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अब खतरे में आम आदमी की जमापूंजी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 5, 2019
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अब खतरे में आम आदमी की जमापूंजी

केन्द्र की मोदी सरकार, जिसने आधार कार्ड आदि के विरोध के नाम पर देश की सत्ता हथियाई थी, ने आधार कार्ड को अनिवार्य बनाकर और बैंक अकाउंट सहित सिम कार्ड व अन्य सेवाओं को आधार नम्बर से जोड़ कर देश को अमेरिका का गुलाम बना दिया है, जिसकी भरपाई भारतवासी न जाने कब तक अपनी गुलामी से चुकाती रहेगी, यह तो भविष्य की बतायेगा, पर बैंकों को खंगालने की इस तरह की घटनायें आये दिन चलती रहेगी, जिससे हम देशवासियों के पास सिवा रोने के इस वेबकूफ मोदी सरकार ने और कोई उपाय नहीं छोड़ा है.

देश के महनतकश आम जनता के खून-पसीने की लाखों करोड़ रूपये की कमाई को चंद औद्योगिक घरानों के भेंट चढ़ाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (प्रसिद्ध उपन्यास हैरी-पॉटर के खलनायकलॉर्ड वॉल्डमोड के तर्ज पर जिसका नाम नहीं लिया जा सकता) ने जिस तरह ताबरतोड़ आधार कार्ड को मोबाईल सिम और बैंक अकांउट से जोड़ने भयावह साजिश की, वह नोटबंटी और जीएसटी की ही तरह विश्व के इतिहास में कभी नहीं सुना जाने वाला कृत्य बन कर रह गया है. मोदी के इस साजिश का भयावह परिणाम अब देश के सामने आ रहा है, जब आये दिन किसी-न-किसी का बैंक अकाउंट खाली किया जा रहा है.

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यों तो आम जनों के साथ धोखाधड़ी के छोटे-मोटे मामले रोज ही आ रहा है, जिसकी कहीं कोई सुनवाई भी नहीं होती है. परन्तु अब जब यह मामला मुम्बई के एक बड़े कारोबारी के खाते से 1.86 करोड़ रूपये महज फोन कॉल्स के माध्यम से खंगाल लिया गया, तब देशभर में हड़कम्प मच गया. मामला यों है कि मुम्बई के एक कारोबारी के मोबाईल पर एक रात लगातार कई फोन कॉल आये, जिसके बाद उसका मोबाईल काम करना बंद कर दिया. अगली सुबह जब उसने अपने खाते की जांच की तो पता चला कि उसका मोबाईल नम्बर जिस बैंक के खाते से जुड़ा था, उससे करीब 1.86 करोड़ रूपये चंपत हो गये हैं. रिपोर्ट करने और बैंकों की आपाधापी के बाद महज 20 लाख रूपये ही वापस आ पाये.



इस बारदात के बाद अखबारों में इन्टरव्यू देते हुए पटना से ईओयू के साईबर सेल के एस.पी. सुनिल कुमार बताते आम जनों को आगाह करते हुए कहते हैं, ‘‘हैकर अगर आधार नम्बर मांगे तो अपने आधार नम्बर की जानकारी किसी को नहीं देना है.’’ अब जबकि हर सिम कार्ड वाले, बैंक वाले से लेकर होटल और बाथरूम की सेवा तक में आधार कार्ड मांगे जा रहे है, बिना आधार कार्ड के इस देश में हर सेवा को प्रतिबंधित जैसा कर दिया गया है, बिना आधार नम्बर दिये सिम कार्ड, बैंक अकांउट तक बंद किये जा रहे हैं, तब ऐसे में पटना के एसपी द्वारा यह आगाह करना कि आधार नम्बर की जानकारी किसी को नहीं देना है, पूरी तरह वेबकूफाना हिदायत है, जिसका वास्तव में अब कोई आधार नहीं रह गया है.

पिछले दिनों ही आधार कार्ड/नम्बर के प्रबल समर्थक ट्राई के अध्यक्ष ने हेकड़ी दिखाते हुए अपना आधार नम्बर ट्विटर पर सार्वजनिक करते हुए चैलेंज दिया था कि कोई हैक करके दिखाये. इस चैलेंज के कुछ ही घंटे बाद एक हैकर ने इस ट्राई अध्यक्ष की हैकड़ी निकालते हुए उसके निजी जानकारी को सार्वजनिक कर दिया, और उसे हिदायत दिया कि आधार नम्बर से हर वह जानकारी निकाली जा सकती है, जिसको आधार नम्बर से लिंक किया जा चुका है. स्पष्ट तौर पर आधार नम्बर सुरक्षित नहीं है.



अब जब आधार नम्बर को विभिन्न सेवाओं को हासिल करने के नाम पर हर गली-नुक्कड़ों में टांग दिया गया हो और उसे लोगों के बैंक अकाउंट से जोड़ दिया गया हो, तो स्थिति बिल्कुल वैसी ही है, मानो घर में ताले लगाकर चाबी को सार्वजनिक तौर पर टांग दिया गया, फिर वह लोगों को हिदायत जारी करें कि अपने चाबी की रखवाली स्वयं करें, हमारी कोई जिम्मेवारी नहीं है, यह देश की जनता के साथ विश्वासघात के सिवा और कुछ नहीं है.

विदित हो कि आधार कार्ड का सर्वर अमेरिका में स्थित में है, जो आधार कार्ड से जुड़े हमारे तमाम डाटाओं का रखता है. वह उसे नियंत्रित और संचालित भी करता है, अर्थात् देश के तमाम नागरिकों की पहचान और उसके बैंक खाताओं की जानकारी अमरीका के पास है. भविष्य में कभी भारत अगर अमरीका के किसी नीति से असहमत होता है या उसका विरोध करता है, उस स्थिति में अमेरिका इन डाटाओं का इस्तेमाल कर न केवल देश के नागरिकों का बैंक अकाउंट ही खंगाल सकता है, बल्कि उसकी हत्या आदि कर देश को घुटनों पर भी ला सकता है.



केन्द्र की मोदी सरकार, जिसने आधार कार्ड आदि के विरोध के नाम पर देश की सत्ता हथियाई थी, ने आधार कार्ड को अनिवार्य बनाकर और बैंक अकाउंट सहित सिम कार्ड व अन्य सेवाओं को आधार नम्बर से जोड़ कर देश को अमेरिका का गुलाम बना दिया है, जिसकी भरपाई भारतवासी न जाने कब तक अपनी गुलामी से चुकाती रहेगी, यह तो भविष्य की बतायेगा, पर बैंकों को खंगालने की इस तरह की घटनायें आये दिन चलती रहेगी, जिससे हम देशवासियों के पास सिवा रोने के इस वेबकूफ मोदी सरकार ने और कोई उपाय नहीं छोड़ा है.



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