Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अमरनाथ यात्रा : अर्थसत्ता, राजसत्ता और धर्मसत्ता का नापाक संश्रय है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 9, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
राम अयोध्या सिंह

स्वाभाविक प्राकृतिक घटनाओं को भी धार्मिक जामा पहनाकर लोगों की धार्मिक भावनाओं का शोषण करना कोई बनिया और ब्राह्मणों से सीखे. अमरनाथ गुफा में बर्फ के जमने से स्वत: शिवलिंग के आकार के बनने वाले दृश्य को शिवलिंग घोषित कर लोगों के बीच सालों- साल इतना प्रचारित किया गया है कि लोगों ने इस प्राकृतिक घटना से निर्मित दृश्य को अलौकिक और चमत्कारिक मानकर इसकी पूजा और अभ्यर्थना भी शुरू कर दी. और समय के साथ ही इसका आकर्षण इतना बढ़ा है कि आज यह एक बड़े हिन्दू समुदाय के लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में इसकी महिमा और मान्यता प्राप्त हो गई है.

जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा है और हम अधिक से अधिक आधुनिक होते जा रहे हैं, हमारी धार्मिक मान्यताओं में भी उसी अनुरूप और अनुपात में वृद्धि भी होती जा रही है. हमने आज तक प्राकृतिक घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने का कभी प्रयास ही नहीं किया है. सबको ईश्वर की कृपा या चमत्कार मानकर उसकी पूजा करने के अलावा और कोई भी तर्क हमें मंजूर नहीं है. लोगों की इसी मानसिकता और मनोवृत्तियों का बनियों और ब्राह्मणों ने जमकर फायदा उठाया है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

हर धार्मिक क्रिया-कलाप के लिए हम ब्राह्मणों पर आश्रित हैं और भीड़ जुटने के साथ ही बनियों के लिए मुनाफा कमाने का सुअवसर भी प्राप्त हो जाता है. यात्रियों को ढोने के लिए आवागमन के विभिन्न साधनों, होटलों, जरूरी सामानों की खरीददारी के लिए आवश्यक दुकानों, पुजारियों, खच्चरों, घोड़ों, पालकी ढोनेवालों और अन्य कई तरह की जरूरतों के लिए हजारों लोग लगे हुए होते हैं. इस मद में हर साल करोड़ों रुपये का कारोबार होता है.

बाजार को अपने हक में और भी फायदेमंद बनाने के लिए हर साल बनिए और ब्राह्मण हर तरह के तिकड़म करते हैं. तीर्थयात्रियों की जेब साफ करना ही इनका मूल मकसद होता है. दूसरी तरफ धर्म के नाम पर पुण्य कमाने के लिए तीर्थयात्री भी हर संभव कठिनाई सहने के लिए तैयार रहते हैं. वो यह मानकर चलते हैं कि उन्हें जितनी अधिक तकलीफ होगी, भगवान या देवता उनसे उतने ही अधिक प्रसन्न होंगे. तीर्थयात्रा में होनेवाली कठिनाइयों को वे प्रभु द्वारा ली जाने वाली परीक्षा समझते हैं और प्रभु इच्छा के नाम पर सब कुछ सहन करने के लिए तैयार हो जाते हैं.

अमरनाथ यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को हर साल ही किसी न किसी दुर्घटना का सामना करना ही पड़ता है. पर कभी-कभी ऐसी भयानक और दर्दनाक घटनाएं भी होती हैं, जो राष्ट्रीय समाचार का विषय बन जाते हैं. कल ही 8 जुलाई, 2022 को बादल फटने या अतिवृष्टि के कारण आए सैलाब में तेरह लोगों की मौत हो गई, अड़तालीस लोग घायल हो गए और चालीस लोग लापता हैं. ऐसी घटनाएं कुछ सालों के अंतराल पर अक्सर ही घटती रहती हैं. लेकिन सरकार आज तक भी तीर्थयात्रियों के लिए निरापद तीर्थयात्रा का प्रबंध नहीं कर सकी है.

हर साल सरकार द्वारा किए जाने वाले इंतजामों का ढिंढोरा तो खुब पीटा जाता है, पर वास्तविक धरातल पर कुछ खास नहीं होता है. वास्तव में यह सब कुछ आपदा में अवसर की तलाश की कवायद है. मजबूर तीर्थयात्रियों से जितना संभव हो, मुनाफा कमाना ही इसका उद्देश्य होता है. 1969 में 40 लोग मरे थे, 1996 में 263 लोग और 2018 में 4 लोग मरे थे. सरकार सिर्फ दिखावे के लिए दुःख प्रकट कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है. सच तो यह है कि तीर्थयात्रा और तीर्थयात्रियों के माध्यम से राजनीतिक दल अब अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने का भी भरसक प्रयास करते हैं.

कुल मिलाकर यह अर्थसत्ता, राजसत्ता और धर्मसत्ता का नापाक संश्रय है, जो अपने फायदे के लिए तीर्थयात्रियों की जिंदगी से खेल करने से भी नहीं चुकता. सहानुभूति के दो शब्द कहकर सरकार भी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर लेती है, लोग भी इस घटना को प्रभु की माया समझकर भूल जाते हैं और राजसत्ता, अर्थसत्ता और धर्मसत्ता का संश्रय फिर से अपने मुहिम में जुट जाता है, और लोग बार-बार ऐसी दुर्घटनाओं को सहने और भोगने के लिए अभिशप्त होते रहते हैं.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

अन्तर्ब्रह्माण्डीय पनौती नरेन्द्र मोदी का पनौती अब खून पी रहा है

Next Post

द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ स्पाइस जेट

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ स्पाइस जेट

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जो जितना भ्रष्ट होता है, वह उतनी ही देर पूजा करता है

June 19, 2021

तुम अकेली मादा नहीं हो

April 12, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.