Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

क्या देश और समाज के इस हालत पर गुस्सा नहीं आना चाहिए ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 22, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

क्या देश और समाज के इस हालत पर गुस्सा नहीं आना चाहिए ?

 

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

अब नसीरुद्दीन शाह जैसे मुस्लिम नाम वाले किसी भी व्यक्ति को इस माहौल में … क्या डरना नहीं चाहिए ? क्या देश की चिंता नहीं करना चाहिए ? क्या देश और समाज के इस हालत पर गुस्सा नहीं आना चाहिए ? या उन्हें निर्लिप्त भाव से भाड़ में जाये देश और समाज मुझे तो दाम कमाना है पर वैसे ही concentrate करना चाहिए जैसे सदी के महानायक केंद्रित रखते हैं या उन्हें इन स्थितियों और घटनाओं पर गर्वित होते हुए प्रसन्नता व्यक्त करना चाहिए ?

स्कूल जाती लड़की सरेराह पेट्रोल डाल जला दी गयी. हत्यारे ने उसकी मां को फोन कर सूचित भी किया तेरी लड़की जला दी है, जाकर उठा ले !

दंगा रोकने गए पुलिस अधिकारी को गोली मार दी जाती है. हमराह भाग जाते हैं. थाने और वाहन जला दिए जाते हैं. सत्ताधारी सांसद और विधायक हार्ट अटैक से मृत्यु बताते हैं. मुख्यमंत्री इसे दुर्घटना मानते हैं. फ़र्ज़ी लोग झूठे फंसा कर पकड़ लिए जाते हैं. हत्यारे खुले घूमते हैं और वीडियो जारी करते रहते हैं.

विधायक अपनी ही बिरादरी की नाबालिग से बलात्कार करता है. पिता को पुलिस कस्टडी में उसके गुर्गे पीट-पीट कर मार डालते हैं. बलात्कारी के पक्ष में सत्ताधारी पार्टी के समर्थक तिरंगा यात्रा निकालते हैं.




दलित दूल्हा जो खुद पुलिस में नियुक्त है, को घोड़े पर एक वर्ग बारात नहीं निकालने देता है. न्यायालय, पुलिस-प्रशासन तक सरेंडर कर देते हैं. न्यायालय के आदेश से बारात निकलती भी है तो उच्चवर्णीय द्विज गांव में शादी का सामाजिक बहिष्कार करते हैं.

मंदिर का पुजारी मंदिर की सत्ता हथियाने और ट्रस्ट को बदनाम करने के लिए रसोइए के साथ मिलकर मंदिर के प्रसाद में ज़हर मिला कर 15 मासूम निर्दोष लोगों की हत्या कर देता है. सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं.

दलित के बेगार करने से मना करने पर उच्चवर्णीय द्विज उसे गांव की भरी चौपाल पर बांध कर पीटते हैं और जूते में परोसा पेशाब पीने को मजबूर कर देते हैं.




दलित लड़का घोड़ी की सवारी करता था इसलिये अगड़े उसकी हत्या कर देते हैं. मूंछ रखने पर मूंछें उखाड़ लेते हैं. जूतियां पहने पर अकेले लड़कों को पकड़ कर समूह उनको पीटता है और जूतियां सर पर रखने को मजबूर कर देता है. इन सब घटनाओं को हिंदुत्व पर घमंड करने वाला उच्च वर्ण वीडियो बनाता है और सोशल साइट्स पर दबंगई प्रदर्शन करने हेतु अपलोड करता है. इनमें से किसी भी अपराध में मलेच्छ सीधे-सीधे विक्टिम या आरोपी के रूप में शामिल नहीं है.

कहीं भी विक्टिम्स के लिए कोई भी विरोध प्रदर्शन कैसा भी देशभक्त या राष्ट्रवादी संस्थाएं नहीं करती. उल्टे सत्ताधारी, भगवा राजनीति के अलम्बरदार, दक्षिणपंथी रुझान के बुद्धिजीवी आरोपियों का समर्थन करते हैं और विक्टिम्स को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करते हैं. सरकार का भी शोषकों को समर्थन रहता हैं.




अब नसीरुद्दीन शाह जैसे मुस्लिम नाम वाले किसी भी व्यक्ति को इस माहौल में … क्या डरना नहीं चाहिए ? क्या देश की चिंता नहीं करना चाहिए ? क्या देश और समाज के इस हालत पर गुस्सा नहीं आना चाहिए ? या उन्हें निर्लिप्त भाव से भाड़ में जाये देश और समाज मुझे तो दाम कमाना है पर वैसे ही concentrate करना चाहिए जैसे सदी के महानायक केंद्रित रखते हैं या उन्हें इन स्थितियों और घटनाओं पर गर्वित होते हुए प्रसन्नता व्यक्त करना चाहिए ?

जैसे मैं खुश हूं, क्योंकि 31 पेरसेंटियों को उनके किये का फल मिल रहा है और कोई मलेच्छ क्यों खुद को राष्ट्रद्रोही कहलाये ? पाकिस्तान का टिकट कटाये ? मैं तो इन घटनाओं से बड़ी सुरक्षा, चिंता रहित मनोस्थिति और प्रसन्नता महसूस कर रहा हूं. मैं सत्ताधारियों के चंडूओं-भन्डुओं के इन कृत्यों से गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं. आप कैसा महसूस कर रहे हैं भाई ?

  • फरीदी अल हसन तनवीर





Read Also –

‘किस किस को कैद करोगे ?’ बढ़ते राजकीय दमन के खिलाफ उठता आवाज
मनुस्मृति : मनुवादी व्यवस्था यानी गुलामी का घृणित संविधान (धर्मग्रंथ)
राजसत्ता बनाम धार्मिक सत्ता




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…] 

Previous Post

तीन राज्यों के चुनावों में भाजपा-कांग्रेस का वोट प्रतिशत

Next Post

माओवादियों की सैन्य तैयारी का आह्वान, गृहयुद्ध की भयावह चेतावनी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

माओवादियों की सैन्य तैयारी का आह्वान, गृहयुद्ध की भयावह चेतावनी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी सरकार की नाकाम विदेश नीति

May 26, 2020

मोदी सरकार अपनी प्राइवेट ट्रेन चलाने की असफल योजना को लगातार आगे बढ़ा रही है

November 18, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.