Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सवर्ण आरक्षण की बात करना सिर्फ एक चुनावी स्टंट

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 8, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सवर्ण आरक्षण की बात करना सिर्फ एक चुनावी स्टंट

संविधान के अनुच्छेद 16(4) के अनुसार, आरक्षण किसी समूह को दिया जाता है और किसी व्यक्ति को नहीं. सुप्रीम कोर्ट कई बार आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के फैसलों पर रोक लगा चुका है. अपने फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन है. क्या संविधान में तब कोई बदलाव किया जा सकता है जब समानता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है. सुप्रीम कोर्ट केशवानंद भारती मामले में पहले ही कह चुका है कि संविधान की मूल संरचना को बदला नहीं जा सकता है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

केशवानंद भारती से संबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट के 13 जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा था कि संविधान की बुनियादी संरचना के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. अगर आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा दिया जाता है तो निश्चित तौर पर यह संविधान के अनुच्छेद में दी गई व्यवस्था के उलटा होगा क्योंकि इसमें प्रावधान है कि समान अवसर दिए जाएं और इस तरह से देखा जाए तो मौलिक अधिकार के प्रावधान प्रभावित होंगे और वह संविधान की बुनियादी संरचना का हिस्सा है.




सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आर्थिक पिछड़ेपन की पहचान आप कैसे कर सकते हैं ? अभी जिन आधारों की बात की जा रही है वह हास्यास्पद है.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने बीबीसी हिंदी से कहा, “मेरे हिसाब से यह आकाश में एक विशाल चिड़िया की तरह है जो चुनावी मौसम में आएगी. शायद सरकार इस तथ्य को स्वीकार कर चुकी है कि न्यायालय इसे गिरा देगा, लेकिन अगली सरकार के लिए इस मुद्दे से निपटना मुश्किल होगा. अभी यह करोड़ों बेरोज़गारों को सपने बेच रहे हैं.”

अगर आरक्षण 50 फीसदी की सीमा को पार कर दिया जाता है और इसके लिए संविधान में संशोधन किया जाता है, या फिर मामले को 9वीं अनुसूची में रखा जाता है ताकि उसे न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रख दिया जाए, तो भी मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में होगा.




सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी का कहना है कि कोर्ट ने व्यवस्था दे रखी है कि 9वीं अनुसूची का सहारा लेकर अवैध कानून को का बचाव नहीं किया जा सकता. अगर कोई कानून संवैधानिक दायरे से बाहर होगा तो उसे 9वीं अनुसूची में डालकर नहीं बचाया जा सकता.

अब संसद द्ववारा संविधान संशोधन की संभावना पर गौर कर लेते हैं. इस वक्त लोकसभा 523 सांसद हैं. संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी यानी वर्तमान में 348 सांसदों की जरूरत है. एनडीए सांसदों की स्थिति इस प्रकार है –

भाजपा             268
शिवसेना           18
एलजेपी            06
अकाली दल       04
अपना दल         02
एसडीएफ          01
जेडीयू              02
एनडीपीपी          01
कुल               302




राज्यसभा में 244 सांसद हैं. संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है यानी फिलहाल 163 सांसदों की जरूरत है. यहां एनडीए सांसदों की संख्या निम्न है –

भाजपा            73
जेडीयू             06
शिवसेना           03
अकाली दल       03
एसडीएफ         01
एनपीएफ         01
नाम निर्देशित    04
वाइएसआरसीपी 02
कुल              93




साफ दिख रहा है कि NDA इसे अपने दम पर पास नहीं करा पाएगा. यदि मोदी सरकार ने संसद के दोनों सदनों से विधेयक पास करा भी लिया, तो उसे इस विधेयक पर 14 राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी लेनी होगी. याद रहे कि इसमें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कोई रोल नहीं होगा, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का अपना अलग कानून है. इसके बाद अगर इस विधेयक को देश के 14 राज्यों की विधानसभाओं ने मंजूरी दे दी, तो इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही ये बिल कानून बन पायेगा.




यानी साफ दिख रहा है कि शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन सवर्ण आरक्षण की बात करना सिर्फ एक चुनावी स्टंट मात्र है. यदि भाजपा इस विषय में गंभीर होती तो यह विधेयक यह कुछ साल पहले ही लेकर आती ?

गिरीश मालवीय की रिपोर्ट




Read Also –

जीएसटी बिल बनी गले की हड्डी
सही विचार आखिर कहां से आते हैं ?
फर्जी सरकार के फर्जी आंकड़े
हम धर्मात्मा दिखना चाहते हैं, होना नहीं




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

यह लोकतंत्र कैसा महोदय ?

Next Post

106वीं विज्ञान कांग्रेस बना अवैज्ञानिक विचारों को फैलाने का साधन

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

106वीं विज्ञान कांग्रेस बना अवैज्ञानिक विचारों को फैलाने का साधन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जिन ताकतों की मजबूती बन हम खड़े हैं, वे हमारे बच्चों को बंधुआ बनाने को तत्पर है

May 13, 2020

अडानी, मोदी सरकार और सुप्रीम कोर्ट

March 2, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.