर करारा तमाचा जड़ा है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है.

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