Tuesday, July 28, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

अवध का एक गायक और एक नवाब

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 10, 2024
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

उर्दू के विख्यात लेखक अब्दुल हलीम शरर की एक किताब ‘गुज़िश्ता लखनऊ’ है, जो हिंदी में पुराना लखनऊ नाम से छपी है. इस किताब में कुछ ऐसे लोगों के वाक्यात बयान किए गए हैं, जो अपने फन में,
अपनी कला में माहिर थे, लाजवाब थे.

एक बार अवध के नवाब ने अपने दरबारी गायक से पूछा, क्यों जी क्या अवध में तुमसे भी अच्छा कोई गायक है ?

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

दरबारी गायक दुविधा में पड़ गया. अगर वह कहता कि कोई मुझे अच्छा गायक नहीं है तो यह झूठा होता और अगर कहता है कि मुझे भी अच्छा गायक है तो नवाब बहुत नाराज हो जाते कि उसे अब तक दरबार में क्यों नहीं पेश किया गया.

डरते डरते गायक ने कहा, हां हुजूर मुझे अच्छा गायक भी अवध में मौजूद है.

नवाब ने कहा, वह कौन है ?

राज गायक ने कहा, उसका नाम हैदरी खान है.

नवाब ने हुक्म दिया कि उसे फौरन हाजिर किया जाए.

लोगों ने कहा, हुजूर हैदरी खान बहुत अजीब आदमी है… बहुत मस्त मौला है… मेले – ठेलों में गाने चला जाता है. कभी किसी मंदिर के सामने गाने लगता है तो कभी किसी दरगाह में महफिल सजा लेता है… उसका कोई ठिकाना नहीं है.. उसे ढूंढना बहुत मुश्किल है…

एक दिन नवाब अपने बजरे में बैठे गोमती की सैर कर रहे थे कि लोगों ने कहा, हुजूर वह जो आदमी जा रहा है वही हैदरी खान है.

हैदरी खान को नवाब के सामने पेश किया गया .

नवाब ने कहा, तुम हमारे यहां गाने क्यों नहीं आए ?

हैदरी खान अपनी कला में इतना ज्यादा डूबा हुआ आदमी था कि उसे यह भी पता नहीं था कि वह किस से बात कर रहा है.

हैदरी खान ने बड़ी मासूमियत से कहा, हुजूर मैं जानता नहीं कि आप कहां रहते हैं.

इस बात पर नवाब को हंसी आ गई.

खैर, हैदरी खान को दरबार में गाने के लिए बुलाया गया. उन्होंने ऐसा गाया की नवाब बहुत खुश हो गया. उसने इतना अच्छा गाना कभी नहीं सुना था….

गाना कुछ देर के लिए रुका. हैदरी खान ने जलेबी और बालाई खाने की फरमाइश की और यह भी कहा कि मेरी बीवी को भी जलेबी और बालाई भेज दी जाए क्योंकि मेरी आमदनी का और कोई रास्ता नहीं है.

अंतराल में नवाब ने काफी नशा किया. शराब, चरस, भांग, गांजा….मतलब जितने नशे वह करता था सब कर लिए.

गाने का दूसरा सेशन शुरू होने से पहले पता नहीं नवाब के दिल में क्या आया कि उसने हैदरी खान से कहा, सुनो जी बड़े गवइए बनते हो…. अगर तुमने मुझे अपने गाने से रुला नहीं दिया तो मैं तुम्हारे हाथ पैर बंधवा कर गोमती में फिकवा दूंगा.

यह सुनकर हैदरी खान के होश उड़ गए और उनकी समझ में आ गया कि वो नवाब के सामने गा रहे हैं जो उनकी जान तक ले सकता है. हैदरी खान ने ऐसा गाया कि हकीकत में नवाब की दोनों आंखों से आंसू निकलने लगे.

जब गाना खत्म हुआ तो नवाब इतना खुश हो गया कि उसने हैदरी खान से कहा, बोलो क्या मांगते हो ?

हैदरी खान ने कहा, सरकार पहले जानबख्शी का वायदा हो जाए तो अर्ज़ करूं..

नवाब ने कहा, हां मैं तुम्हारी जान न लेने का वायदा करता हूं… अब बताओ तुम क्या मांगते हो ?

हैदरी खान ने कहा, मैं यह मांगता हूं कि मुझे यहां दोबारा गाने के लिए न बुलाया जाए…

नवाब ने कहा, क्यों क्या बात है यह जगह तुम्हें पसंद नहीं आई ?

हैदरी खान ने कहा, जगह तो बहुत पसंद आई सरकार….. लेकिन आप नवाब हैं कभी आपका मिजाज बिगड़ गया तो आप मेरे हाथ पैर बंधवा कर गोमती में फिकवा देंगे ….मैं मर गया तो मेरे जैसा दूसरा गाने वाला जल्दी पैदा न होगा…. लेकिन आप मर गए तो उसी दिन कोई दूसरा नवाब पैदा हो जाएगा….

  • असगर वजाहत

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

‘माओवाद, वर्तमान समय का मार्क्सवाद-लेनिनवाद है’, माओ त्से-तुंग की 130वीं जयंती के अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय माओवादी पार्टियों का संयुक्त घोषणा

Next Post

पार्वती योनि

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

पार्वती योनि

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

लुम्पेन की सत्ता का ऑक्टोपस

December 9, 2018

13 दिसम्बर, 2023 को भगत सिंह लौट आये ?

December 13, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.