Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आप इनसे जीत ही नहीं सकते, हर बहस को अपने नैरेटिव में ढाल लेंगे

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 27, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

आप इनसे जीत ही नहीं सकते, हर बहस को अपने नैरेटिव में ढाल लेंगे

गिरीश मालवीय

आज तक चैनल पर चल रही रामदेव और IMA के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सचिव के साथ चल रही बहस अभी देख रहा था. रामदेव ने डॉक्टरों के पूरे मजे ले लिये. तर्क तो उनके पास कुछ थे नहीं लेकिन आज तक वालों ने डेढ़ श्यानापन दिखाते हुए रामदेव के माइक की आवाज को क्लियर रखा था और IMA के डॉक्टरों की आवाज को थोड़ा दबा दिया था.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

रामदेव ठसके के साथ बोल रहा था कि हमें मिलकर काम करना चाहिए ? यानी अकेले उसकी पतंजलि और दूसरी तरफ पूरी डॉक्टरों की जमात दोनों बराबर है ? और वह आयुर्वेद जैसी परम्परा का एक इकलौता ठेकेदार बन गया है. वैसे सच यह है कि IMA के साथ रामदेव सही कर रहा है. IMA की भी बहुत बड़ी गलती है सांप को फन उठाने से पहले ही कुचल देना चाहिए था. अब रामदेव की जो मर्जी आती है वो एलोपैथी के बारे में बयान दे देता है और बेचारे डॉक्टर कसमसाते हुए देखते रहते हैं.

अगर ये तमाम डॉक्टर जो अभी लाल-पीले हो रहे हैं ये तभी स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख कर बोल देते, जब रामदेव ने कोरोनिल बनाई थी और इसके ट्रायल जयपुर के एक मेडिकल कॉलेज में करवाए थे कि अब आप कोरोनिल से ही इलाज करवा लो. कोरोना के केस हमारे पास मत लाना, तो एक मिनट में डॉ. हर्षवर्धन को अक्ल आ जाती और स्वास्थ्य मंत्रालय सूत सावल में चलने लगता.

पिछले साल जून-जुलाई में जब रामदेव की दवा के गैर-कानूनी ट्रायल के लिए पतंजलि रिसर्च फाऊंडेशन के प्रस्ताव को अनुमति दी जा रही थी, तब एक डॉक्टर की आवाज नहीं आई कि यह गलत हो रहा है. कोरोना एक वायरस जनित बीमारी है, इसका इलाज रामदेव करने के दावे कैसे कर रहा है ? राजस्थान सरकार तक लाला रामदेव को फ्रॉड घोषित कर दिया था. राजस्थान सरकार का कहना है कि कि पतंजलि ने उनसे कोई परमिशन नहीं ली थी. बाबा रामदेव ने बिना परमिशन ट्रायल किया है.

उस वक्त उस पर तीन मुकदमे दर्ज किए गए थे. ये केस IMA दर्ज करवाता और अपनी तरफ से लड़ता तो आज रामदेव की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह अपने ट्रायल के डाटा आपको दिखा-दिखा कर आपकी हंसी उड़ाता. अगर IMA में थोड़ी भी अक्ल होती तो वह उसी वक्त उन तमाम न्यूज़ चैनलों पर मुकदमा ठोकता, जो रामदेव की कोरोनिल लॉन्च का सीधा प्रसारण कर रहे थे और रामदेव की चार सौ बीसी में सबसे बड़े सहयोगी बने हुए थे. आज आप देखिए कि रामदेव कैसे टीवी पर आपको जोकरों की तरह ट्रीट कर रहा है लेकिन अब पछताने से होत का, जब चिड़ियां चुग गयी खेत.

यकीन मानिए कुछ ही दिनों बाद खबर आएगी कि पतंजलि की कोरोनिल दवा की बिक्री में 200 फीसदी का इजाफा हुआ है. कुछ लोग डिबेट के एक दो शॉट देख कर लिख रहे कि डॉ. लेले ने रामदेव की ले ली लेकिन हकीकत यह है कि रामदेव ने तमाम डॉक्टर की ले ली. माफ कीजिएगा यदि भाषा गलत लगी हो तो लेकिन यही हकीकत है.

आप डिबेट का वीडियो देखिए. पूरे समय रामदेव कोरोनिल की ब्रांडिंग सामने टेबल पर लगा कर बैठा रहा. आप क्या सोचते हैं कि आप और हम किसी न्यूज़ चैनल पर लाइव जाए और अपने किसी प्रोडक्ट की वैसी ही ब्रांडिंग करे जैसे रामदेव ने की है तो क्या वह न्यूज़ चैनल उसकी इजाजत देगा ? हरगिज नहीं देगा. तो फिर आज तक ने ऐसी इजाजत रामदेव को क्यों दी ?

क्या बहस कोरोनिल पर हो रही थी ? बहस तो रामदेव की गलत बयानबाजी पर हो रही थी तो ऐसी बहस में रामदेव को कोरोनिल की ब्रांडिंग की इजाजत कैसे दे दी गई ? साफ है कि पतंजलि जितने विज्ञापन ‘आज तक’ को देता आया है, उसी को ध्यान में रखते हुए उसे कोरोनिल की ब्रांडिंग की इजाजत दी गयी है. अगर IMA के पदाधिकारियों में थोड़ी भी अक्ल होती तो वह कोरोनिल की ऐसी ब्रांडिंग देखते ही बहस को छोड़ उठ गए होते.

इस प्रकरण में IMA पूरी तरह से गलत प्रेक्टिस पर है, बल्कि मैं तो कहूंगा कि उसने जनता के सामने ऐसी डिबेट में भाग लेकर उसने एक गलत नजीर पेश की है. अब यही होगा कि रामदेव जैसा कोई एरा ग़ैरा नत्थू खैरा कभी भी खड़ा होकर दो चार गाली एलोपैथी को बकेगा और विवाद बढ़ने पर ऐसी पब्लिक डिबेट आयोजित करने को कहेगा जिसमें शान से IMA जैसे प्रतिष्ठित संगठन की ओर से उसके पदाधिकारी भाग लेने जाएंगे.

अगर IMA को रामदेव के बयान पर आपत्ति थी तो उसे सीधे-सीधे महामारी एक्ट में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी. और सरकार को कह देना चाहिए था कि यदि रामदेव को गिरफ्तार कर मुकदमा नहीं चलाया जाता है तो निर्धारित तारीख से सारे डॉक्टर हड़ताल पर जा रहे हैं. लेकिन नहीं, उसने पब्लिक डिबेट का रास्ता चुना.

रामदेव अच्छी तरह से जानता था कि ICMR और एम्स जैसी संस्थाओं द्वारा बार-बार कोरोना के इलाज की गाइडलाइंस बदले जाने और परस्पर विरोधी बयानों से पब्लिक पहले से ही डॉक्टरों के एक वर्ग से चिढ़ी हुई है. उसके लिए तो यह गोल्डन अपॉरचुनिटी थी, यह उसके लिए विन विन गेम था. वह इसमें कामयाब हुआ.

सोशल मीडिया के वह मित्र जो इसमें रामदेव की हार देख रहे हैं वो समझ नहीं पा रहे हैं कि इस बहस का ओवर ऑल क्या प्रभाव पड़ा. अचानक से रामदेव लाइम लाइट में आ गया है. उसने जनता के बड़े वर्ग में डॉक्टरों के प्रति गुस्से को अपने पक्ष में मोड़ लिया है. कहते हैं न कि सुअर के साथ लड़ाई लड़ने जाओ तो कीचड़ में तुमको उतरना पड़ेगा. सुअर का क्या है वो तो पहले से ही कीचड़ में लोट लगाए हुए हैं. IMA कीचड़ में उतरा है. इस डिबेट में यही हुआ है.

आप इनसे जीत ही नहीं सकते. हर बहस को अपने नैरेटिव में ढाल लेंगे. अगर रामदेव वाली डिबेट आपने ध्यान से देखी हो तो उसमें शुरुआत में डॉ. राजन शर्मा जो IMA के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं, वह रामदेव को चैलेंज करते हैं कि आप में इतना ही दम है तो आप लेवल 3 कोविड वार्ड में जाकर तीन हफ्ते तक ये धोती कुरता पहन कर काम कीजिए, मैं फिर बात करूंगा ?

यह पॉइंट रामदेव ने तुरन्त पकड़ लिया और जवाब दिया कि ये धोती-कुरता पर आप बात मत करिए. ये धोती लंगोटी मैंने आपकी मेहरबानी से नहीं पहनी. इस पर मत आइये. जवाब में डॉ. राजन शर्मा को एक जगह कहना पड़ा कि मैं भी एक सनातन ब्राम्हण परिवार से हूं. यानी बहस जिस दिशा में जानी चाहिए थी, वहां न जाकर किसी और दिशा में चली गयी और इसमें पॉइंट रामदेव ने बना लिए. एक तरह से उन्होंने यह कहने की कोशिश की कि धोती कुर्ते की बात कर आप हमारी संस्कृति पर हमला कर रहे हो !

अब अगली खबर पढिए जो आज आई है. रामदेव के अनन्य सहयोगी आचार्य बालकृष्ण कह रहे हैं कि ‘पूरे देश को क्रिश्चियानिटी में कन्वर्ट करने के षड्यंत्र के तहत, रामदेव जी को टारगेट करके योग एवं आयुर्वेद को बदनाम किया जा रहा है. देशवासियों, अब तो गहरी नींद से जागो, नहीं तो आने वाली पीढ़ियां तुम्हें माफ नहीं करेंगी.’ बालकृष्ण ने आईएमए के अध्यक्ष डॉ. जयालाल के एक कथित बयान को सोशल मीडिया में पोस्ट किया. इसमें बताया गया है कि जयालाल अस्पतालों और स्कूलों में क्रिश्चियानिटी को बढ़ावा देने की बात करते हैं.

यानी जबरा मारे और बेचारे डॉक्टरों को रोने भी न दे. बहस कोरोना को लेकर रामदेव के ऊलजलूल बयानों पर थी लेकिन बहस को धर्म पर कन्वर्ट कर दिया गया. संस्कृति पर कन्वर्ट कर दिया गया. ये ही काम देश का सत्ताधारी दल भी करता है और रामदेव को पॉवर भी वही से मिलती है. नहीं तो यही रामदेव जो आज गर्व से धोती कुरते की बात कर रहा था, वो एक रात मुंह छिपाकर सलवार कुरता पहनकर दिल्ली के रामलीला मैदान से भाग खड़ा न हुआ होता.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

संघी राष्ट्रवाद का दो कोर प्वाइंट : नफरत करो, गर्व करो और अनपढ़ों का राज कायम करो

Next Post

सियासी ठगों से सावधानी, सतर्कता और बचाव ही एकमात्र उपाय

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

सियासी ठगों से सावधानी, सतर्कता और बचाव ही एकमात्र उपाय

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्या आपको अभी भी सारकेगुड़ा का नाम याद है ?

October 4, 2021

रुस जैसे भरोसेमंद दोस्त को खोकर अमेरिका से दोस्ती गांठने का साहस मोदी जैसे अवसरवादी के पास भी नहीं

April 6, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.